‘120 बहादुर’ पर विवाद: फरहान अख्तर की फिल्म के खिलाफ केस क्यों हुआ?
फिल्म का नाम बदलने की मांग और हाई कोर्ट का फैसला
दोस्तों, आजकल बॉलीवूड में कोई भी फिल्म विवाद के बिना रिलीज नहीं होती लगती है। इस बार फरहान अख्तर की नई फिल्म ‘120 बहादुर’ को लेकर बवाल मचा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक PIL (Public Interest Litigation) फाइल की गई थी जिसमें फिल्म का नाम ‘120 बहादुर’ से बदलकर ‘120 वीर अहीर’ करने की मांग की गई थी। लेकिन
हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और फिल्म को 21 नवंबर 2025 को रिलीज होने की इजाजत दे दी।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर फिल्म के नाम को लेकर इतना विवाद क्यों हुआ? आइए पूरी कहानी समझते हैं।
‘120 बहादुर’ है क्या ? : –
फिल्म 1962 के रेजांग ला की लड़ाई पर आधारित है, जो पूर्वी लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर लड़ी गई एक ऐतिहासिक लड़ाई थी । ये वो जंग थी जब भारत और चीन के बीच युद्ध चल रहा था, और 120 भारतीय सैनिकों ने लगभग 3,000 चीनी सैनिकों का सामना किया था।
फिल्म में फरहान अख्तर मेजर शैतान सिंह भाटी की भूमिका निभा रहे हैं। ये फरहान की ‘तूफान’ (2021) के तीन साल बाद एक्टिंग में वापसी है। फिल्म को Excel Entertainment और Trigger Happy Studios ने बनाया है, और इसे Razneesh ‘Razy’ Ghai ने डायरेक्ट किया है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई ? : –
यादव समुदाय के सदस्यों ने गुरुग्राम में विरोध प्रदर्शन किया और फिल्म के टाइटल के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने रास्ते ब्लॉक कर दिए और मांग की कि फिल्म का नाम ‘120 वीर अहीर’ किया जाए।
महेंद्र सिंह पटवारी, जो अहीर रेजिमेंट के सदस्य हैं, ने कहा, “हमारी मांग है कि 120 बहादुर का नाम बदलकर 120 वीर अहीर कर दिया जाए। हमारे शहीदों के नाम फिल्म में होने चाहिए और इसे उन्हें समर्पित करके खत्म होना चाहिए”।
एक और प्रदर्शनकारी तरुण ने ANI से बात करते हुए कहा, “यादव समुदाय आज यहां इकट्ठा हुआ है। सरकार से हमारी कोई शिकायत नहीं है। हम सिर्फ फरहान अख्तर की ‘120 बहादुर’ का विरोध कर रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने देश के लिए बहुत बलिदान दिया है, लेकिन इस फिल्म में फोकस किसी और पर है”।
यादव समुदाय की क्या शिकायत थी ? : –
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि फिल्म में फरहान अख्तर (मेजर शैतान सिंह) को एक अकेले हीरो के रूप में दिखाया जा रहा है, जबकि असल में 100+ अहीर सैनिकों ने उनकी कमान में लड़ाई लड़ी थी। उनका मानना था कि चौहान समुदाय को प्रमोट करके उनके बलिदान को भुलाया जा रहा है।
तरुण ने कहा कि देश के दूसरे हिस्सों में लोगों को यादव समुदाय के योगदान के बारे में पता ही नहीं चलेगा अगर फिल्म के टाइटल में इसका जिक्र नहीं है । उनका कहना था कि जब फिल्म साउथ बेल्ट में रिलीज होगी, तो वहां के लोग यादव समुदाय के इतिहास से अनजान रह जाएंगे।
28 अक्टूबर 2025 को प्रदर्शनकारियों ने NH-48 को कई घंटों तक विरोध मार्च के जरिए ब्लॉक कर दिया। कुछ लोगों ने अलग अहीर रेजिमेंट बनाने की भी मांग की।
9 नवंबर 2025 को अहीर समुदाय के सदस्यों ने फरहान अख्तर के खिलाफ FIR दर्ज कराने की धमकी दी अगर फिल्म का नाम नहीं बदला गया।

