बीसीसीएल में भ्रष्टाचार का खुलासा – L.B. Singh पर ED की बड़ी कार्रवाई

बीसीसीएल, अफसरों और कोयला कारोबारी के गठजोड़ पर ED का बड़ा वार: जानिए कौन हैं L.B. सिंह

धनबाद में मचा हड़कंप

दोस्तों, झारखंड के धनबाद में 22 नवंबर को सुबह-सुबह ऐसा मंजर देखने को मिला जिसकी चर्चा पूरे शहर में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमें सुबह 6 बजे से ही कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 18 जगहों पर छापेमारी करने पहुंच गईं (The Statesman) । इस कार्रवाई का निशाना था – एक नामी कोयला कारोबारी एल.बी. सिंह और उनकी कंपनी देव प्रभा। साथ ही दो अन्य कोयला व्यापारियों के ठिकानों पर भी छापे पड़े।

कौन हैं L.B. सिंह ?

एल.बी. सिंह धनबाद के एक जाने-माने कोयला ठेकेदार हैं। उनकी कंपनी देव प्रभा कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के लिए आउटसोर्सिंग का काम संभालती है (The Assam Tribune) । आसान भाषा में कहें तो ये बीसीसीएल के लिए कोयले की निकासी और अन्य काम करते हैं। सिंह का आलीशान बंगला “देव विला” धनबाद में काफी मशहूर है। पहले भी आयकर विभाग ने सिंह के ठिकानों पर छापा मारा था, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी।

छापेमारी के पीछे की कहानी

देखिए, ये कहानी पुरानी है। ED पिछले सात-आठ महीनों से संदिग्ध लेनदेन और कोयला अनुबंधों पर नजर रख रही थी। जांच एजेंसी को शक था कि टेंडर की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, अवैध तरीके से पैसे कमाए जा रहे हैं और उन्हें सफेद किया जा रहा है। कोयला मंत्रालय को पहले से ही कुछ शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई शुरू की गई ।

सीबीआई ने पहले एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसे बाद में ED ने अपने केस में बदल दिया। मतलब साफ है – मामला गंभीर है और कई एजेंसियां इसमें जुड़ी हैं।

छापेमारी का ड्रामा

सुबह की छापेमारी में एक दिलचस्प वाकया भी हुआ। जब ED की टीम एल.बी. सिंह के घर देव विला पहुंची, तो उन्होंने अपने पालतू कुत्तों को छोड़ दिया ताकि अधिकारी अंदर न जा सकें। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने हालात संभाल लिए और छापेमारी जारी रही। यह घटना बताती है कि छापे की खबर मिलने पर कुछ लोग कैसी हरकतें करते हैं।

बीसीसीएल में भ्रष्टाचार का खुलासा - L.B. Singh पर ED की बड़ी कार्रवाई
बीसीसीएल में भ्रष्टाचार का खुलासा – L.B. Singh पर ED की बड़ी कार्रवाई

 

क्या-क्या मिला छापेमारी में ?

ED की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जब्त की है, जो कोयला आउटसोर्सिंग में गड़बड़ी, बिना हिसाब की कमाई और अवैध धन हस्तांतरण से जुड़े माने जा रहे हैं। इसके अलावा, अनिल गोयल और संजय खेमका नाम के दो अन्य कोयला व्यापारियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई।

कैसे चलता था यह खेल ?

जांच में सामने आया है कि टेंडर आवंटन में अनियमितताएं हुईं, बीसीसीएल के संचालन से जुड़े संदिग्ध वित्तीय हस्तांतरण हुए । कोयले की मात्रा में विसंगतियां पाई गईं और बीसीसीएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत की आशंका है। यानी पूरा एक नेटवर्क बना हुआ था जिसमें ठेकेदार, अधिकारी और कोयला व्यापारी सब मिले हुए थे।

जांचकर्ताओं का मानना है कि इस नेटवर्क ने बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी, गैर-आधिकारिक मार्गों से कोयले की ढुलाई और आउटसोर्सिंग टेंडरों में हेराफेरी के जरिए राजस्व का भारी नुकसान किया।

बीसीसीएल अधिकारियों की क्या भूमिका ?

अभी तक किसी भी बीसीसीएल अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। यह चिंता की बात है क्योंकि अगर अधिकारियों की मिलीभगत साबित होती है तो यह सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की गहराई को दर्शाता है।

आम लोगों पर क्या असर ?

अब सवाल उठता है कि इससे हम जैसे आम लोगों को क्या फर्क पड़ता है? दोस्तों, कोयला तस्करी और भ्रष्टाचार से सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है। यही पैसा विकास के कामों में लग सकता था – स्कूल, अस्पताल, सड़कें बन सकती थीं। जब कुछ लोग गलत तरीके से लाखों-करोड़ों कमा रहे हों, तो उसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।

ये भी पढ़े : – ED की बड़ी कार्रवाई: झारखंड-बंगाल में कोयला माफिया पर 40 ठिकानों पर छापे

झारखंड जैसे राज्य में जहां कोयला प्रमुख संसाधन है, वहां इस तरह की गड़बड़ियां राज्य के विकास में सबसे बड़ी रुकावट हैं।

बीसीसीएल में भ्रष्टाचार का खुलासा - L.B. Singh पर ED की बड़ी कार्रवाई
बीसीसीएल में भ्रष्टाचार का खुलासा – L.B. Singh पर ED की बड़ी कार्रवाई

आगे क्या होगा ?

ED ने अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि छापेमारी में मिले सबूतों के आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है। जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री की जांच के बाद अगला कदम तय किया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह छापेमारी झारखंड में कोयला माफिया के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई है। एल.बी. सिंह जैसे नामी ठेकेदारों पर कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि सरकार अब गंभीर है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई से पूरा नेटवर्क टूटेगा ?

क्या बीसीसीएल के अंदर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों तक पहुंचा जाएगा? और क्या राजनीतिक संरक्षण में चल रहे इस काले धंधे पर लगाम लगेगी?

हमें उम्मीद करनी चाहिए कि यह जांच निष्पक्ष रूप से पूरी हो और दोषियों को सजा मिले, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों।

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