जब 5 लाख हैकर्स ने मिलकर माइक्रोसॉफ्ट पर किया हमला – रिकॉर्ड तोड़ 15 Tbps DDoS अटैक की पूरी कहानी
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे साइबर हमले के बारे में बताने जा रहा हूं जो सुनकर आपको विश्वास नहीं होगा। कल्पना कीजिए – एक साथ 5 लाख से ज्यादा कंप्यूटर और डिवाइस मिलकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी पर हमला करें। यह कोई फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है जो हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के Azure क्लाउड सर्विस के साथ हुई।
क्या हुआ था 24 अक्टूबर को ? : –
24 अक्टूबर 2025 को, Microsoft Azure को एक भयंकर DDoS (Distributed Denial of Service) अटैक का सामना करना पड़ा जो 15.72 टेराबिट्स प्रति सेकंड (Tbps) तक पहुंच गया (Microsoft Community Hub) । यह क्लाउड पर रिकॉर्ड किया गया अब तक का सबसे बड़ा हमला था।
अब आप सोच रहे होंगे कि 15.72 Tbps मतलब क्या? तो दोस्तों, इसे ऐसे समझिए – यह हमला हर सेकंड में करीब 3.64 अरब डेटा पैकेट भेज रहा था (Microsoft Community Hub) । यानी एक सेकंड में इतना डेटा कि आप सैकड़ों HD फिल्में डाउनलोड कर सकें!
इस हमले का निशाना ऑस्ट्रेलिया में स्थित एक सिंगल एंडपॉइंट था (Microsoft Community Hub) , यानी एक खास IP एड्रेस को पूरी ताकत से निशाना बनाया गया।
कैसे हुआ यह हमला ? : –
जानिए Aisuru Botnet के बारे में
यह हमला कोई साधारण हैकर ने नहीं किया था। इसके पीछे था Aisuru नाम का एक खतरनाक Botnet, जो Turbo Mirai-class IoT botnet की श्रेणी में आता है (Microsoft Community Hub) ।
अब यह Botnet क्या बला है ? : –
आसान भाषा में कहें तो Botnet एक ‘जॉम्बी आर्मी’ की तरह होता है। इसमें घरों के राउटर्स और कैमरे जैसे IoT (Internet of Things) डिवाइसेज को हैक करके उन्हें गुलाम बना लिया जाता है (Microsoft Community Hub) । ये डिवाइसेज फिर हैकर्स के कमांड पर चलते हैं, बिना मालिक को पता चले।
Aisuru Botnet ने 5 लाख से ज्यादा IP एड्रेसेज का इस्तेमाल करके यह हमला किया, जो मुख्य रूप से अमेरिका और दूसरे देशों के residential इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से जुड़े थे (Microsoft Community Hub) (Bleeping Computer) ।
कैसे काम करता है यह हमला ? : –
हमलावरों ने UDP (User Datagram Protocol) floods का इस्तेमाल किया, जिसमें random source ports का उपयोग हुआ और source spoofing बहुत कम थी (Bleeping Computer) । UDP floods का मतलब है कि लाखों बेकार के डेटा पैकेट एक साथ सर्वर पर भेजे जाते हैं, जिससे असली यूजर्स की रिक्वेस्ट handle नहीं हो पाती और सर्विस क्रैश हो जाती है।
सोचिए, आपके घर की दरवाजे की घंटी को एक साथ हजारों लोग बजाने लगें – आप किसी से भी ठीक से बात नहीं कर पाएंगे। DDoS हमला भी कुछ ऐसा ही होता है।
माइक्रोसॉफ्ट ने कैसे रोका हमला ? : –
अच्छी खबर यह है कि Azure के DDoS Protection सिस्टम ने automatically इस हमले को detect कर लिया और real-time में malicious ट्रैफिक को filter कर दिया (Microsoft Community Hub) । इससे customers की सर्विस में कोई रुकावट नहीं आई।
Microsoft ने अपने globally distributed scrubbing centers का इस्तेमाल किया, जो दुनियाभर में फैले हैं। ये centers बुरे ट्रैफिक को अलग करके साफ डेटा को ही आगे भेजते हैं।
यह एक engineering का कमाल था कि इतने बड़े हमले को बिना किसी downtime के रोक लिया गया।
Aisuru Botnet की खतरनाक हकीकत : –
Aisuru Botnet में अब तक 3 लाख से ज्यादा compromised routers, IP cameras और embedded systems शामिल माने जा रहे हैं (CyberInsider) । यह botnet मुख्य रूप से unpatched या खराब security वाले consumer networking equipment को target करता है।
