विजय माल्या की फेल कंपनी से बने 6.8 बिलियन डॉलर के साम्राज्य तक: ढींगरा भाइयों की कहानी

भारत के छोटे रंग-रोगन के स्टोर्स से लेकर 6.8 बिलियन डॉलर के साम्राज्य तक: ढींगरा भाइयों की विजय माल्या की कंपनी को नई जान देने की कहानी : –

आज हम आपको एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो शुरुआत में छोटे-मोटे पेंट के स्टोर से शुरू होकर आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी पेंट कंपनी बनाने तक का सफर है। ये कहानी है ढींगरा भाइयों, कुलदीप सिंह और गुरबचन सिंह ढींगरा की, जिन्होंने विजय माल्या की डूबी हुई कंपनी बर्गर पेंट्स (Berger Paints) को खरीदकर एक 6.8 बिलियन डॉलर के बिजनेस में तब्दील कर दिया।

छोटी शुरुआत : अमृतसर का पहला पेंट शॉप : –

ढींगरा परिवार की पेंट के साथ जुड़ाव 1898 से शुरू होता है, जब उनके पूर्वजों ने अमृतसर में एक छोटा पेंट का दुकान खोला था। धीरे-धीरे परिवार ने पेंट इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। 1970 के दशक में ढींगरा भाइयों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करके इस काम को आगे बढ़ाना शुरू किया। उस दौर में उनके स्टोर्स का कारोबार लगभग दस लाख रुपए सालाना था।

विजय माल्या की फेल कंपनी का अधिग्रहण : –

1990 के दशक में एक बड़ा मौका आया, जब विजय माल्या के पास मौजूद बर्गर पेंट्स कंपनी परेशानियों में फंस गई। इस समय कुलदीप और गुरबचन ने एक साहसिक फैसला लिया और बर्गर पेंट्स को खरीदा। विजय माल्या की कंपनी को सुधारना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन भाईयों ने इसे चुनौती समझा।

बिजनेस की नई रणनीति: गुणवत्ता, किफायती दाम और मार्केटिंग : –

ढींगरा भाइयों ने बर्गर पेंट्स को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई रणनीतियां अपनाई। सबसे पहले, उन्होंने गुणवत्ता पर फोकस किया। उन्हें समझ था कि ग्राहक सस्ते लेकिन टिकाऊ पेंट चाहते हैं। इसके साथ ही मार्केटिंग में भी नए तरीके अपनाए गए ताकि ब्रांड को नई पहचान मिले। उनका मानना था कि ग्राहक की संतुष्टि और भरोसा ही सफलता की असली कुंजी है।

FY25: वित्तीय प्रदर्शन की कहानी : –

  • Berger Paints ने FY25 में 11,545 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 3% ज्यादा है।
  • भारत में बाजार हिस्सेदारी भी 20% से ऊपर पहुंच गई है। FY25 की चौथी तिमाही में (जनवरी से मार्च 2025), कंपनी की कुल इनकम 2,536 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल की तुलना में 3.2% ज्यादा है। हालांकि, यह Q3 FY25 की तुलना में 15.3% कम रही।
  • शुद्ध लाभ (Net Profit) 222.62 करोड़ रुपये था, जो Q4 FY24 से 19.7% बढ़ा लेकिन Q3 FY25 से 24.8% कम रहा।
  • Q1FY26 (अप्रैल-जून 2025) में कंपनी ने 3,229 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया, जो Q1FY25 की तुलना में 3.3% ज्यादा है, लेकिन शुद्ध लाभ 315 करोड़ रुपये था, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 11% कम है।

सफलता के पीछे की रणनीति : –

ढींगरा भाइयों ने गुणवत्ता को सबसे पहले रखा। उनके प्रोडक्ट सस्ते तो हैं ही, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। कंपनी ने वाटरप्रूफिंग, निर्माण रसायन और ऑटोमोटिव कोटिंग्स जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है। मार्केटिंग में नए-नए तरीकों से ग्राहकों को जोड़ा और 13,000 से अधिक खुदरा स्टोर्स खोलकर देश भर में गहरा प्रवेश बनाया। साथ ही, 38 नए प्रोडक्ट्स को जोड़ा गया ताकि हर जरूरत के लिए ग्राहक का विकल्प उपलब्ध रहे। भविष्य में कंपनी विस्तार जारी रखने का प्लान बना रही है, खासतौर से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में।

विजय माल्या की फेल कंपनी से बने 6.8 बिलियन डॉलर के साम्राज्य तक: ढींगरा भाइयों की कहानी
विजय माल्या की फेल कंपनी से बने 6.8 बिलियन डॉलर के साम्राज्य तक: ढींगरा भाइयों की कहानी(image source – channeliam)

भारत से विश्वव्यापी सफर : –

ढींगरा भाइयों की मेहनत और सूझबूझ ने बर्गर पेंट्स को भारत में दूसरे नंबर की पेंट कंपनी बना दिया। लेकिन इतना ही नहीं, कंपनी ने नेपाल, बांग्लादेश, रूस और पोलैंड जैसे देशों में भी अपने कारोबार का विस्तार कर लिया। साल 2023 तक कंपनी का राजस्व 10,619 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

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परिवार की नई पीढ़ी और भविष्य की योजनाएं : –

ढींगरा परिवार की अगली पीढ़ी भी इस बिजनेस में एक्टिव है। कुलदीप सिंह ढींगरा की बेटी ऋषमा कौर और गुरबचन सिंह ढींगरा के बेटे कनवर्तिप सिंह ढींगरा कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं। कंपनी की अगली योजना और भी बाजारों में विस्तार करने की है।

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आम आदमी की नजर से देखें तो : –

यह कहानी हमें यही सिखाती है कि हार मानना विकल्प नहीं होता। अगर मेहनत और सही प्लानिंग हो तो छोटे से शुरूआत भी बड़े सपनों तक पहुंचा सकती है। विजय माल्या की फेल कंपनी को खरीदकर जब ढींगरा भाइयों ने उसे नया जीवन दिया, तो यह साबित हो गया कि भारतीय उद्यमिता में कोई कमी नहीं है।

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