Ethiopia Volcano Eruption: हैली गुब्बी की राख से दिल्ली में 7 फ्लाइटें कैंसिल, 12 देरी से उड़ीं

इथियोपिया के ज्वालामुखी की राख ने दिल्ली में मचाई तबाही: कई फ्लाइटें रद्द

हजारों किलोमीटर दूर के ज्वालामुखी ने रोकी दिल्ली की उड़ानें : –

दोस्तों, कल्पना कीजिए – इथियोपिया में एक ज्वालामुखी फटता है और हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली में फ्लाइटें रद्द हो जाती हैं। सुनने में जितना अजीब लगता है, यही सच्चाई है। 23 नवंबर 2024 को इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ और इसकी राख का बादल इतना बड़ा हो गया कि यह भारत तक पहुंच गया। आज दिल्ली एयरपोर्ट पर कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटें रद्द हुईं और कई देरी से उड़ीं।

जब मैंने यह खबर पहली बार सुनी तो मुझे भी विश्वास नहीं हुआ। मैंने सोचा, भला इतनी दूर से राख कैसे आ सकती है? लेकिन जब पूरी कहानी पता चली तो समझ आया कि प्रकृति की ताकत कितनी अद्भुत और खतरनाक दोनों हो सकती है।

10,000 साल बाद जागा ज्वालामुखी : – 

इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित हैली गुब्बी ज्वालामुखी करीब 10,000 से 12,000 साल से सो रहा था। रविवार 23 नवंबर को सुबह करीब 8:30 बजे (UTC टाइम के अनुसार) यह अचानक जाग गया। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि इसकी राख का बादल 45,000 फीट यानी करीब 14 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठा।

इस ज्वालामुखी का स्थान इर्टा आले रेंज में है, जो एक्टिव इर्टा आले ज्वालामुखी से महज 15 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। स्थानीय गांव अफडेरा में ज्वालामुखी की धूल की मोटी परत जम गई और इलाके में कंपन महसूस किए गए।

यह पहली बार नहीं है कि कोई ज्वालामुखी इतने लंबे समय बाद फटा हो, लेकिन जो चौंकाने वाली बात है वह यह है कि इसका असर इतनी दूर तक पहुंचा।

 राख का बादल: लाल सागर से भारत तक का सफर : –

विस्फोट के बाद राख का विशाल बादल पहले लाल सागर के ऊपर से गुजरा, फिर यमन और ओमान की तरफ बढ़ा। वहां से यह सऊदी अरब के कुछ हिस्सों के ऊपर से होता हुआ भारत की ओर आया।

सोमवार की रात करीब 10 बजे यह राख का बादल भारत में गुजरात के हिस्से से दाखिल हुआ। इसके बाद यह राजस्थान, महाराष्ट्र के उत्तरी भाग, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब के ऊपर से गुजरा। मौसम विभाग के अनुसार, यह बादल 100-120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूर्व की ओर बढ़ रहा था।

सबसे खास बात यह है कि यह राख 15,000 से 25,000 फीट की ऊंचाई पर थी, और कुछ परतें तो 45,000 फीट तक ऊंची थीं। इसीलिए यह इतनी दूर तक यात्रा कर सका।

Ethiopia Volcano Eruption: हैली गुब्बी की राख से दिल्ली में 7 फ्लाइटें कैंसिल, 12 देरी से उड़ीं
Ethiopia Volcano Eruption: हैली गुब्बी की राख से दिल्ली में 7 फ्लाइटें कैंसिल, 12 देरी से उड़ीं

दिल्ली एयरपोर्ट पर हड़कंप : –

मंगलवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों में गड़बड़ी हुई। अधिकारियों के अनुसार, 7 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुईं और 12 उड़ानें देरी से उड़ीं।

हांगकांग, दुबई, जेद्दा, हेलसिंकी, काबुल और फ्रैंकफर्ट जाने वाली फ्लाइटें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। यात्री घंटों तक इंतजार करते रहे और कई लोगों को अपने ट्रैवल प्लान बदलने पड़े।

एयर इंडिया ने सोमवार से लेकर अब तक कुल 13 उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसमें न्यूयॉर्क-दिल्ली, दिल्ली-टोक्यो, कोच्चि-जेद्दा और कोच्चि-दुबई जैसे रूट शामिल हैं।

एयरलाइंस ने क्या कदम उठाए ?

