“अब माल ढोना नहीं, देश को आगे बढ़ाना है—पीयूष गोयल की नई योजना से रास्ते भी सुधरेंगे और व्यापार भी।”

 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक प्लान लॉन्च किया।” मैंने सोचा, चलो देखता हूँ कि ये योजना क्या है और क्या वाकई मुश्किलें कम हो सकती हैं।

लॉजिस्टिक प्लान मतलब क्या ?

लॉजिस्टिक का मतलब होता है—माल को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने की पूरी व्यवस्था। इसमें ट्रक, ट्रेन, जहाज़, गोदाम, सड़क, और कागज़ी प्रक्रिया सब शामिल हैं। भारत जैसे बड़े देश में अगर ये व्यवस्था सही न हो, तो सामान समय पर नहीं पहुँचता, खर्च बढ़ता है, और व्यापार धीमा पड़ता है।

इसी को सुधारने के लिए पीयूष गोयल ने 20 सितंबर 2025 को एकीकृत लॉजिस्टिक योजनाओं की शुरुआत की। ये योजना फिलहाल आठ राज्यों के आठ शहरों में लागू की गई है, लेकिन आगे इसे पूरे देश में फैलाने की तैयारी है।

योजना में क्या-क्या है ?

– हर राज्य और शहर के लिए अलग-अलग लॉजिस्टिक प्लान बनेगा।
– मौजूदा सड़क, गोदाम, और ट्रांसपोर्ट सिस्टम का आकलन किया जाएगा।
– जहाँ कमी है, वहाँ सुधार की योजना बनेगी।
– लागत घटाने और समय बचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल होगा।
– एक गाइडबुक भी जारी की गई है जिसमें 12,167 HSN कोड दिए गए हैं, ताकि व्यापार में सामान की पहचान आसान हो सके।

“अब माल ढोना नहीं, देश को आगे बढ़ाना है—पीयूष गोयल की नई योजना से रास्ते भी सुधरेंगे और व्यापार भी।”
“अब माल ढोना नहीं, देश को आगे बढ़ाना है—पीयूष गोयल की नई योजना से रास्ते भी सुधरेंगे और व्यापार भी।”(image source -clappia)

इससे फायदा किसे होगा ?

अब बात करते हैं आम आदमी की नजर से। अगर आप व्यापारी हैं, तो आपका माल जल्दी और सस्ता पहुँचेगा। अगर आप ट्रक ड्राइवर हैं, तो रास्ते बेहतर होंगे और कागज़ी झंझट कम होगा। अगर आप ग्राहक हैं, तो सामान सस्ता और समय पर मिलेगा।

सरकार का कहना है कि इससे भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, और देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। पीयूष गोयल ने कहा कि ये योजना “माल की सुगम आवाजाही और व्यापार में पारदर्शिता” लाने में मदद करेगी।

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क्या ये वाकई काम करेगा ?

अब सवाल ये है कि क्या ये योजना सिर्फ कागज़ पर रहेगी या ज़मीन पर भी दिखेगी? पिछले कुछ सालों में भारत ने बंदरगाहों और रेलवे में काफी सुधार किया है। लेकिन अभी भी छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लॉजिस्टिक की हालत कमजोर है। अगर ये योजना वहाँ तक पहुँचे, तो वाकई बदलाव आ सकता है।

इसके लिए ज़रूरी है कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम करें। और सबसे ज़रूरी है कि योजना सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों तक भी पहुँचे।

 

पीयूष गोयल की ये पहल एक अच्छी शुरुआत है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो भारत की लॉजिस्टिक गाड़ी वाकई तेज़ी से दौड़ सकती है। और तब लोग कहेंगे—“अब माल पहुँचाना आसान हो गया है, सरकार ने वाकई कुछ किया है।”

क्योंकि असली विकास तब होता है जब आम आदमी की ज़िंदगी आसान हो जाए।

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