अगर आप हैदराबाद के पुराने हिस्से में कभी गए हों, तो मुसी नदी का नाम जरूर सुना होगा। कभी ये नदी शहर की जान हुआ करती थी — साफ पानी, हरियाली और किनारे बसे मोहल्ले। लेकिन वक्त के साथ ये नदी नाले में बदल गई। कचरा, गंदगी और अतिक्रमण ने इसे ऐसा बना दिया कि लोग इसके पास से गुजरना भी पसंद नहीं करते। लेकिन अब सरकार ने ठान लिया है कि मुसी को फिर से उसकी पुरानी पहचान दिलाई जाएगी — और इसी के लिए शुरू हुआ है “मुसी रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट”।
अब आप सोचेंगे, ये प्रोजेक्ट है क्या? तो चलिए, आम आदमी की नजर से समझते हैं।
तेलंगाना सरकार ने एक बड़ी योजना बनाई है जिसमें मुसी नदी को साफ करना, उसके किनारों को सुंदर बनाना और उसे एक पर्यटन स्थल की तरह विकसित करना शामिल है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने खुद इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी है। करीब 55 किलोमीटर लंबी इस नदी को फिर से जिंदा करने के लिए कई कंपनियों और सलाहकारों को जोड़ा गया है। इसमें नदी की सफाई, किनारों की मरम्मत, साइकिल ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक, पार्क, पुल और यहां तक कि रबर डैम तक बनाने की योजना है।
अब बात करते हैं केंद्र सरकार की भूमिका की — जो इस बार सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बनी है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर “अर्बन रिवर रिस्टोरेशन मॉडल” के तौर पर देखा है। केंद्र सरकार ने तेलंगाना को तकनीकी सहयोग देने के साथ-साथ फंडिंग के लिए भी हाथ बढ़ाया है। Smart Cities Mission और AMRUT योजना के तहत कुछ हिस्सों को वित्तीय सहायता देने की बात चल रही है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत जो अनुभव केंद्र सरकार ने यमुना और गंगा की सफाई में हासिल किया है, वो अब मुसी के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम, जो पहले गंगा प्रोजेक्ट पर काम कर चुकी है, अब हैदराबाद में जाकर स्थानीय अधिकारियों को ट्रेनिंग दे रही है — ताकि सफाई सिर्फ दिखावे की न हो, बल्कि टिकाऊ हो।
सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जिसमें राज्य और केंद्र दोनों का योगदान होगा। सोचिए, इतनी बड़ी रकम सिर्फ एक नदी को फिर से जिंदा करने के लिए! लेकिन जब आप जानेंगे कि ये नदी कभी 18 एकड़ चौड़ी हुआ करती थी और अब सिर्फ 9 एकड़ में सिमट गई है, तो समझ आएगा कि ये काम कितना जरूरी है।
अब बात करते हैं आम आदमी की — यानी हम जैसे लोगों की। हम रोज़ काम पर जाते हैं, बच्चों को स्कूल छोड़ते हैं, और शाम को पार्क में टहलते हैं। अगर हमारे शहर में एक साफ-सुथरी नदी हो, जिसके किनारे हरियाली हो, बच्चों के खेलने की जगह हो, और बुजुर्गों के बैठने के लिए बेंच हो — तो क्या वो शहर और खूबसूरत नहीं लगेगा?
मुसी प्रोजेक्ट सिर्फ नदी की सफाई नहीं है, ये हैदराबाद को एक बेहतर शहर बनाने की कोशिश है। सरकार ने कैमरे और सेंसर भी लगाए हैं ताकि कोई नदी में कचरा न फेंके। अगर कोई ऐसा करता है, तो उस पर केस दर्ज होगा। यानी अब नदी की सुरक्षा भी पक्की। अंत में यही कहना चाहूंगा कि मुसी प्रोजेक्ट सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है — ये हम सबकी उम्मीद है। एक ऐसा सपना जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने साथ मिलकर काम शुरू किया है। अगर ये मॉडल सफल होता है, तो देश की कई और नदियों को भी नया जीवन मिल सकता है।