हाई कोर्ट में क्या हुआ ? : –
संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा और शहीद हुए सैनिकों के परिवारों ने PIL फाइल की थी। उनकी मांग थी कि फिल्म का नाम बदला जाए और CBFC द्वारा दी गई certification को रद्द किया जाए क्योंकि इससे रेजांग ला की लड़ाई और शहीदों की पहचान से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आने वाली फीचर फिल्म ‘120 बहादुर’ इस सामूहिक इतिहास को घोर रूप से विकृत करती है, लड़ाई को ‘मेजर शैतान सिंह भाटी’ के काल्पनिक नाम के तहत एक अफसर की एकल वीरता के रूप में चित्रित करती है, जिससे अहीर सैनिकों की रेजिमेंटल और सामुदायिक पहचान मिट जाती है।
लेकिन हाई कोर्ट ने एक सख्त रुख अपनाया।
कोर्ट ने क्या कहा ? : –
सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस शील नागू ने याचिकाकर्ताओं से कहा, “आप इस बारे में इतने संवेदनशील क्यों हैं कि फिल्म का नाम क्या होना चाहिए? सैनिकों की बहादुरी उस 3 घंटे या ढाई घंटे की फिल्म में दिखेगी”। चीफ जस्टिस ने इस बात पर जोर दिया कि सिनेमाई चित्रण सभी 120 सैनिकों का सम्मान करता है।
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब फिल्म को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है, तो नाम को लेकर इतनी संवेदनशीलता क्यों?
हाई कोर्ट ने अंततः कहा कि आखिरी समय में ऐसी याचिका दायर करना, जब फिल्म ने आधिकारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं और रिलीज के करीब है, कोर्ट के समय की बर्बादी है।
फिल्म निर्माताओं ने क्या कहा ? : –
फरहान अख्तर के वकील एडवोकेट अभिनव सूद ने कहा कि ये याचिका समय से पहले है क्योंकि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां केवल फिल्म के टीजर के आधार पर हैं। किसी फिल्म को सिर्फ प्रमोशनल मटेरियल के आधार पर जज, सेंसर या प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पूरी फिल्म का मूल्यांकन सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए, और उसके बाद ही किसी शिकायत पर विचार किया जा सकता है।
याचिका maintainable नहीं है क्योंकि Cinematograph Act, 1952 की धारा 6 के तहत एक विशिष्ट उपाय है, जो केंद्र सरकार को CBFC के आदेशों की जांच या संशोधन करने की शक्ति देता है और याचिकाकर्ताओं ने पहले ही इस उपाय का इस्तेमाल किया है।

CBFC और सरकार का पक्ष : –
यूनियन गवर्नमेंट के सीनियर एडवोकेट धीरज जैन ने बताया कि फिल्म की जांच एक Examination Committee द्वारा की गई थी जिसमें 4 स्वतंत्र सदस्य और 1 परीक्षा अधिकारी शामिल थे।
इसमें एक independent subject expert की भी मदद ली गई जिन्होंने भारतीय सेना में लगभग 30 साल सेवा की थी और उसी रेजिमेंट से ब्रिगेडियर के पद से रिटायर हुए थे जिसे फिल्म में दिखाया गया है।
सरकार की तरफ से ये भी बताया गया कि 1952 Act, 2024 Rules और केंद्र सरकार द्वारा जारी सभी दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन किया गया है।
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फिल्म की स्पेशल बातें : –
ये फिल्म सिर्फ एक साधारण वॉर ड्रामा नहीं है।
- फिल्म के संवाद सुमित अरोड़ा ने लिखे हैं और पटकथा राजीव जी मेनन ने लिखी है।
