एससीबीए ने राकेश किशोर की सदस्यता रद्द की: सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने के बाद बड़ी कार्रवाई

एक अचानक घटना जिसने सबका ध्यान खींचा

कुछ दिनों पहले एक बड़ी घटना हुई जिसने पूरे देश में कानूनी दुनिया को हिला कर रख दिया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई के सामने एक अधिवक्ता, राकेश किशोर ने कोर्ट के अंदर जूता फेंकने की कोशिश की। यह कोई मामूली बात नहीं थी, बल्कि कोर्ट के अंदर इस तरह का व्यवहार बेहद अनुचित और गंभीर माना जाता है। सामने वाले CJI सख्त नियमों और गरिमा के प्रतीक होते हैं, इसलिए उसकी सुरक्षा और सम्मान बहुत जरूरी होता है।

राकेश किशोर ने यह कदम खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति से जुड़ी टिप्पणी से आहत होकर उठाया था। उनकी माने तो यह कार्रवाई उन्हें दैवीय प्रेरणा से हुई थी। उन्होंने कोर्ट में ‘सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा’ जैसे नारे भी लगाए।

एससीबीए ने फटकार लगाई : –

ऐसे गंभीर कृत्य को देखकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने तत्काल एक्शन लिया। एससीबीए की कार्यकारिणी समिति ने यह कहा कि राकेश किशोर का यह व्यवहार न्यायिक स्वतंत्रता, कोर्ट की गरिमा और बार-बेंच के बीच लंबे समय से कायम सम्मान के लिए खतरा है।इसलिए एससीबीए ने राकेश किशोर की अस्थाई सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया और उनका नाम एसोसिएशन की सूची से हटा दिया। साथ ही उनका कोर्ट परिसर में प्रवेश पास भी निरस्त कर दिया गया। इसका मतलब है कि अब राकेश किशोर सुप्रीम कोर्ट परिसर में जाना भी नहीं सकते।

एससीबीए ने राकेश किशोर की सदस्यता रद्द की: सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने के बाद बड़ी कार्रवाई
एससीबीए ने राकेश किशोर की सदस्यता रद्द की: सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने के बाद बड़ी कार्रवाई(image source-Hindustan times)

पहले भी हुई थी बार काउंसिल की कार्रवाई : –

एससीबीए के निर्णय से पहले ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने राकेश किशोर का बार लाइसेंस निलंबित कर दिया था। बीसीआई ने इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया की सुरक्षा और पेशेवर आचार के पालन के लिए जरूरी माना।बार काउंसिल ने कहा कि किशोर का कृत्य निंदनीय और अशोभनीय था जिसके कारण न्यायपालिका की शुचिता और स्वतंत्रता पर हमला हुआ।

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इस पूरी घटना को आम भाषा में समझें तो ऐसा है जैसे कोई इंसान, जो खुद को कानून का जानकार भी मानता है, उसने उस जगह अपशब्द बोला और अशिष्टता दिखाई जहां सबकी बातें सुनी जाती हैं और न्याय दिया जाता है।बार और बेंच के बीच लंबे समय से सम्मान और विश्वास का रिश्ता चलता है, जो इस तरह की हरकतों से टूटता नजर आता है। लोगों को यह खबर सुनकर थोड़ा झटका लग सकता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि हर पेशे में अनुशासन का पालन होना चाहिए।

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आगे क्या होगा ?

राकेश किशोर के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई भी हो रही है। दिल्ली पुलिस ने भी उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की थी और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज हुई है। कोर्ट परिसर में इस तरह की घटना फिर न हो, इसके लिए कड़े नियम बनाए जा रहे हैं।एससीबीए और बार काउंसिल दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा होनी चाहिए।

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