सिर्फ 30 इंजीनियर्स और $1 बिलियन रेवेन्यू: Zerodha की कामयाबी की कहानी जो हर स्टार्टअप को सीखनी चाहिए
जब स्टार्टअप की बात होती है तो सबसे पहला सवाल यही आता है – कितने लोग हैं टीम में? कितना फंडिंग मिला? लेकिन Zerodha ने इस पूरे फॉर्मूले को ही पलट दिया है। Rainmatter (Zerodha का वेंचर फंड) में हेल्थ इन्वेस्टमेंट के हेड दिलीप कुमार ने हाल ही में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि Zerodha ने $1 बिलियन से ज्यादा का रेवेन्यू और $500 मिलियन से ज्यादा का प्रॉफिट सिर्फ करीब 30 इंजीनियर्स की टीम के साथ बनाया, वो भी बिना किसी फुल-टाइम प्रोडक्ट मैनेजर के। यह सुनकर हैरानी होना स्वाभाविक है, क्योंकि आजकल तो छोटे-छोटे स्टार्टअप्स में भी सैकड़ों लोगों की टीम होती है।
आंकड़े जो चौंका देते हैं : –
FY24 में Zerodha ने 8,370 करोड़ रुपये (करीब $1 बिलियन) का रेवेन्यू और 4,700 करोड़ रुपये (लगभग $560 मिलियन) का प्रॉफिट बनाया। यह FY23 के मुकाबले काफी बड़ी छलांग थी। इन 30 इंजीनियर्स की टीम 1.6 करोड़ (16 मिलियन) कस्टमर्स को मैनेज करती है।
यानी हर इंजीनियर औसतन 5 लाख से ज्यादा कस्टमर्स को हैंडल कर रहा है! FY22 में तो Zerodha ने प्रति इंजीनियर 70 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। यह आंकड़ा किसी भी बड़ी कंपनी के लिए भी चौंकाने वाला है।
छोटी टीम, बड़ी कामयाबी का राज : –
दिलीप कुमार ने अपनी पोस्ट में लिखा, “इंजीनियरिंग एफिशिएंसी एक moat है, feature नहीं”। यानी अच्छी इंजीनियरिंग आपकी सबसे बड़ी ताकत होती है, न कि सिर्फ एक फीचर।
एक एक्स यूजर ने Zerodha की तारीफ करते हुए लिखा, “Zerodha ने फैंसी फीचर्स या 500 लोगों की टेक टीम से नहीं जीता – उन्होंने टाइट, लीन और बोरिंगली रिलायबल इंजीनियरिंग बनाकर जीता। बिना फुल-टाइम PMs के, सिर्फ 30 इंजीनियर्स के साथ 16 मिलियन कस्टमर्स को बिना पसीना बहाए हैंडल कर रहे हैं”।
Zerodha के CTO कैलाश नाध ने 2024 में Moneycontrol को बताया था कि पिछले चार सालों में उन्होंने टेक टीम में सिर्फ पांच लोगों को हायर किया है। यह दिखाता है कि कंपनी क्वालिटी को क्वांटिटी से ज्यादा महत्व देती है।
कैसे काम करती है यह टीम ?
Zerodha की टेक टीम में दो मोबाइल डेवलपर्स, दो डिजाइनर्स, दो फ्रंटएंड डेवलपर्स, एक टेस्ट इंजीनियर, एक DevOps इंजीनियर और एक लियाजन शामिल हैं जो अन्य विभागों के साथ कम्युनिकेशन ट्रैक करने में मदद करता है। बाकी सभी फुलस्टैक डेवलपर्स हैं जो लगभग सबकुछ करते हैं।
कोई डेडिकेटेड प्रोजेक्ट या प्रोडक्ट मैनेजर नहीं है, और डेवलपर्स खुद ही इन रोल्स में स्टेप अप करते हैं। प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजीज को दो से चार डेवलपर्स की छोटी टीमें बनाती, मेंटेन और ओन करती हैं। यानी यहां हर कोई मल्टी-टास्किंग करता है और जिम्मेदारी लेता है।
फाइनेंस का ज्ञान ? जरूरी नहीं !
यह और भी दिलचस्प है – Zerodha की टीम में किसी की भी फाइनेंस में बैकग्राउंड नहीं है, और मुट्ठीभर डेवलपर्स को छोड़कर ज्यादातर के पास कोई पहले का काम का अनुभव भी नहीं था। Zerodha उनकी पहली नौकरी थी।
यह बात बताती है कि अगर सही प्रोसेस और सिस्टम हों, तो लोगों को सीखने का मौका मिले, तो वे किसी भी फील्ड में कमाल कर सकते हैं।
कुल कितने लोग हैं Zerodha में ?
