CBI का ठंडा रवैया और सेबी के डबल स्टैंडर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट का तेवर: सेबी के डबल स्टैंडर्ड और CBI के ठंडे रवैये पर जमकर फटकार

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सीबीआई और सेबी दोनों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। जस्टिस सूर्य कांत, उज्जवल भूषण और एन कोटीश्वर सिंह की बेंच ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) को भी फटकार लगाते हुए कहा कि IHFL (जो अब सम्मान कैपिटल के नाम से जाना जाता है) के खिलाफ संदिग्ध लेनदेन की जांच करने में एजेंसियों की अनिच्छा समझ से परे है।

मामला क्या है ?

यह केस एक NGO ‘सिटिजन्स व्हिसिल ब्लोअर फोरम’ की याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि IHFL और उसके पूर्व प्रमोटरों ने बड़े कॉर्पोरेट समूहों की कंपनियों को संदिग्ध कर्ज दिए, जिन्होंने बदले में यह पैसा राउंड-ट्रिपिंग के जरिए प्रमोटरों की कंपनियों के खातों में वापस भेज दिया ताकि उनकी निजी संपत्ति बढ़ाई जा सके।

सीधे-सीधे कहें तो यह आरोप है कि कंपनी ने कुछ खास कॉर्पोरेट्स को कर्ज दिया, और वह पैसा घूम-फिरकर वापस इंडियाबुल्स के प्रमोटरों की जेब में चला गया। वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में बताया कि IHFL के संस्थापक समीर गहलौत देश छोड़कर विदेश भाग गए हैं और उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी संपत्ति हासिल कर ली है।

CBI का ‘कूल एटिट्यूड’ पर सवाल : – 

जस्टिस सूर्य कांत (जो आगे भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले हैं) ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम आश्चर्यचकित हैं कि CBI ने इस मामले में बहुत ही कूल किस्म का रवैया अपनाया है। हमने CBI का ऐसा दोस्ताना रवैया पहले कभी नहीं देखा”।

बेंच ने कहा कि यह आखिरकार जनता का पैसा है और इसमें जनहित का मजबूत तत्व है। “भले ही 10 प्रतिशत आरोप भी सही हों, तब भी यहां बड़े पैमाने पर ऐसे लेनदेन हुए हैं जिन्हें संदिग्ध कहा जा सकता है”।

कोर्ट ने कहा कि एक बार शक पैदा हो जाए तो CBI को FIR दर्ज करनी ही होगी, भले ही वह किसी खास व्यक्ति ‘A’ या ‘B’ के खिलाफ न हो। “जांच के दौरान कोई दोषी पाया जाए या न पाया जाए, लेकिन FIR दर्ज करने से ED, SFIO और SEBI के हाथ मजबूत होंगे। आखिर एजेंसियों को क्या रोक रहा है ?”

CBI का ठंडा रवैया और सेबी के डबल स्टैंडर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई फटकार
CBI का ठंडा रवैया और सेबी के डबल स्टैंडर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई फटकार

जुलाई में CBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह IHFL में किसी भी अनियमितता की जांच नहीं कर रही है और कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट संस्थाओं को कर्ज देने में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। लेकिन कोर्ट इस जवाब से बिल्कुल संतुष्ट नहीं थी।

सेबी के डबल स्टैंडर्ड पर जमकर लताड़ : – 

जब सेबी के वकील ने जांच में अनिच्छा दिखाते हुए अधिकार क्षेत्र की कमी का हवाला दिया, तो जस्टिस कांत ने कड़ी टिप्पणी की: “जब संपत्ति जब्त करने और बेचने का सवाल आता है, तो आप कहते हैं कि देश में सिर्फ हमारे पास ही अधिकार है। लेकिन जब जांच का सवाल आता है तो आप पीछे हट जाते हैं। क्यों, क्योंकि आपके अधिकारियों का कोई निहित स्वार्थ है?”

जज ने आगे कहा, “हम हर दिन सेबी के डबल स्टैंडर्ड देख रहे हैं। एक मामले में जहां मैंने एक हाई पावर्ड कमेटी बनाई थी, वहां आपका रुख था कि सिर्फ सेबी को ही संपत्ति नीलाम करने का अधिकार है। और आप क्या नीलाम कर रहे हैं, हम जानते हैं! 30 करोड़ की संपत्ति को आपने कुछ लाख में बेच दिया”।

जस्टिस कांत ने सेबी के वकील से पूछा, “अगर आपके पास शक्ति नहीं है तो आपके अधिकारी वेतन क्यों ले रहे हैं?” यह सवाल काफी तीखा था और सेबी की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार था।

MCA की भूमिका पर भी सवाल : – 

सुप्रीम कोर्ट ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) को भी फटकार लगाई, जिसने IHFL द्वारा की गई 100 से ज्यादा गड़बड़ियों को समझौता (कंपाउंडिंग) कर दिया था।

बेंच ने कहा, “MCA इस तरह मामले को बंद करने में क्यों लगा हुआ है? इसमें उनका क्या हित है?”अदालत ने साफ कर दिया कि MCA द्वारा मामले बंद करना अब नई जांच में बाधा नहीं बनेगा।

अदालत का आदेश : – 

सुप्रीम कोर्ट ने CBI डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वे सेबी, SFIO (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करें और सभी आरोपों की जांच करें।

अदालत ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का भी सुझाव दिया जिसमें CBI, ED, SFIO और सेबी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हों। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने आरोपों की सच्चाई पर कोई राय नहीं दी है।

अदालत ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को भी निर्देश दिया कि वे ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग) के रिकॉर्ड पेश करें कि ED की शिकायत को क्यों खारिज कर दिया गया था ।

मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी, जब एजेंसियों से उनकी समन्वित कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी जाएगी।

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CBI का ठंडा रवैया और सेबी के डबल स्टैंडर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई फटकार
CBI का ठंडा रवैया और सेबी के डबल स्टैंडर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई फटकार

कंपनी का पक्ष : – 

सम्मान कैपिटल (पूर्व में IHFL) ने बयान जारी कर कहा कि पूर्व प्रमोटर समीर गहलौत 2022-23 में ही कंपनी से बाहर हो चुके हैं और उनके पास कंपनी का एक भी शेयर नहीं है। याचिका में लगाए गए सभी आरोपों की जांच RBI, NHB, MCA, SEBI, ED, CBI और EOW जैसी सभी एजेंसियों ने की है और किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।
कंपनी के शेयरों में गिरावट भी आई – सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद शेयर 12.5 फीसदी गिरकर 159.75 रुपये पर बंद हुए।

आखिर में

यह केस दिखाता है कि जब सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि एजेंसियां अपना काम ठीक से नहीं कर रहीं, तो वह किसी को नहीं बख्शती। सेबी जैसी शक्तिशाली संस्था हो या CBI जैसी जांच एजेंसी, अगर वे अपनी जिम्मेदारी से भागेंगी तो कोर्ट उन्हें आईना दिखाने से नहीं चूकेगी।

जनता के पैसे की हर एक रुपये की रक्षा होनी चाहिए और अगर संदेह है तो जांच होनी ही चाहिए – यही संदेश इस फैसले से मिलता है। अब देखना यह है कि एजेंसियां मिलकर किस तरह से इस मामले की जांच करती हैं और क्या सच्चाई सामने आ पाती है

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