भारत का नया क्लाइमेट प्लान: दिसंबर तक UN को सौंपेगा 2035 तक का टारगेट
पर्यावरण मंत्री भूपेंदर यादव ने COP30 में किया ऐलान : –
दोस्तों, अगर आप सोच रहे हैं कि क्लाइमेट चेंज सिर्फ न्यूज़ चैनलों की बात है, तो ये खबर आपके लिए है। पर्यावरण मंत्री भूपेंदर यादव ने सोमवार को ब्राजील के बेलम में चल रहे UN COP30 क्लाइमेट समिट में ऐलान किया कि भारत दिसंबर तक 2035 तक की अवधि के लिए अपना संशोधित Nationally Determined Contribution (NDC) प्रकाशित करेगा। अब सवाल ये है कि ये NDC क्या बला है और इससे हमें क्या फर्क पड़ता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
NDC है क्या चीज़ ? : –
NDC यानी Nationally Determined Contribution – ये Paris Agreement के तहत राष्ट्रीय जलवायु योजनाएं हैं जो emissions कम करने और जलवायु परिवर्तन के साथ adapt करने के लिए टारगेट तय करती हैं। इसका मकसद है ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना।
सीधी भाषा में कहें तो ये एक तरह का वादा है जो हर देश UN को करता है कि वो कितना प्रदूषण कम करेगा, कितनी क्लीन एनर्जी इस्तेमाल करेगा, और धरती को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाएगा।
Paris Agreement के Article 4, paragraph 2 के अनुसार “प्रत्येक पार्टी को successive nationally determined contributions को तैयार करना, संप्रेषित करना और बनाए रखना होगा”। NDCs हर पांच साल में UNFCCC सचिवालय को सबमिट किए जाते हैं।
भारत का पहले का रिकॉर्ड कैसा रहा ? : –
अब जो लोग सोचते हैं कि सरकार सिर्फ वादे करती है, उनके लिए कुछ आंकड़े हैं। भारत की emission intensity 2005 के बाद से 36 प्रतिशत से ज्यादा घट चुकी है। ये कोई छोटी-मोटी achievement नहीं है।
भारत की non-fossil fuel आधारित ऊर्जा क्षमता लगभग 256 गीगावाट पर पहुंच गई है, जो इसकी कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से ज्यादा है। ये NDC टारगेट शेड्यूल से पांच साल पहले हासिल कर लिया गया।
हां, आपने सही सुना – पांच साल पहले! जब दुनिया के ज्यादातर देश अपने टारगेट पूरे नहीं कर पा रहे, तब भारत समय से पहले अपने लक्ष्य हासिल कर रहा है।

2022 में क्या-क्या वादे किए थे ? : –
अगस्त 2022 में भारत ने अपना updated NDC UNFCCC को सबमिट किया था। भारत ने 2030 तक अपने GDP की emissions intensity को 45% तक कम करने की प्रतिबद्धता जताई। ये updated NDC भारत के 2070 तक net-zero emissions के long-term goal की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य टारगेट्स में शामिल थे –
- non-fossil fuel आधारित ऊर्जा संसाधनों से 2030 तक 50% cumulative electric power installed capacity को पूरा करना,
- 500 GW non-fossil fuel installed power generation capacity, और
- एक billion tonnes तक absolute emissions में कटौती।
- इसके साथ ही 2030 तक अतिरिक्त वन और पेड़ों के कवर के माध्यम से 2.5 से 3 GtCO2e का carbon sink बनाना भी शामिल था।
क्या भारत अपने टारगेट्स पूरे कर पा रहा है ? : –
2024-25 में पहली बार non-fossil sources ने नई बिजली उत्पादन का majority हिस्सा प्रदान किया, जो fossil fuel dependency से संभावित break को दर्शाता है। भारत ने 50% non-fossil installed capacity को पार कर लिया है और अपने conditional NDC target (50% by 2030) को schedule से काफी पहले हासिल कर लिया।
2024 में coal की installed capacity में हिस्सेदारी घटकर 47% रह गई, और 73 GW से ज्यादा नई utility scale solar और wind capacity के लिए tender जारी किए गए। ये कोई मामूली आंकड़े नहीं हैं, दोस्तों।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि देश की emission intensity 2022 में पहले से ही 2005 की तुलना में 34 प्रतिशत कम थी। अगर भारत की GHG emissions 3 प्रतिशत per annum की दर से बढ़ती रहीं और GDP growth 2020s में 8 प्रतिशत per annum रही, तो भारत 2025 से पहले ही 45 प्रतिशत की emission intensity reduction का target हासिल कर लेगा।
समुदाय की भागीदारी : 2 अरब पेड़ों की कहानी : –
अब सबसे दिलचस्प बात। यादव ने UN को बताया कि Paris Agreement के carbon sinks और reservoirs के conservation और development के उद्देश्यों के अनुरूप, community-led initiative के तहत सिर्फ 16 महीनों में पूरे देश में 2 अरब पेड़ लगाए गए।

