जन-मंच

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को बड़ा झटका दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को बड़ा झटका दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को बड़ा झटका दिया है।(image source-the walkers)

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ लखनऊ में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी और गिरफ्तारी पर भी कोई रोक नहीं लगाई। अब नेहा को पुलिस जांच का सामना करना होगा और 26 सितंबर को जांच अधिकारी के सामने पेश होकर सहयोग करना पड़ेगा। यह मामला उनके कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुआ था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।

नेहा सिंह राठौर का मामला क्या है?

22 अप्रैल, 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई लोगों की जान गई थी। इसके चंद दिनों बाद नेहा सिंह राठौर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व नाम ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी पर कथित आपत्तिजनक बयान पोस्ट किया। इसको लेकर 27 अप्रैल को लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई– आरोप है कि इन टिप्पणियों से देशद्रोही मानसिकता फैली, सांप्रदायिक तनाव का माहौल बना और संवेदनशील समय में देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को बड़ा झटका दिया है।(image source-instagram)

 

ये भी पढ़े : – ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर कांतारा चैप्टर 1 की चर्चा छा गई है।

हाईकोर्ट में सुनवाई में क्या हुआ?

नेहा सिंह राठौर ने अपनी याचिका में तर्क किया कि उनके खिलाफ की गई एफआईआर अभिव्यक्ति की आज़ादी (अनुच्छेद 19(1)(A)) को दबाने की कोशिश है और उनके सोशल मीडिया पोस्ट संविधान के दायरे में हैं। दूसरी तरफ, सरकारी पक्ष ने कहा कि वक्त बेहद संवेदनशील था और इन पोस्टों ने देशविरोधी भावनाओं को हवा दी। कोर्ट ने पाया कि केस डायरी व एफआईआर के आधार पर पहली नजर में संज्ञेय अपराध बनता है– यानी यह मामला जांच के योग्य है।

क्या कहा कोर्ट ने अपने आदेश में?

 

कई सवाल और चर्चाएं

नेहा सिंह राठौर अक्सर अपने गानों, वीडियो और पोस्ट के ज़रिए सरकार और राजनीति पर सवाल उठाती रही हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि सत्ता सवालों से डरती है, जबकि विरोधी मानते हैं कि जनभावनाओं और संवेदनशील मौके पर आये ऐसे पोस्ट समाज, सरकार और देश को नुक़सान पहुंचाते हैं। मामला बड़ा है– क्योंकि इसमें सोशल मीडिया, बोलने की स्वतंत्रता और संवैधानिक दायरे जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं।

Exit mobile version