एयर इंडिया : कुल 13 फ्लाइटें कैंसिल कीं। एयरलाइन ने X पर पोस्ट करके बताया कि वे यात्रियों को होटल में ठहरने की व्यवस्था कर रही है और जल्द से जल्द वैकल्पिक यात्रा का इंतजाम कर रही है।

अकासा एयर : 24 और 25 नवंबर को जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी के लिए सभी उड़ानें रद्द कर दीं। कोच्चि-जेद्दा फ्लाइट QP550 भी कैंसिल हुई।

इंडिगो : कोचीन-दुबई फ्लाइट 6E1475 को ग्राउंड कर दिया। कन्नूर-अबू धाबी फ्लाइट को अहमदाबाद डायवर्ट करना पड़ा। एयरलाइन ने बताया कि वे अंतरराष्ट्रीय एविएशन बॉडीज के साथ लगातार संपर्क में हैं।

KLM रॉयल डच एयरलाइंस : एम्स्टर्डम-दिल्ली (KL 871) और दिल्ली-एम्स्टर्डम (KL 872) दोनों फ्लाइटें कैंसिल कर दीं।

SpiceJet : यात्रियों को एडवाइजरी जारी की कि दुबई जाने-आने वालों को अपनी फ्लाइट स्टेटस चेक करते रहना चाहिए।

DGCA ने जारी की सख्त चेतावनी : – 

भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सोमवार को एक सेफ्टी एडवाइजरी जारी की। इसमें सभी एयरलाइंस को निर्देश दिए गए:

– ज्वालामुखी की राख से प्रभावित इलाकों और ऊंचाइयों से बचें
– रूट और फ्यूल प्लानिंग को नई जानकारी के आधार पर बदलें
– अगर इंजन में कोई परेशानी हो या केबिन में धुआं/गंध आए तो तुरंत रिपोर्ट करें
– अगर राख हवाई अड्डे के संचालन को प्रभावित करती है तो रनवे, टैक्सीवे और एप्रॉन की तुरंत जांच करें

टूलूज वॉल्केनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर (VAAC) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पहले ही ASHTAM जारी कर दिया था।

Ethiopia Volcano Eruption: हैली गुब्बी की राख से दिल्ली में 7 फ्लाइटें कैंसिल, 12 देरी से उड़ीं
Ethiopia Volcano Eruption: हैली गुब्बी की राख से दिल्ली में 7 फ्लाइटें कैंसिल, 12 देरी से उड़ीं

ज्वालामुखी की राख इतनी खतरनाक क्यों है ?

अब सवाल यह है कि आखिर ज्वालामुखी की राख हवाई जहाजों के लिए इतनी खतरनाक क्यों है ? मैं आपको सरल भाषा में समझाता हूं:

इंजन को नुकसान : ज्वालामुखी की राख में छोटे-छोटे कांच के टुकड़े जैसे कण होते हैं। जब ये इंजन में जाते हैं तो पिघलकर चिपक जाते हैं और इंजन को जाम कर सकते हैं।

विजिबिलिटी कम होना : राख के बादल की वजह से पायलट को आगे देखने में दिक्कत होती है। आसमान धुंधला और गहरा दिखता है।

सेंसर की समस्या : राख विमान के सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को भी प्रभावित कर सकती है।

विंडस्क्रीन खराब होना : राख छोटे पत्थरों की तरह काम करती है और कॉकपिट के कांच को खरोंच देती है।

इतिहास में ऐसे कई मामले हुए हैं जहां विमान ज्वालामुखी की राख में फंस गए और उनके सभी इंजन बंद हो गए। 1982 में ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट BA 009 इंडोनेशिया में माउंट गालुंगगुंग की राख में फंस गई थी और सभी चार इंजन फेल हो गए थे। सौभाग्य से पायलट ने कुशलता दिखाई और सभी बच गए।

दिल्ली की एयर क्वालिटी पर क्या असर ?

अब एक राहत की बात। बहुत से लोगों को चिंता थी कि ज्वालामुखी की राख से दिल्ली का पहले से खराब प्रदूषण और बिगड़ जाएगा। लेकिन मौसम विभाग और पर्यावरणविदों ने स्पष्ट किया है कि ऐसा नहीं होगा।

इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के अनुसार, राख का बादल 10 किलोमीटर से ज्यादा ऊंचाई पर है, इसलिए जमीनी स्तर की वायु गुणवत्ता पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।

पर्यावरणविद विमलेंदु झा ने ANI से बात करते हुए कहा कि दिल्ली की AQI पर तुरंत कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

हालांकि, मौसम विभाग ने बताया कि राख मंगलवार शाम 7:30 बजे तक भारतीय आसमान से साफ हो जाएगी क्योंकि यह तेजी से पूर्व की ओर चीन की तरफ बढ़ रही है।

सल्फर डाइऑक्साइड का खतरा : – 

ज्वालामुखी से न सिर्फ राख निकलती है, बल्कि सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस भी निकलती है। यह गैस आंखों, नाक और फेफड़ों में जलन पैदा कर सकती है। ज्यादा मात्रा में होने पर यह सांस लेने में दिक्कत भी कर सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि राख इतनी ऊंचाई पर है, इसलिए जमीन पर रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा असर नहीं होगा।

यात्रियों को क्या करना चाहिए ?