2 अरब पेड़ !
ये संख्या इतनी बड़ी है कि कल्पना करना मुश्किल है। लेकिन ये दिखाता है कि जब community शामिल होती है, तो चमत्कार हो सकते हैं।
विकसित देशों से क्या मांग है ? : –
भारत सिर्फ अपना काम नहीं कर रहा, बल्कि विकसित देशों को भी आईना दिखा रहा है। भूपेंदर यादव ने कहा कि विकसित देशों को अपने वर्तमान target dates से कहीं पहले net zero हासिल करना होगा, Paris Agreement के Article 9.1 के तहत अपनी obligations को पूरा करना होगा, और trillions of dollars में अनुमानित नई, अतिरिक्त और concessional climate finance देनी होगी।
मंत्री ने कहा कि climate goals का implementation adequate, accessible और affordable होना चाहिए, और restrictive intellectual property barriers से मुक्त होना चाहिए।
ये बिल्कुल सही बात है। विकसित देशों ने सालों तक प्रदूषण किया, अब जिम्मेदारी लेने का वक्त आ गया है।
क्लाइमेट फाइनेंस की अहमियत
2009 में COP15 Copenhagen में विकसित देशों ने सहमति जताई थी कि वे विकासशील देशों की climate action में मदद के लिए 2020 तक प्रति वर्ष USD 100 billion जुटाएंगे। 2015 में NCQG (New Collective Quantified Goal) Paris Agreement के एक प्रमुख तत्व के रूप में उभरा।
भारत का मानना है कि 2025 में नए NDC commitments शुरू हो रहे हैं, इसलिए ये critical है कि नया finance goal उन संसाधनों के अनुरूप हो जो NDC commitments को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।
बिना पैसे के तो कुछ भी संभव नहीं। अगर विकसित देश सिर्फ वादे करेंगे और पैसा नहीं देंगे, तो कैसे चलेगा?
EV और रिन्यूएबल एनर्जी में प्रगति
भारत ने 2030 तक EV private car sales को total sales के 30% तक बढ़ाने का objective स्थापित किया है, हालांकि इस segment में प्रगति धीमी है – FY 2024-25 में sales share सिर्फ 2.5% है।
ये थोड़ी निराशाजनक बात है। लेकिन FAME III की जगह PM E-DRIVE scheme आई है जो battery-powered two-wheelers, three-wheelers, ambulances, trucks और अन्य advanced EVs को promote करने के लिए INR 36.79 billion (USD 438 million) incentives प्रदान करेगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि renewables – खासकर solar – coal के साथ cost-competitive होते जा रहे हैं। मतलब अब लोगों को सस्ती भी है और साफ भी।

Mission LiFE : जीवनशैली का बदलाव : –
भारत के updated NDC में sustainable lifestyles के माध्यम से climate change से लड़ने पर फोकस है – Mission LiFE (Lifestyle for the Environment) initiative के जरिए।
अपने first NDC में भारत ने “conservation और moderation की traditions और values पर आधारित healthy और sustainable way of living” को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई थी। Updated NDC में इसे expand करके ‘LIFE’ – Lifestyle for Environment के लिए एक mass movement शामिल किया गया है।
अक्टूबर 2022 में Mission LiFE लॉन्च किया गया जो 2028 तक कम से कम एक अरब लोगों को mobilize करने का लक्ष्य रखता है। ये सिर्फ सरकारी काम नहीं है, बल्कि हर इंसान की जिम्मेदारी है।
International Solar Alliance और Global Biofuel Alliance : –
यादव ने कहा कि International Solar Alliance और Global Biofuel Alliance जैसी पहल affordable और clean energy को promote करने के लिए global platforms बन गई हैं।
भारत सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए काम कर रहा है। ये initiatives दूसरे देशों को भी clean energy अपनाने में मदद कर रही हैं।
2035 का टारगेट कब आएगा ? : –
Countries को इस साल 2031-2035 की अवधि के लिए अपने third round के NDCs सबमिट करने हैं, जिन्हें “NDCs 3.0” कहा जाता है। और भारत ने साफ कर दिया है कि दिसंबर तक ये आ जाएगा।
COP29 तीन दशकों की global climate negotiations को mark करता है और ये देशों द्वारा फरवरी 2025 तक अपने next Nationally Determined Contributions (NDC) सबमिट करने से पहले एक महत्वपूर्ण precursor है ।
चुनौतियां भी हैं
सब कुछ perfect नहीं है, दोस्तों। EV infrastructure को scale up करना और 4-wheeler segment में EV adoption को support करना जरूरी है, जहां adoption बहुत कम है (~2.5% of all new 4 wheeler sales in 2024)।
Public charging infrastructure को expand करना (वर्तमान में 25,202 स्टेशन) wider EV uptake को enable करने के लिए critical है ।
Building sector के लिए long-term decarbonisation strategy तैयार करना भी जरूरी है ताकि तेजी से बढ़ती cooling energy की demand को address किया जा सके।
आम आदमी क्या कर सकता है ? : –
ये सब सरकारी आंकड़े हैं, लेकिन हम क्या कर सकते हैं? बहुत कुछ! कम AC चलाएं, जब जरूरत न हो तो लाइट बंद करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें, पेड़ लगाएं, plastic कम इस्तेमाल करें। छोटे-छोटे कदम, बड़ा बदलाव।
याद रखिए, 2 अरब पेड़ सरकार अकेले नहीं लगा सकती थी। ये community की participation थी।
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यादव ने कहा कि COP-30 Paris Agreement के एक दशक को mark करता है, जो दुनिया के collective resolve का आकलन करने का एक milestone है। “ये हमें याद दिलाता है कि जलवायु परिवर्तन अब एक दूर की manifestation नहीं है, बल्कि real और imminent है। Unsustainable growth और development ने धरती मां को गहरे तनाव में डाल दिया है”।
ये बातें सुनकर डर लग सकता है, लेकिन भारत की progress देखकर उम्मीद भी जगती है। हम अपने targets पूरे कर रहे हैं, समय से पहले कर रहे हैं। अगर हम सब मिलकर काम करें, तो 2035 के नए targets भी हासिल हो सकते हैं।
यादव ने कहा कि “भारत ने सफलतापूर्वक demonstrate किया है कि development और environmental stewardship साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं”।
तो दोस्तों, दिसंबर में जब नया climate target आए, तो ध्यान से पढ़िएगा। क्योंकि ये सिर्फ सरकार का प्लान नहीं है, ये हमारे बच्चों के भविष्य का प्लान है।