कुछ दिन पहले मैं अपने एक दोस्त से बात कर रहा था, तो उसने बताया कि झारखंड का मशहूर बेतला नेशनल पार्क आखिरकार तीन महीने की बंदी के बाद फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। यह सुनकर जैसे मेरा मन भी घूमने के लिए तैरने लगा। ऐसे किसी प्राकृतिक और वन्यजीवों से भरपूर जगह को देखना हर किसी को पसंद होता है, खासकर जब वह लंबे वक्त बाद खुलती हो।
बेतला नेशनल पार्क क्यों बंद रहता है ? : – दरअसल, बेतला नेशनल पार्क झारखंड के लातेहार जिले में स्थित है और यह पलामू टाइगर रिजर्व का अहम हिस्सा है। यहां के हरे-भरे जंगल, घाटियां, साल और बांस के बड़े पेड़, और हरियाली पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। लेकिन इन जंगलों की सबसे बड़ी दौलत हैं यहां के जंगली जानवर जैसे बाघ, हाथी, तेंदुआ, भालू, बारहसिंगा, और कई तरह के हिरण।हर साल जुलाई से सितंबर तक यह पार्क बंद कर दिया जाता है, क्योंकि यह समय होता है वन्यजीवों के प्रजनन काल का। इस दौरान जानवरों को शांति और सुरक्षा मिल सके, इसलिए पर्यटकों को पार्क में प्रवेश नहीं दिया जाता। साथ ही बरसात के मौसम में मौसम खराब रहने की वजह से और कच्चे रास्तों की हालत खराब हो जाने के कारण भी यहां घूमना मुश्किल हो जाता है। यह बंदी करीब 96 दिनों तक रहती है ताकि वन्य जीवन बिना किसी दखलअंदाजी के सुरक्षित रखे जा सकें।

2025 में बेतला नेशनल पार्क फिर से कैसे खुला ? : – इस साल भी पार्क को जुलाई से सितंबर तक बंद रखा गया था, लेकिन मौसम अनुकूल होते ही और बारिश का दौर थमते ही वन विभाग ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में इसकी सफाई, रास्तों की मरम्मत और व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया। नवरात्रि पर्व के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने को देखते हुए पार्क प्रबंधन ने 27 सितंबर से ही इसे समय से पहले खोलने का फैसला लिया।खुलने के दिन यानी 5 अक्टूबर 2025 को डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जैना, रेंजर उमेश कुमार दूबे, वनपाल और कई कर्मचारी मौजूद थे जिन्होंने पूजा-अर्चना के बाद पर्यटकों के लिए पार्क के द्वार खोल दिए। वहीं पहले पर्यटक कोलकाता से आए नारायण चंद्र दास को भी स्पेशल रूप से स्वागत किया गया। पर्यटक अब खुले जीप सफारी का आनंद ले सकते हैं, जो पहले के बंद वाहनों के मुकाबले ज्यादा रोमांचक माना जा रहा है। पार्क में पर्यटक हाथियों, बाघ, भालू, हिरण, और अन्य जंगली जीवों को काफी पास से देख पा रहे हैं, जिससे उनका उत्साह बढ़ गया है।
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नए नियम और सुविधाएं : – इस बार बेतला नेशनल पार्क में कुछ बड़े बदलाव भी किए गए हैं। अब पर्यटक केवल खुले वाहनों में ही जंगल सफारी कर पाएंगे। पहले बंद वाहनों की इजाजत थी, लेकिन वन विभाग ने पर्यावरण और जंगली जानवरों की सुरक्षा को देखते हुए बंद वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे खुले ओपन जीप सफारी वाहन पर्यटकों को जंगली जानवरों को करीब से देखने का मौका देते हैं और साथ ही पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाते हैं।इसके अलावा पार्क की सड़कों और सफारी मार्गों की मरम्मत भी की गई है ताकि बारिश के बाद भी ट्रैकिंग में कोई परेशानी न हो। इस बदलाव से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है। बेतला नेशनल पार्क की खासियत यहां पर सैलानियों को प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल और दुर्लभ वन्य जीव देखने को मिलते हैं। बाघ, हाथी, तेंदुआ, सांभर, चीतल, बारहसिंगा और नीलगाय जैसे जानवरों के अलावा पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह जगह स्वर्ग से कम नहीं। पंख मारते मोर, रंग-बिरंगे तोते और हंस जैसे कई तरह के पक्षी यहाँ उपलब्ध हैं। सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षी भी आते हैं, जिससे प्रकृति प्रेमी आनंदित हो उठते हैं।
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पर्यटकों का उत्साह और स्थानीय लोगों की खुशी : – पार्क खुलने के बाद पर्यटकों की भीड़ देखने को मिली। कोलकाता से आए पर्यटक सोमय बासु और उनकी परिवार ने कहा कि वे जंगल में खुलेआम जानवरों को घूमते देखकर बेहद खुश हैं और फिर से आने की इच्छा जताई है। स्थानीय लोगों के लिए भी बेतला नेशनल पार्क आजीविका का बड़ा जरिया है, इसके खुलने से उनके रोजगार पुनः शुरू हुए हैं। वन विभाग का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा और जंगली जानवरों की बेहतरी दोनों को ध्यान में रखकर ये कदम उठाए गए हैं।