अगर आपकी भी आने वाले दिनों में कोई फ्लाइट बुक है, खासकर अंतरराष्ट्रीय, तो कुछ बातें ध्यान में रखें:

फ्लाइट स्टेटस चेक करें : हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप पर फ्लाइट का स्टेटस जरूर देखें।

संपर्क जानकारी अपडेट रखें : एयरलाइन के पास आपका सही मोबाइल नंबर और ईमेल होना चाहिए ताकि वे आपको अपडेट दे सकें।

पहले से पहुंचें : अगर फ्लाइट चल रही है तो एयरपोर्ट पहले पहुंचें क्योंकि चेक-इन में देरी हो सकती है।

वैकल्पिक योजना बनाएं : अगर जरूरी यात्रा नहीं है तो कुछ दिन का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।

एयरलाइन के साथ बात करें : अगर आपकी फ्लाइट कैंसिल हुई है तो एयरलाइन आपको री-बुकिंग या रिफंड का विकल्प देगी।

UAE और मध्य पूर्व में स्थिति : – 

यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। UAE, ओमान और सऊदी अरब भी प्रभावित हुए हैं।

ओमान : पर्यावरण प्राधिकरण ने चेतावनी जारी की कि ज्वालामुखी की राख से वायु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

सऊदी अरब : नेशनल सेंटर फॉर मेट्रोलॉजी (NCM) ने पुष्टि की कि देश के वातावरण को कोई खतरा नहीं है।

UAE : दुबई स्थित एयरलाइंस Emirates और flydubai ने कहा कि उनकी उड़ानें सामान्य रूप से चल रही हैं। Etihad Airways ने भी पुष्टि की कि सभी फ्लाइटें समय पर हैं।

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने भी यात्री एडवाइजरी जारी की है।

IMD की SIGMET चेतावनी : – 

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता स्थित मेट वॉच ऑफिसों ने ICAO-स्टैंडर्ड SIGMET (Significant Meteorological Information) चेतावनी जारी की। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की चेतावनी है जो गंभीर मौसम की स्थिति के बारे में सूचित करती है।

यह अकेली घटना नहीं : – 

दोस्तों, इतिहास में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जहां ज्वालामुखी के विस्फोट ने हवाई यातायात को ठप कर दिया:

2010 आइसलैंड : Eyjafjallajökull ज्वालामुखी फटा और पूरे यूरोप में हफ्तों तक हवाई यातायात ठप रहा। एक लाख से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं।

1991 फिलीपींस : माउंट पिनातुबो के विस्फोट ने दक्षिण-पूर्व एशिया में हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया।

इस बार हैली गुब्बी का विस्फोट उतना बड़ा नहीं था, लेकिन फिर भी इसका असर हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचा।

आगे क्या ?

मौसम विभाग के अनुसार, राख का बादल मंगलवार शाम तक भारत से गुजर जाएगा और चीन की ओर बढ़ जाएगा। इसके बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी और फ्लाइटें नॉर्मल रूट पर वापस आ जाएंगी।

विशेषज्ञ लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अगर ज्वालामुखी में दोबारा विस्फोट होता है तो फिर से दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई आशंका नहीं है।

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 प्रकृति की शक्ति का एहसास : – 

यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति कितनी शक्तिशाली है। हजारों किलोमीटर दूर एक ज्वालामुखी फटता है और उसका असर पूरी दुनिया में महसूस होता है। आधुनिक तकनीक के बावजूद हम अभी भी प्रकृति के सामने छोटे हैं।

अच्छी बात यह है कि सभी एयरलाइंस और एविएशन अथॉरिटीज ने समझदारी दिखाई और यात्रियों की सुरक्षा को सबसे पहले रखा। जरा सोचिए, अगर इन फ्लाइटों को बिना सावधानी के उड़ा दिया जाता तो कितनी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

हां, यात्रियों को असुविधा जरूर हुई। फ्लाइटें कैंसिल हुईं, लोगों के प्लान बिगड़े, कई लोगों को होटलों में रुकना पड़ा। लेकिन जान से बढ़कर कुछ नहीं, और सुरक्षा सबसे पहले आती है।

इस घटना से एक और बात सीखने को मिलती है – हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। ट्रैवल इंश्योरेंस लेना, फ्लेक्सिबल टिकट बुक करना, और इमरजेंसी में क्या करना है यह जानना – ये सब जरूरी है।

तो दोस्तों, अगर आने वाले दिनों में आपको कहीं जाना है तो अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक करते रहें, एयरलाइन के संपर्क में रहें, और धैर्य रखें। यह मुश्किल समय जल्दी ही गुजर जाएगा और सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा।

याद रखें, सुरक्षित यात्रा ही सफल यात्रा है!

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