- म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने दिया है और लिरिक्स फरहान के पिता जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
- युद्ध के दृश्यों को प्रामाणिकता के साथ फिर से बनाने के लिए, फिल्म निर्माताओं ने Snow Business को बुलाया ताकि बर्फ से ढके विशाल परिदृश्य को फिर से बनाया जा सके।
- फिल्म की शूटिंग 4 सितंबर 2024 को लद्दाख में शुरू हुई थी और भारतीय सेना के लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ मुख्य रूप से लद्दाख में शूट की गई, कुछ सीन राजस्थान और मुंबई में भी शूट किए गए।
- फिल्म के ओपनिंग सीक्वेंस के लिए अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज दी है। उनकी आवाज पोस्ट-प्रोडक्शन में जोड़ी गई है।
स्टार कास्ट और प्रोडक्शन : –
- फरहान अख्तर के अलावा, अंकित सिवाच फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
- राशि खन्ना फरहान अख्तर के opposite महिला मुख्य भूमिका में हैं।
- इसके अलावा विवान भाटेना, धनवीर सिंह, और साहिब वर्मा भी अहम किरदारों में हैं।
- फिल्म में एजाज खान, मृणाल ठाकुर, परेश रावल, हुसैन दलाल भी अहम भूमिकाओं में हैं।
- फिल्म में सैनिकों का किरदार निभाने वाले ज्यादातर एक्टर पहली बार कैमरे के सामने आए हैं। उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय एक्शन टीम द्वारा 6 महीने तक कठिन प्रशिक्षण दिया गया।
डिफेंस मिनिस्टर का सम्मान : –
निर्माताओं ने रेजांग ला की लड़ाई में लड़ने वाले बहादुर सैनिकों को सम्मानित करने के लिए एक customised ‘My Stamp’ लॉन्च किया। इस विशेष स्टैम्प का अनावरण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में किया।
फाइनल वर्डिक्ट : –
कोर्ट ने याचिका को dispose of कर दिया और रिकॉर्ड में दर्ज किया कि सरकार याचिकाकर्ताओं की representation पर जल्द ही फैसला लेगी। हाई कोर्ट ने नोट किया कि फिल्म के certification की समीक्षा अभी भी pending है और यूनियन गवर्नमेंट ने आश्वासन दिया है कि वो दो दिनों के भीतर इस मामले पर फैसला करेगी।
इस तरह फिल्म को 21 नवंबर 2025 को scheduled release date के अनुसार रिलीज होने की मंजूरी मिल गई।
दोस्तों, ये पूरा मामला बहुत sensitive है। एक तरफ यादव समुदाय की भावनाएं हैं जो अपने पूर्वजों के बलिदान को सही तरीके से represent करना चाहते हैं। दूसरी तरफ फिल्म निर्माताओं का कहना है कि पूरी फिल्म सभी 120 सैनिकों को समर्पित है, न कि सिर्फ एक व्यक्ति को।
फिल्म को ‘120 बहादुर’ इसलिए टाइटल दिया गया है जो सैनिकों की सामूहिक बहादुरी को दर्शाता है। फिल्म की शुरुआत में disclaimer भी ‘बहादुर सैनिकों’ को श्रद्धांजलि देता है, जिसमें कहा गया है कि पूरी फिल्म भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को समर्पित है।
हाई कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही लगता है। फिल्म को पूरा देखे बिना सिर्फ टीजर के आधार पर judgement करना उचित नहीं है। और अगर फिल्म में कोई गलती है तो उसके लिए proper legal remedy available है।
21 नवंबर को जब फिल्म रिलीज होगी, तब ही पता चलेगा कि फिल्म निर्माताओं ने इस ऐतिहासिक घटना को किस तरह से पेश किया है। उम्मीद है कि फिल्म सभी 120 बहादुर सैनिकों को उचित सम्मान देगी और उनकी शौर्यगाथा को सही तरीके से दिखाएगी।