भारतीय रेलवे का नया कदम: ‘आभार’ ऑनलाइन स्टोर से स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा

भारतीय रेलवे ने स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए उठाया बड़ा कदम: ‘आभार’ ऑनलाइन स्टोर का समर्थन

आज जब हम रोजमर्रा की ज़िन्दगी की भाग-दौड़ में हैं, तब भी भारतीय संस्कृति और कारीगरी की अनमोल धरोहर हमें जोड़ती है। भारतीय रेलवे ने हाल ही में एक बहुत ही खास पहल की है, जो गांव-देहात के कारीगरों और हूनरमंदों के लिए उम्मीद की नई किरण है। रेलवे अब ‘आभार’ ऑनलाइन स्टोर को प्रमोट करेगा, ताकि देश के स्थानीय हस्तशिल्प और दस्तकारी को सरकारी स्तर पर एक बड़ा मंच मिल सके।

आभार ऑनलाइन स्टोर क्या है ? : –

आभार एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसका मकसद है देश के स्थानीय कारीगरों, आदिवासी समूहों, हैंडलूम वस्त्र बनाने वालों, और गांव-देहात की महिलाओं के उत्पादों को एक डिजिटल मार्केट में लाना। यह ऑनलाइन स्टोर सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर संचालित होता है और यहां तकरीबन 150 से ज्यादा गिफ्ट आइटम्स और हैंपर्स उपलब्ध हैं, जो खासतौर पर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) और ‘भौगोलिक सूचकांक’ (GI) के तहत आते हैं।

रेलवे क्यों कर रहा है आभार का प्रमोशन ? : –

भारतीय रेलवे देश के हर हिस्से में पहुंच रखने वाला एक विशाल नेटवर्क है। वह इस नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को सरकारी कार्यक्रमों, समारोहों और उपहार वितरणों में प्रोत्साहित करेगा। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के अनुरूप है, जिसमें देश के अंदर बन रहे उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा बड़ा फायदा : –

आभार के माध्यम से देश के दर्जनों हजारों कारीगर, हस्तशिल्पकार, महिला उद्यमी और ग्रामीण उद्योगों से जुड़े लोग अब अपने उत्पाद बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद के जरिए बेच पाएंगे। इससे न केवल उन्हें नई आमदनी के रास्ते मिलेंगे, बल्कि खासकर कमजोर वर्गों को सामाजिक और आर्थिक समावेशन भी मिलेगा।

‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ से जुड़ा नया अध्याय : –

रेलवे ने इससे पहले भी ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ योजना शुरू की थी, जिसके तहत रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय उत्पादों की दुकानें लगाई गईं थीं। अब ‘आभार’ ऑनलाइन स्टोर के साथ यह पहल डिजिटल रूप भी धारण करती है, जिससे देश के लोककलाओं का संरक्षण और विस्तार होगा।

‘आभार’ के जरिए कौन-कौन से उत्पाद मिलेंगे ? : –

यहां आपको मिलेंगे हैंडलूम के कपड़े, हस्तशिल्प के सुंदर सामान, पारंपरिक खाद्य सामग्री और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पाद। ये सब वस्तुएं खासतौर पर केंद्रीय आंगनवाड़ी संस्थान (CCIE), खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) और विभिन्न राज्य के हस्तशिल्प प्रतिष्ठानों से आती हैं।

भारतीय रेलवे का नया कदम: ‘आभार’ ऑनलाइन स्टोर से स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा
भारतीय रेलवे का नया कदम: ‘आभार’ ऑनलाइन स्टोर से स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा(image source – X)

ये भी पढ़े : – तीन भारतीय कंपनियों को चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट इंपोर्ट का लाइसेंस मिला

इस पहल का महत्व और चुनौतियां : –

यह योजना न सिर्फ आर्थिक रूप से स्थानीय कारीगरों को सशक्त करेगी, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में भी मददगार साबित होगी। लेकिन इस पथ पर चुनौतियां भी हैं, जैसे कि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना, समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना और डिजिटल मार्केटिंग के लिए कारीगरों का प्रशिक्षण।

ये भी पढ़े : – NHAI ने अपनाया डिजिटल रास्ता: यूट्यूब पर हर सड़क की कहानी

आम आदमी के लिए क्या मतलब ? : –

अब जब आप भारतीय रेलवे या सरकारी आयोजनों में इन उत्पादों को देखेंगे, तो समझिए कि आपकी खरीददारी सीधे देश के कारीगरों के जीवन सुधारने में योगदान दे रही है। सरकारी तौर पर खरीदे जाने वाले ये सामान न केवल सार्वजनिक सेवाओं में गुणवत्ता लाएंगे, बल्कि हमारे भारतीय हस्तशिल्प की एक नई पहचान भी बनेंगे।

भारतीय रेलवे की यह पहल न केवल हमारे देश के कारीगरी को बढ़ावा देगी, बल्कि लाखों कारीगरों के जीवन में खुशहाली भी लाएगी। इसलिए जब भी हमें कोई सुंदर हस्तशिल्प का सामान दिखे या उपहार में मिले, तो यही समझिए कि वह मेहनत और हुनर की असली कहानी बयां कर रहा है।

Leave a Comment