अप्रैल 2025 में एक महत्वपूर्ण घटना हुई जब Aisuru ने Totolink firmware update server को exploit किया और एक rogue domain, updatetoto[.]tw के जरिए malware distribute किया। इस campaign ने अकेले 1 लाख से ज्यादा bots जोड़े (CyberInsider) ।
Aisuru की तकनीकी चालाकी : –
यह botnet कई advanced techniques इस्तेमाल करता है जैसे RC4-based encryption, anti-virtualization checks, और system binary impersonation, जिससे analysis से बचा जा सके (CyberInsider) । इसका मतलब है कि यह बहुत चालाकी से अपने आप को छुपाता है।
यह सिर्फ शुरुआत है : –
जो बात और चौंकाने वाली है, वह यह कि Cloudflare ने सितंबर 2025 में एक और भी बड़ा हमला mitigate किया था – 22.2 Tbps का, जो 10.6 अरब packets per second तक पहुंच गया था (Bleeping Computer) । यह भी same Aisuru botnet से जुड़ा था।
Aisuru botnet सिर्फ DDoS ही नहीं करता, बल्कि credential stuffing, AI-driven web scraping, spamming और phishing जैसी गतिविधियां भी चलाता है (Security Affairs) । यानी यह एक multi-purpose crime network है।
आम लोगों के लिए खतरा : –
सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता कि उनका घर का राउटर या CCTV कैमरा इस तरह के हमलों में इस्तेमाल हो रहा है। जैसे-जैसे fiber-to-the-home internet speeds बढ़ रही हैं और IoT devices ज्यादा powerful हो रहे हैं, attack का baseline size भी लगातार climb कर रहा है (Network World) ।
यह वैसा ही है जैसे आपकी कार को रात में कोई चोरी करके bank robbery में इस्तेमाल करे और आपको पता भी न चले।
बिजनेस के लिए सबक : –
Experts का कहना है कि enterprises अक्सर मान लेती हैं कि cloud providers पूरी तरह DDoS से protect करते हैं, लेकिन providers platform को secure करते हैं न कि individual workloads या APIs को (Network World) ।
DDoS अब एक containable nuisance नहीं रहा, बल्कि genuine infrastructure-level risk बन गया है जिसका potential economic impact हो सकता है (Network World) । इसलिए companies को DDoS protection को Tier-0 infrastructure की तरह treat करना चाहिए।
खुद को कैसे बचाएं ? : –
घर के यूजर्स अपने devices को botnet takeover से बचाने के लिए ये कदम उठा सकते हैं : –
- Router firmware को updated रखें
- Default administrative credentials बदलें
- जहां जरूरी नहीं हो वहां WAN access और UPnP disable करें
- Unsupported या end-of-life equipment को replace करें (CyberInsider)
दोस्तों, यह घटना हमें याद दिलाती है कि साइबर दुनिया में खतरे कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं। 15.72 Tbps का हमला आज रिकॉर्ड है, कल यह और बड़ा हो सकता है।
Microsoft जैसी बड़ी कंपनी भले ही इस हमले को रोक पाई, लेकिन छोटी कंपनियों और individuals के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। Holiday season नजदीक आ रहा है, और Microsoft ने जोर देकर कहा है कि सभी organizations को अपने internet-facing applications और workloads के लिए adequate DDoS protection सुनिश्चित करना चाहिए (GBHackers) ।
हम सब चाहे घर में बैठे हों या office में, एक connected world का हिस्सा हैं। और इस digital ecosystem में security सिर्फ बड़ी companies की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सब की जिम्मेदारी है।
तो आज ही अपने घर के router की settings check करिए, password बदलिए, और latest security updates install करिए। क्योंकि आपका छोटा सा कदम ही किसी बड़े cyber attack को रोक सकता है।
