22 साल के भारतीय मूल के स्कूल दोस्तों ने बनाया इतिहास, बने दुनिया के सबसे कम उम्र के अरबपति : –
अगर सोचा जाए कि कोई 22 साल का युवा अरबपति बन सकता है, तो शायद यह सपना ही लगे। लेकिन आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी और मेहनत ने यह मुमकिन कर दिखाया है। हाल ही में तीन दोस्तों ने, जिनमें से दो भारतीय मूल के हैं, 22 साल की उम्र में ही अरबपति बनकर एक बड़ी मिसाल कायम कर दी है। आइए इस ब्लॉग में उनकी कहानी, उनके स्टार्टअप और सफलता के बारे में सरल भाषा में जानते हैं।
कौन हैं ये 22 साल के युवा अरबपति ? : –
ब्रेंडन फूडी, आदर्श हिरेमठ और सूर्य मिधा ये तीन युवा हैं जिन्होंने संजोया था एक बड़ा सपना। ये तीनों स्कूल के दोस्त थे, जिन्होंने अमेरिका के सैन जोस में बेलर्माइन कॉलेज प्रिपरेटरी स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। यहां वे न सिर्फ पढ़ाई करते थे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की डिबेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर जीतते भी थे। यही से उनकी पैठ टेक्नोलॉजी और बिजनेस की दुनिया में शुरू हुई।
Mercor: उनकी उद्यमिता की कहानी : –
इन दोस्तों ने मिलकर सिलिकॉन वैली में एक AI-आधारित भर्ती (recruitment) प्लेटफ़ॉर्म बनाया जिसका नाम है Mercor। शुरुआत में Mercor का मकसद था भारतीय सॉफ़्टवेयर इंजीनियर्स को यूएस स्टार्टअप्स से जोड़ना और उन्हें नौकरी दिलाना। जैसे-जैसे AI तकनीक की मांग बढ़ी, वे भी अपना मॉडल बदलकर AI को बेहतर बनाने के लिए मानव विशेषज्ञों को जोड़ने लगे। आज Mercor के पास 30,000 से अधिक विशेषज्ञ हैं जो AI मॉडल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
हाल ही में Mercor ने $350 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की, जिससे इसकी वैल्यू $10 बिलियन यानी लगभग 82,000 करोड़ रूपए से ज्यादा पहुंच गई। इसी के कारण ये तीनों मित्र अब एक-एक कर लगभग $2 बिलियन यानी 16,400 करोड़ रूपए से ऊपर के मालिक बन गए हैं। यह रिकॉर्ड उन्होंने Meta के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को भी पीछे छोड़ दिया, जो 23 साल की उम्र में अरबपति बने थे।
उनकी पढ़ाई और मेहनत की राह : –
- आदर्श हिरेमठ ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन Mercor के बिजनेस में पूरी तरह ध्यान देने के लिए कॉलेज छोड़ दिया।
- सूर्या मिधा और ब्रेंडन फूडी भी अपने-अपने यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन स्टार्टअप की सफलता ने उन्हें उसी राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
- तीनों Thiel Fellowship का हिस्सा हैं, ये एक प्रोग्राम है जो युवा नवप्रवर्तकों को $100,000 की धनराशि देता है, ताकि वे कॉलेज छोड़ कर अपने उद्यम के लिए पूरी तरह समर्पित हो सकें।
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खास बातें जो इसे प्रेरणादायक बनाती हैं : –
- 22 साल की उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना अद्भुत है, जो यह दिखाता है कि जब जुनून, तकनीक और अवसर मिलते हैं तो असंभव भी मुमकिन हो जाता है।
- ये तीनों दोस्तों ने बिजनेस को सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं बल्कि AI तकनीक को मानव-केंद्रित और बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया।
- Mercor जैसे स्टार्टअप्स ने साबित कर दिया है कि भारत के युवा विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
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आम आदमी की नजर से : –
सोचिए अगर इतना कम उम्र में किसी ने इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लिया, तो हमारे युवा भी साहस और मेहनत से कुछ भी कर सकते हैं। इनकी कहानी बताती है कि अगर मिला सही अवसर और लगन, तो सपने हकीकत बन सकते हैं। Mercor की सफलता से पता चलता है कि तकनीक और मानव संसाधन का मेल कितना शक्तिशाली हो सकता है।
इन तीनों दोस्तों की कहानी से हम सीख सकते हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, और असली मूल्यमान तो आपका दृष्टिकोण, मेहनत और लगन है। Mercor की सफलता ने दुनिया को दिखा दिया कि नए जमाने का भारत युवा, साहसी और नवोन्मेषी है।
