IIM ग्रैजुएट की 3000 रूपए की ऑफलाइन AI डिवाइस JivaScope ने जीता James Dyson Award 2025

IIM काशीपुर के ग्रेजुएट तुनिर साहू ने अपनी क्रांतिकारी AI-चालित डिवाइस ‘JivaScope’ के ज़रिए भारत और खासकर ग्रामीण इलाकों में दिल और फेफड़ों की बीमारियों के स्क्रीनिंग में एक नया अध्याय लिखा है। मात्र 3000 रूपए कीमत वाली इस ऑफलाइन AI टूल ने James Dyson Award 2025 भारत राष्ट्रीय खिताब जीता है, जो टेक्नोलॉजी, डिज़ाइन और सामाजिक योगदान का एक बड़ा प्रमाण है

IIM काशीपुर के तुनिर साहू ने बनाया JivaScope, जो बिना डॉक्टर, बिजली या इंटरनेट के कर सकती है दिल और फेफड़ों की बीमारियों की स्क्रीनिंग। जानिए इसके फीचर्स, केस स्टडी और इसका ग्रामीण स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान।

JivaScope: टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम : –

JivaScope एक पॉकेट-आकार का AI उपकरण है जो उपयोगकर्ता को मात्र मिनटों में स्वयं दिल और फेफड़ों की बीमारियों की स्क्रीनिंग करने में मदद करता है। इस डिवाइस में MEMS आधारित साउंड सेंसर लगाए गए हैं जो हृदय और फेफड़ों के लो-फ्रीक्वेंसी साउंड (20–2000 Hz) को कैप्चर करते हैं। साथ ही इसमें रियल-टाइम नॉइज़ कैंसलेशन तकनीक लगी है, जो बाहरी आवाजों को फ़िल्टर करता है ताकि सटीक डेटा मिले।

यह डिवाइस ब्लूटूथ 5.2 के ज़रिए मोबाइल एप से जुड़ता है, जो उपयोगकर्ता को छाती के चार निर्धारित क्षेत्रों में सेंसर को सही ढंग से रखने के लिए इंफ्रारेड LED और हैंप्टिक फीडबैक के माध्यम से मार्गदर्शन करता है। ऑनबोर्ड ARM Cortex-M प्रोसेसर तुंर AI मॉडल्स के सहारे साउंड डेटा का विश्लेषण करता है और तुरंत AI-आधारित रिपोर्ट देता है, जिसमें हृदय के मर्मर, फेफड़ों में व्हीज़ या क्रैकल्स जैसी असामान्यताएं दिखती हैं। यह सिस्टम बिना इंटरनेट के भी काम करता है और कनेक्टिविटी मिलने पर क्लाउड से सिंक हो जाता है।

प्रेरणा और व्यक्तिगत अनुभव : –

तुनिर साहू ने बताया कि ग्रामीण बिहार के दौरे के दौरान उन्होंने यह देखा कि कई मरीजों को अस्थमा, न्यूमोनिया या दिल की बीमारी के लक्षण होते हुए भी समय पर जांच नहीं मिल पाती, क्योंकि वहां डॉक्टर या उचित उपकरणों की कमी है। अनेक बार एक ही डॉक्टर कई गांवों के हजारों मरीजों को देखते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां छुपी रह जाती हैं। इस अनुभव ने उन्हें एक किफायती और प्रभावी मेडिकल स्क्रीनिंग उपकरण बनाने के लिए प्रेरित किया।

IIM ग्रैजुएट की 3000 रूपए की ऑफलाइन AI डिवाइस JivaScope ने जीता James Dyson Award 2025
IIM ग्रैजुएट की 3000 रूपए की ऑफलाइन AI डिवाइस JivaScope ने जीता James Dyson Award 2025 ( image source – james dyson award )

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केस स्टडी : ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में प्रभाव : –

बिहार के एक दुर्गम क्षेत्र में ASHA कार्यकर्ता ने JivaScope का उपयोग करते हुए हृदय रोग से पीड़ित एक बुजुर्ग का सफलतापूर्वक समय रहते निदान किया। इससे पहले उस केस में उचित स्क्रीनिंग न होने से मरीज की हालत गंभीर होती जा रही थी। JivaScope ने मरीज को इलाज के लिए सही दिशा में भेजा, जिससे जीवन रक्षा संभव हो सकी। यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे यह उपकरण ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक परिवर्तन ला सकता है।

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समाधान और आगे की योजना : –

  • स्केलिंग और ट्रेनिंग : JivaScope को 10 से अधिक राज्यों में पहुंचाने के लिए विभिन्न सरकारों, NGOs और स्वास्थ्य मिशनों के साथ साझेदारी की योजना है। इसके लिए ASHA कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है।
  • नियामक मंजूरी : उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए क्लीनिकल ट्रायल्स और मेडिकल रेगुलेटरी प्राधिकरणों से मंजूरी लेने पर काम चल रहा है।
  • डिजिटल इंटीग्रेशन : JivaScope को देश की टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी के साथ जोड़ने की तैयारी है, जिससे दूरदराज के इलाकों में भी डॉक्टरों से कनेक्टिविटी हो सकेगी।
  • किफायती स्वास्थ्य जांच : साधारण कीमत (3000 रूपए) और ऑफलाइन क्षमता इसे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सहज बनाती है।

तुनिर साहू का JivaScope भारत में ग्रामीण और सीमांत हेल्थकेयर के परिदृश्य को बदलने वाला उपकरण साबित हो रहा है। लाखों लोगों के लिए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां चिकित्सकीय संसाधन सीमित हैं, यह डिवाइस जीवन रक्षक सिद्ध हो रहा है। James Dyson Award 2025 जीत कर इस तकनीक को वैश्विक मंच मिला है, जो भविष्य में विकास और व्यापक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। यह साबित करता है कि सही प्रेरणा, तकनीक और इरादे से स्वास्थ्य सेवा को न्यायसंगत, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है ।

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