थिएटर कमांड में जल्दबाजी क्यों है खतरा ? वायु सेना प्रमुख की राय

वायु सेना प्रमुख ए पी सिंह और थिएटर कमांड की नई सोच

थिएटर कमांड क्या है और क्यों चर्चा में ? : –

आजकल बात हो रही है ‘थिएटर कमांड’ की, जो हमारी सैनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। थिएटर कमांड का मतलब होता है कि सेना के तीनों अंग — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — एक ही क्षेत्र या थिएटर में एकजुट होकर काम करें। इससे ताकतवर और तेज नियंत्रण हो सकेगा। लेकिन ये नई व्यवस्था आसान नहीं है, इसके अपने फायदे और चुनौतियां हैं।

वायु सेना प्रमुख ए पी सिंह की राय : –

हमारे एयर चीफ मार्शल, वायु सेना प्रमुख ए पी सिंह ने इस मसले पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को दूसरों, जैसे अमेरिका या चीन की नकल नहीं करनी चाहिए। अपने हालात के मुताबिक़, अपनी जरूरतों का हिसाब लगाकर ही कोई नई योजना बनानी चाहिए। वे जल्दबाज़ी में इस नई व्यवस्था को लागू करने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि बिना सोचे-समझे सब कुछ अस्त-व्यस्त करके तेजी में बदलाव करना सही नहीं होगा।

नया मॉडल या पुराना ? : –

ए पी सिंह ने एक सुझाव भी दिया है कि दिल्ली में एक ‘ज्वाइंट प्लानिंग एंड कॉर्डिनेशन सेंटर’ बने। यानी एक ऐसा केंद्र जहां सभी सेनाओं की मिलीजुली योजना बने और समन्वय हो। इससे थिएटर कमांड जैसा बड़ा बदलाव धीरे-धीरे कामयाब हो सकेगा। वे नए थिएटर कमांडर की जिम्मेदारी को भी बड़े स्तर पर समझते हैं कि वे किससे निर्देश लेंगे और कैसे तालमेल बैठाएंगे।

थिएटर कमांड के फायदे : –

  • तीनों सेनाएं मिलकर क्षेत्र की सुरक्षा करेंगी, जिससे ताकत बढ़ेगी।
  • संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, खासकर आधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी का।
  • एक नेशनल स्तर की रणनीति से सीमा पर संतुलित और सटीक प्रतिक्रिया संभव होगी।

ये भी पढ़े : – लोकतंत्र पर सवाल: DMK ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के SIR आदेश को चुनौती दी

थिएटर कमांड में जल्दबाजी क्यों है खतरा ? वायु सेना प्रमुख की राय
थिएटर कमांड में जल्दबाजी क्यों है खतरा ? वायु सेना प्रमुख की राय (image source – aaj tak )

चुनौतियां और सावधानियां : –

वायु सेना प्रमुख ने प्रेस में यह भी कहा कि वर्तमान में हमारे पास संसाधनों की कमी है। साथ ही, प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो रहे, जैसे कि तेजस जैस विमान की डिलीवरी में देरी। इसलिए बिना तैयार पूरी योजना को लागू करना नुकसानदेह होगा। साथ ही, थिएटर कमांड की हेडक्वार्टर के स्थान पर भी विचार किया जा रहा है — जैसे पश्चिमी थिएटर के लिए जयपुर या पूर्वी के लिए कोलकाता।

ये भी पढ़े : – 51 करोड़ मतदाताओं के लिए बड़ी प्रक्रिया: 12 राज्यों/संघशासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) आज से

भविष्य की सुरक्षा और युद्ध की तैयारी : –

ए पी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी सफलताओं का जिक्र करते हुए बताया कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल कितना जरूरी है। उन्होंने ड्रोन तकनीक और उसकी जरूरत पर भी ज़ोर दिया है, लेकिन जो कहा कि ड्रोन अभी युद्ध जीतने में अकेले सक्षम नहीं हैं, वे मात्र सहयोग या भ्रम पैदा कर सकते हैं। इसलिए नयी तकनीकों के साथ संतुलित और समझदारी से हथियार योजना बनाना अहम है।

तो कुल मिलाकर, वायु सेना प्रमुख ए पी सिंह का मानना है कि थिएटर कमांड भारत के लिए ज़रूरी जरूर है, लेकिन इसे जल्दबाजी में नहीं, सोच-समझकर, देश की खास जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए। भारत की अपनी परिस्थितियों और संसाधनों के हिसाब से एक मजबूत और विकासशील मॉडल बनाना चाहिए, जो हमारी सीमाओं की रक्षा करे और देश का मान बढ़ाए।

Leave a Comment