एक आम आदमी जब खबर पढ़ता है कि पवन सिंह को सरकार ने Y कैटेगरी की सुरक्षा दे दी है, तो उसके मन में पहला सवाल आता है – “ये Y कैटेगरी आखिर है क्या बला, और पवन सिंह को इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
खबरें बताती हैं कि पवन सिंह, जिन्हें पहले सिर्फ उनके गानों और फिल्मों से जाना जाता था, पिछले कुछ महीने से काफी सुर्ख़ियों में रहे हैं। एक तो उनकी राजनीति में एंट्री, दूसरा पारिवारिक तनाव – पत्नी ज्योति सिंह ने उन पर सरेआम गंभीर आरोप लगाए। उस पर बिहार विधानसभा चुनाव में उनका नाम चर्चा में है तो पुराने दुश्मनों की भी बयानबाजी बढ़ गई। एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें बाबा खान के गुंडे उन्हें धमकी देते नजर आए।
यही वजह है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने खतरे का आकलन किया, और गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट के आधार पर तुरंत फैसला लिया कि भाई इस कलाकार को बड़ी सुरक्षा मिलनी चाहिए। अब पवन सिंह की सुरक्षा में CRPF कमांडो लगातार तैनात रहेंगे, चाहे वो किसी कार्यक्रम में जाएं, घर पर हों या सड़क पर घूमें।
अगर आम भाषा में समझें, तो Y कैटेगरी सुरक्षा का मतलब होता है – उसके आसपास हमेशा 8 से 11 सुरक्षाकर्मी, जिनमें 1-2 कमांडो भी रहेंगे, हर वक्त चौकस। इनके अलावा दो निजी सुरक्षा अफसर (PSO) होते हैं जो उनकी हर एक्टिविटी पर नजर रखते हैं और मदद के लिए तैयार रहते हैं। किसी भी VIP को जब किसी संगठन, व्यक्ति या गैंग से जान का खतरा बताया जाता है, तो इसी तरह की सुरक्षा दी जाती है।
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अब जरा सोचिए, पवन सिंह खुद बिहार से हैं और उन्हें हाल-फिलहाल एक राजनीतिक दल से जोड़कर देखा गया है। उनके चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। ऐसे माहौल में विरोधी पक्ष और पुराने विवाद, दोनों मिलकर उनके लिए खतरे का माहौल पैदा कर देते हैं। इसी सबके मद्देनजर सरकार को कदम उठाना पड़ा।

एक आम आदमी कभी सोचता है कि ये सुरक्षा सिर्फ नेताओं को दी जाती है, लेकिन हकीकत में ऐसे हालात बना दिए जाएं तो किसी कलाकार या उद्योगपति को भी ये मिल सकती है। इसकी लागत भी कम नहीं होती, करीब 12 लाख रुपए महीना सरकार को देने पड़ते हैं – जिसमें जवानों का वेतन, खाना, वाहन और ठहरने का खर्चा सब शामिल रहता है।
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Y कैटेगरी की सुरक्षा भारत में SPG, Z+, Z, Y+, Y और X – इन वर्गों में आती है, जिसमें Y आमतौर पर चौथे स्तर की गिनती में आती है। इससे हुआ ये है कि अब अगर पवन सिंह कहीं जाते हैं, तो उनके साथ हर वक्त सुरक्षाकर्मी रहेंगे, सब हथियारबंद रहेंगे, और वे किसी भी प्रदर्शन या कार्यक्रम में बेफिक्र रह सकते हैं।
अब, पवन सिंह के फैंस और आम आदमी भले ही सोचें कि स्टारडम में ऐसी समस्याएं क्यों आती हैं, मगर असलियत यही है कि पवन सिंह की जिंदगी के नए दौर में सुरक्षा पर इतना जोर देना पड़ा। उनकी पहचान अब सिर्फ ‘लॉलीवुड’ के हीरो के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान के तौर पर बन गई है जिसकी सुरक्षा सरकार के लिए भी अहम बन गई।
अभी पवन सिंह या उनके परिवार की तरफ से कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ये तय है कि अब वे और उनका परिवार थोड़ा ज्यादा सुकून में जिंदगी जी सकेंगे। आम आदमी की तरह देखा जाए तो ये कहानी हमें ये भी सिखाती है कि कोई भी फिल्म स्टार या नेता हो, असुरक्षा और डर का एहसास हर किसी को कभी न कभी छू ही जाता है।