“सपना बड़ा है, जेब छोटी है”: स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम से नए बिज़नेस को मिल रही उड़ान

 

अब आप सोचिए, आपके पास एक जबरदस्त आइडिया है — ऐसा आइडिया जो दुनिया बदल सकता है। आप दिन-रात मेहनत करते हैं, प्लान बनाते हैं, दोस्तों से सलाह लेते हैं। लेकिन जब बात आती है पैसे की, तो सब ठप हो जाता है। बैंक कहता है “गिरवी क्या रखोगे?”, इन्वेस्टर कहता है “पहले कुछ दिखाओ”, और घरवाले कहते हैं “सरकारी नौकरी देख लो बेटा”।

ऐसे ही हालात में सरकार ने एक स्कीम शुरू की — नाम है स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम यानी SISFS। ये स्कीम उन लोगों के लिए है जो आइडिया लेकर बैठे हैं, लेकिन जेब में पैसा नहीं है।

ये स्कीम है क्या ?

सरकार ने 2021 में इस स्कीम की शुरुआत की थी, और अब 2025 में ये और मजबूत हो गई है। इसका मकसद है ऐसे स्टार्टअप्स को शुरुआती फंड देना जो अभी-अभी शुरू हुए हैं और जिनके पास कोई प्रोडक्ट या सर्विस का आइडिया है, लेकिन उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए पैसे नहीं हैं।

“सपना बड़ा है, जेब छोटी है”: स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम से नए बिज़नेस को मिल रही उड़ान
“सपना बड़ा है, जेब छोटी है”: स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम से नए बिज़नेस को मिल रही उड़ान(image source-national portal of india)

इस स्कीम के तहत सरकार दो तरह की मदद देती है :

  • 20 लाख रूपए तक की ग्रांट: ये पैसा प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट और प्रोडक्ट ट्रायल के लिए दिया जाता है।
  • 50 लाख रूपए तक की इन्वेस्टमेंट: ये पैसा मार्केट में एंट्री, कमर्शियलाइजेशन और स्केलिंग के लिए दिया जाता है — वो भी डेबेंचर या लोन के रूप में।

कौन ले सकता है फायदा ?

अब बात करते हैं eligibility की — यानी कौन इस स्कीम के लिए अप्लाई कर सकता है :

  •  स्टार्टअप को DPIIT (उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) से मान्यता मिली हो।
  •  कंपनी को शुरू हुए दो साल से ज्यादा न हुए हों।
  • आइडिया ऐसा हो जो मार्केट में चल सके, स्केलेबल हो और टेक्नोलॉजी से जुड़ा हो।
  •  पहले किसी सरकारी स्कीम से 10 लाख रूपए से ज्यादा की मदद न ली हो।

 

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पैसा मिलेगा कैसे ?

सरकार खुद पैसा नहीं देती, बल्कि देशभर के इनक्यूबेटर्स के जरिए ये फंड बांटा जाता है। यानी आपको किसी मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर के पास अप्लाई करना होता है। आप एक साथ तीन इनक्यूबेटर्स को अप्लाई कर सकते हैं। और अच्छी बात ये है कि इसके लिए किसी एजेंट या कंसल्टेंट की जरूरत नहीं — सब कुछ ऑनलाइन और फ्री है।

आम आदमी की नजर से

अब बात करते हैं हम जैसे लोगों की — जो छोटे शहरों में रहते हैं, जिनके पास आइडिया तो है लेकिन ना तो इन्वेस्टर तक पहुंच है, ना ही कोई बड़ा नेटवर्क। इस स्कीम से ऐसे लोगों को मौका मिलता है कि वो अपने सपने को हकीकत बना सकें।

मान लीजिए आपने एक ऐसा ऐप बनाया है जो किसानों को मौसम की जानकारी देता है। आपने इसे अपने लैपटॉप पर तैयार किया है, लेकिन अब आपको इसे टेस्ट करना है, लोगों तक पहुंचाना है — तो इसके लिए पैसे चाहिए। यही पैसा आपको SISFS से मिल सकता है।

अब तक क्या हुआ ?

2025 तक इस स्कीम के तहत सैकड़ों स्टार्टअप्स को फंड मिला है। कई कंपनियां जो आज मार्केट में अच्छा कर रही हैं, उन्होंने इसी स्कीम से शुरुआत की थी। सरकार का कहना है कि इससे न सिर्फ नए बिज़नेस बढ़ेंगे, बल्कि रोजगार भी पैदा होगा।

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