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RBI की सख्ती जारी: 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 4 ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट – जानें पूरी कहानी

RBI की सख्ती जारी: 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 4 ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट - जानें पूरी कहानी

RBI की सख्ती जारी: 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 4 ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट - जानें पूरी कहानी ( image - mint )

RBI की सख्ती जारी: 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 4 ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट – जानें पूरी कहानी

पैसे उधार देने के बिजनेस में चल रही गड़बड़ियों पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को RBI ने चार नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिया। साथ ही चार अन्य NBFCs ने खुद अपना सर्टिफिकेट सरेंडर कर दिया। यह खबर उन लोगों के लिए जरूरी है जो छोटी फाइनेंस कंपनियों से लोन लेते हैं या निवेश करते हैं।

कौन-कौन सी कंपनियों का लाइसेंस रद्द हुआ ?

RBI ने पश्चिम बंगाल की तीन कंपनियों – जेम इन्वेस्टमेंट्स एंड ट्रेडिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, विस्तार फाइनेंसर्स और अंबिका बार्टर प्राइवेट लिमिटेड – का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया है। इसके अलावा चंडीगढ़ की श्री लखावी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड का भी लाइसेंस खत्म कर दिया गया।

यह कार्रवाई आरबीआई एक्ट 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत की गई है। सीधे शब्दों में कहें तो अब ये कंपनियां आम लोगों को लोन नहीं दे सकतीं, न ही कोई फाइनेंशियल सर्विस दे सकती हैं।

किन कंपनियों ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट ?

चार अन्य NBFCs ने स्वेच्छा से अपना लाइसेंस वापस कर दिया। इनमें वाईजी कैपिटल लिमिटेड, इंटेल इन्वोफिन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गंगोत्री कमोडिटीज एंड फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड और पर्किन डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

इनमें से कुछ ने बिजनेस बंद करने की वजह से सर्टिफिकेट वापस किया, तो कुछ ने नए नियमों के मुताबिक रजिस्ट्रेशन की जरूरत न रहने के कारण। कुछ कंपनियों का किसी दूसरी कंपनी में मर्जर हो गया या उन्होंने अपना कानूनी अस्तित्व खत्म कर लिया।

आखिर क्यों हो रही है इतनी कार्रवाई ?

यह कोई पहली बार नहीं है जब RBI ने NBFCs पर सख्ती की है। पिछले कुछ महीनों में लगातार ऐसी कार्रवाइयां हो रही हैं। नवंबर 2024 में ही RBI ने चार अन्य NBFCs का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया था। इनमें तमिलनाडु की PVP कैपिटल लिमिटेड और रेन बो फाइनेंस इंडिया लिमिटेड, छत्तीसगढ़ की मारवाह फाइनेंस और उत्तर प्रदेश की राम अलॉय कास्टिंग्स शामिल थीं।

असली वजह यह है कि कई NBFCs नियमों की धज्जियां उड़ा रही थीं। कुछ लोगों से मनमाना ब्याज वसूल रही थीं, कुछ ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा नहीं कर रही थीं। कई कंपनियां अपने मुख्य काम – यानी लोन देना, क्रेडिट चेक करना, रिकवरी करना – को तीसरी पार्टी के ऐप्स को सौंप रही थीं। यह सीधे-सीधे RBI के नियमों का उल्लंघन है।

RBI की सख्ती जारी: 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 4 ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट – जानें पूरी कहानी(image- easemoney )

NBFCs क्या होती हैं और क्यों जरूरी हैं ?

NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां वे संस्थाएं होती हैं जो बैंक की तरह काम करती हैं लेकिन बैंक नहीं होतीं। आसान भाषा में समझें तो ये कंपनियां लोगों को लोन देती हैं, फाइनेंस करती हैं, लेकिन इनमें आप सेविंग अकाउंट नहीं खोल सकते और न ही चेक बुक मिलती है।

छोटे शहरों और गांवों में जहां बैंक की पहुंच कम है, वहां ये NBFCs लोगों को आसानी से लोन देती हैं। दो-पहिया या कार खरीदनी हो, बिजनेस के लिए पैसे चाहिए हों या फिर घर का खर्च – NBFCs हर तरह की मदद करती हैं। मार्च 2023 में देश में 9,443 NBFCs रजिस्टर्ड थीं, जो जून 2024 तक घटकर 9,306 रह गईं। यह गिरावट दिखाती है कि RBI कमजोर और गलत तरीके से काम करने वाली कंपनियों को लगातार बाहर कर रहा है।

समस्या कहां है ?

