हवा की ज़हरीली मार: Supreme Court में दायर याचिका में राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की मांग
हम सभी जानते हैं कि हवा की हालत हाल के वर्षों में बहुत बिगड़ी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, और कई अन्य शहरों में धूल-धुआं और प्रदूषित हवा ने लोगों की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। हाल ही में Supreme Court में एक याचिका दाखिल हुई है जिसमें भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की गुहार लगाई गई है। यह याचिका कहती है कि हवा का प्रदूषण न केवल पर्यावरण की समस्या है, बल्कि अब यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
याचिका किसने दायर की और क्या मांगा है ? : –

यह याचिका फाइल की गई है Luke क्रिस्टोफर कॉन्टिन्हो नाम के एक होलिस्टिक हेल्थ एक्सपर्ट और वेलनेस एंबेसडर ने। उन्होंने सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग सहित कई राज्यों की सरकारों को पक्षकार बनाया है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट हवा की खराब गुणवत्ता को राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करे और एक समयबद्ध राष्ट्रीय कार्रवाई योजना बनाई जाए, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके।
हवा कितनी जहरीली है ? : –
याचिका में बताया गया है कि PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों की मात्रा बहुत अधिक है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में PM2.5 का स्तर लगभग 105 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के सुरक्षित स्तर से लगभग 20 गुना ज्यादा है। इसी तरह, कोलकाता, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों में भी प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है।
नुकसान कितना बड़ा ? : –
Delhi में 22 लाख स्कूल के बच्चे ज़हरीली हवा के कारण अनिवार्य फेफड़ों को नुकसान पहुँचा चुका है, जो कभी ठीक नहीं होगा। दिल, फेफड़े और दिमाग जैसी बुनियादी इंद्रियों पर भी इसका बुरा असर हो रहा है। याचिका का कहना है कि हमारा संविधान नागरिकों को जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार देता है (धारा 21), और प्रदूषण इस अधिकार का उल्लंघन करता है।
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क्या सरकार की पहलें काम आयी ? : –
2019 में National Clean Air Programme (NCAP) शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य था 2024 तक प्रदूषण में 20-30% की कमी और बाद में इसे 2026 तक 40% तक बढ़ाना। लेकिन याचिका में कहा गया है कि 130 में से सिर्फ 25 शहरों ने लक्ष्य पूरा किया है, जबकि 25 शहरों में प्रदूषण तो बढ़ा है। नीतियाँ तो हैं, लेकिन उनका पालन और निगरानी कमजोर और टुकड़े-टुकड़े है।
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याचिका में क्या कार्रवाई की मांग ? : –
- वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना।
- समय सीमा के साथ मजबूत राष्ट्रीय योजना बनाना और उसका कानूनी पालन।
- मक्की-खरीदने से सावधान रहने, फसल अवशेष जलाने पर रोक, किसानों को इनाम और वैकल्पिक उपाय देना।
- हाई-एमिशन वाहन जैसे पुराने भारी प्रदूषण करने वाले वाहनों का चरणबद्ध निष्कासन।
- इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना।
- उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण कड़ी करना और वास्तविक समय में निगरानी एवं प्रदर्शन।
- राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन, जिसमें स्वतंत्र पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञ हों।
आम आदमी की समझ में : –
सोचिए, हर दिन ज़हरीली हवा सांस में भरना कितना खतरनाक हो सकता है। बच्चे, बूढ़े और बीमार तो और भी ज्यादा प्रभावित होते हैं। जब सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी न करे और प्रदूषण को नियंत्रित न कर पाए, तो कोर्ट से मदद माँगना एक आखिरी हथियार बन जाता है। इस याचिका की मदद से उम्मीद है कि हवा की सफाई पर नई जान आएगी और हमारी सेहत के लिए बेहतर कदम उठाए जाएंगे।