सुखोई सुपरजेट SJ-100 के 14 साल, 95 एक्सीडेंट और भारत का उत्पादन

कहानी आम आदमी की जुबानी : –

सोचिए कि एक एयरक्राफ्ट मॉडल पर 14 साल में 95 एक्सीडेंट हो जाएं, तो क्या आप उसे खरीदना पसंद करेंगे? अब जब बात है हमारे देश की सरकारी कंपनी HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) द्वारा सुखोई सुपरजेट SJ-100 का भारत में उत्पादन शुरू करने की, तो सवाल उठता है कि क्या यह कदम सही है? आम आदमी की भाषा में, यह बात समझना जरूरी है कि इस फैसले के फायदे और नुकसान आखिर क्या हैं।

HAL और सुखोई सुपरजेट—क्या है मामला ?

हाल ही में HAL ने रूस की कंपनी UAC के साथ मिलकर भारत में SJ-100 को बनाने का समझौता किया है। यह 100 बोर्डिंग सीट वाली एक छोटा-से-मध्यम दूरी का विमान है, जिसे भारत के छोटे शहरों और कस्बों को जोड़ने के लिए बनाया गया है। यह कदम सरकार के UDAN योजना (उड़ान) के तहत क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने का हिस्सा है। कुल मिलाकर HAL का उद्देश्य भारत को एक सिविल एविएशन निर्माण केंद्र बनाना है।

SJ-100 के 14 साल और 95 एक्सीडेंट की कहानी क्या कहती है ? : –

सुखोई सुपरजेट SJ-100 की दुनिया में 14 वर्षों की सेवा रही है, जिसमें करीब 95 एक्सीडेंट या तकनीकी खराबियां दर्ज हुई हैं। ये संख्या उच्च लगती है और इससे उसके विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। कई बार इसके सर्विसिंग और स्पेयर पार्ट्स की समस्या भी सामने आई है, खासकर पश्चिमी देशों में।

हालांकि, इस विमान का डिज़ाइन और उड़ान तकनीक कमजोर नहीं है। इसे रूस और इसके सहयोगियों ने विकसित किया है, और यह विश्व के 16 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन इसकी खामियां और भरोसेमंदता की समस्या इसे पूरी तरह से ग्लोबल मार्केट की पहली पसंद नहीं बनने देती।

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सुखोई सुपरजेट SJ-100 के 14 साल, 95 एक्सीडेंट और भारत का उत्पादन
सुखोई सुपरजेट SJ-100 के 14 साल, 95 एक्सीडेंट और भारत का उत्पादन(image source -RuAviation)

उत्पादन भारत में—फायदे क्या हैं ? : –

  • पहला फायदा है आत्मनिर्भरता : भारत अब खुद के लिए विमान बनाएगा, जिससे दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी।
  • उड़ान संबंधी घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान होगा, खासकर छोटे शहरों तक हवाई सफर सस्ता और ज्यादा।
  • भारत में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे, और तकनीकी ज्ञान बढ़ेगा।
  • उत्पादन के दौरान भारत अपनी तकनीक को बेहतर बना सकता है।

लेकिन क्या जोखिम नहीं ? : –

  • एक्सीडेंट और खामियों का रिकॉर्ड चिंता का विषय है।
  • स्पेयर पार्ट्स उपलब्धता और सपोर्ट अभी भी चुनौती हो सकती है।
  • तकनीकी सुधार और सुधार में समय और पैसा लग सकता है।
  • इससे जुड़ी नीतियों और गुणवत्ता नियंत्रण का कड़ा ध्यान रखना होगा।

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आम आदमी की नजर से : –

एक आम आदमी, जो अपने शहर से दूसरे शहर जाने के लिए किफायती हवाई यात्रा चाहता है, उसके लिए यह खबर अच्छी हो सकती है। लेकिन वह भी सोच रहा होगा कि क्या यह विमान सुरक्षित और भरोसेमंद होगा? इसके एक्सीडेंट के रिकॉर्ड के कारण उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिर भी, अगर भारत इसे सुधार कर एक भरोसेमंद विमान बना पाए, तो यह बड़े उद्योग और रोजगार के लिए अच्छा कदम होगा।

HAL का सुखोई सुपरजेट SJ-100 का उत्पादन भारत में एक महत्वाकांक्षी और बड़ा प्रोजेक्ट है। हालांकि इसके एक्सीडेंट रिकॉर्ड पर चिंता अवश्य है, लेकिन यह कदम भारत की सिविल एविएशन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा प्रयास भी है। इसे सफलता की औकात तक पहुंचाने के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण, निरंतर तकनीकी सुधार, और पारदर्शिता जरूरी है। आम आदमी के लिए सुरक्षा और भरोसा सर्वोपरि होना चाहिए, साथ ही देश को अपने विमान उद्योग के विकास का मौका भी देना चाहिए।

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