पिछले कुछ सालों में डिजिटल लेंडिंग यानी मोबाइल ऐप के जरिए लोन देने का चलन तेजी से बढ़ा है। कई बार तो लोगों को पता भी नहीं होता कि जो ऐप उन्होंने इंस्टॉल किया है, उसके पीछे कौन-सी कंपनी है।

जुलाई 2024 में RBI ने स्टार फिनसर्व इंडिया और पॉलीटेक्स इंडिया जैसी कंपनियों का लाइसेंस इसी वजह से रद्द किया था क्योंकि ये अपनी मुख्य जिम्मेदारियां तीसरे पक्ष को सौंप रही थीं और ग्राहकों की जानकारी की सुरक्षा नहीं कर रही थीं।

कुछ ऐप तो ऐसे हैं जो पहले तो आसानी से लोन दे देते हैं, लेकिन बाद में ब्याज के नाम पर मनमानी करते हैं। रिकवरी के लिए धमकियां देना, ग्राहकों की कॉन्टैक्ट लिस्ट के लोगों को परेशान करना – ये सब आम हो गया है।

RBI की सख्ती का असर क्या होगा ?

ग्राहकों के लिए
अगर आपने इन कैंसिल हुई कंपनियों से लोन लिया है, तो घबराने की जरूरत नहीं। आपको अपना लोन चुकाना होगा, लेकिन अब ये कंपनियां नया बिजनेस नहीं कर सकतीं। मौजूदा लोन की रिकवरी के लिए RBI के नियमों का पालन करना होगा।

बाकी NBFCs के लिए
यह साफ संदेश है कि नियम तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जो कंपनियां सही तरीके से काम नहीं कर रहीं, उन्हें या तो सुधरना होगा या फिर बिजनेस बंद करना होगा। यह अच्छी बात है क्योंकि इससे ईमानदारी से काम करने वालों की साख बढ़ेगी।

फाइनेंशियल सिस्टम के लिए
RBI की यह कार्रवाई पूरे वित्तीय तंत्र की सेहत के लिए जरूरी है। 2018-19 में IL&FS और दीवान हाउसिंग जैसी बड़ी NBFCs के डूबने से जो संकट आया था, वह अभी भी सबकी याद में है। तब से RBI लगातार सतर्क है और कमजोर कड़ियों को हटा रहा है।

आगे क्या होगा ?

जनवरी 2025 में RBI ने 10 NBFCs का सर्टिफिकेट सुपरवाइजरी आधार पर कैंसिल किया, और दिसंबर 2024 में अनियमित लेंडिंग प्रैक्टिस के कारण तीन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए। यह ट्रेंड बताता है कि RBI का फोकस अब सिर्फ बैंकों पर नहीं, बल्कि NBFCs पर भी पूरी सख्ती से है।

आने वाले समय में और भी कड़े नियम आ सकते हैं। खासतौर पर डिजिटल लेंडिंग, आउटसोर्सिंग और ग्राहक डेटा की सुरक्षा को लेकर। जो कंपनियां अभी से अपना घर दुरुस्त नहीं करेंगी, उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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RBI की सख्ती जारी: 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द, 4 ने खुद सरेंडर किए सर्टिफिकेट – जानें पूरी कहानी (image -LinkedIn )

आम लोगों को क्या करना चाहिए ?

अगर आप किसी NBFC से लोन ले रहे हैं या लेने की सोच रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें :

1. *कंपनी की जांच करें*: RBI की वेबसाइट पर जाकर चेक करें कि कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं। RBI की लिस्ट में नाम होना जरूरी है।

2. *ब्याज दरें समझें*: कितना ब्याज लग रहा है, प्रोसेसिंग फीस क्या है, छिपे हुए चार्जेज तो नहीं – सब कुछ लिखित में लें।

3. *डेटा सुरक्षा*: अपनी निजी जानकारी सावधानी से शेयर करें। कोई भी ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी रेटिंग और रिव्यू देखें।

4. *शिकायत करें*: अगर किसी NBFC का व्यवहार सही नहीं है तो RBI के ऑम्बड्समैन से शिकायत करें। आप RBI की वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

5. *अंधविश्वास से बचें*: सिर्फ इसलिए लोन मत लें क्योंकि वह आसानी से मिल रहा है। अपनी जरूरत और चुकाने की क्षमता को देखकर ही फैसला लें।

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RBI की यह कार्रवाई दिखाती है कि नियामक पैसों के खेल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा। यह आम ग्राहकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है। हालांकि इससे थोड़ी असुविधा हो सकती है – खासकर उन लोगों को जिनकी इन कंपनियों में पहले से डील थी – लेकिन लंबी अवधि में यह पूरे सिस्टम के लिए फायदेमंद है।

याद रखें, पैसों का मामला है तो सावधानी जरूरी है। सस्ते और आसान लोन के चक्कर में किसी भी संदिग्ध कंपनी से न जुड़ें। हमेशा RBI रजिस्टर्ड और विश्वसनीय संस्थाओं से ही डील करें। आपका पैसा, आपकी मेहनत – उसे संभालकर रखें।

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