Zerodha में कुल 1,200 कर्मचारी हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही कोर बिजनेस चलाता है। यानी बाकी लोग कस्टमर सपोर्ट, कंप्लायंस, फाइनेंस, और दूसरे डिपार्टमेंट्स में हैं। लेकिन जो प्रोडक्ट आप यूज करते हैं – Kite, Console, Coin – वह सब 30 इंजीनियर्स की मेहनत है।
चैलेंजेस भी हैं सामने : –
हालांकि Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामथ ने चेतावनी दी है कि रेवेन्यू और प्रॉफिट plateau होते दिख रहे हैं और कंपनी इस साल बड़े रेवेन्यू हिट के लिए तैयार हो रही है क्योंकि नए रेगुलेटरी बदलाव आ रहे हैं।
SEBI का true-to-label सर्कुलर 1 अक्टूबर से लागू हुआ और इससे 10% रेवेन्यू की कमी की उम्मीद है। इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर नए रेगुलेशन से 30% से 50% तक रेवेन्यू गिर सकता है।
Zerodha का डाइवर्सिफिकेशन प्लान : –
इन चैलेंजेस से निपटने के लिए Zerodha नए प्रोडक्ट्स और बिजनेस लाइन्स पर काम कर रहा है। कंपनी Margin Trade Funding (MTF), Loan-Against-Securities सर्विसेज लॉन्च करने वाली है। Rainmatter के जरिए कंपनी ने 120 से ज्यादा कंपनियों में 680 करोड़ रुपये इन्वेस्ट किए हैं।
Rainmatter Foundation के जरिए 1,000 करोड़ रुपये क्लाइमेट और एनवायर्नमेंटल कॉजेज के लिए कमिट किए गए हैं। यानी Zerodha सिर्फ पैसा कमाना नहीं चाहता, बल्कि समाज के लिए भी कुछ करना चाहता है।
VC फंडिंग नहीं, Bootstrapped सक्सेस : –
Zerodha की सफलता Zoho जैसी दूसरी bootstrapped कंपनियों की याद दिलाती है। VC-funded प्रतिद्वंद्वियों के विपरीत जो वैल्यूएशन प्रेशर का सामना कर रहे हैं, Zerodha की स्वतंत्रता उसे लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी को प्राथमिकता देने की अनुमति देती है।
नितिन और निखिल कामथ भाइयों ने अपनी कंपनी को बिना किसी बाहरी फंडिंग के खड़ा किया। यह दिखाता है कि अगर आपका बिजनेस मॉडल मजबूत है और आप कस्टमर-फोकस्ड हैं, तो आपको करोड़ों डॉलर की फंडिंग की जरूरत नहीं है।
दूसरे स्टार्टअप्स के लिए सबक : –
Zerodha की कहानी से कई सबक मिलते हैं :
1. क्वालिटी ओवर क्वांटिटी: 500 औसत इंजीनियर्स से बेहतर है 30 शानदार इंजीनियर्स को रखना।
2. सिंपल और रिलायबल: फैंसी फीचर्स की जगह सिंपल और भरोसेमंद प्रोडक्ट बनाओ।
3. कस्टमर फर्स्ट: रेवेन्यू टार्गेट की जगह कस्टमर को केंद्र में रखो।
4. लीन ऑपरेशन: जरूरत से ज्यादा खर्च न करो, स्मार्ट तरीके से खर्च करो।
5. लॉन्ग-टर्म विजन: तुरंत यूनिकॉर्न बनने की जगह सस्टेनेबल बिजनेस बनाओ।
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आखिरी बात
SimilarWeb के डेटा के अनुसार, Zerodha की वेबसाइट भारत की 55वीं सबसे ज्यादा विजिट की जाने वाली वेबसाइट है। भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के डेली रिटेल ट्रेड और इन्वेस्टमेंट वॉल्यूम का करीब 20% Zerodha के प्लेटफॉर्म से होता है। और यह सब सिर्फ 30 इंजीनियर्स कर रहे हैं!
Zerodha की कहानी यह साबित करती है कि सफलता के लिए हजारों कर्मचारी, करोड़ों की फंडिंग, या fancy offices की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो सही टीम, सही एटिट्यूड, और कस्टमर-फर्स्ट अप्रोच की। दिलीप कुमार ने बिल्कुल सही कहा – “Engineering efficiency is a moat, not a feature.” यही Zerodha की असली ताकत है और यही वजह है कि यह कंपनी आज भी Indian startup ecosystem में एक मिसाल बनी हुई है।