“मैं अब Zoho पर काम करूंगा”: अश्विनी वैष्णव का स्वदेशी टेक्नोलॉजी की तरफ बड़ा कदम

 

“केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने सारे ऑफिस काम विदेशी ऐप्स से हटाकर Zoho पर शिफ्ट कर दिए।” अब मैं कोई टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नहीं हूँ, लेकिन इतना तो समझता हूँ कि जब देश का आईटी मंत्री ऐसा कदम उठाता है, तो बात सिर्फ ऐप बदलने की नहीं होती—ये एक सोच बदलने की शुरुआत होती है।

Zoho क्या है?

अब पहले ये समझ लेते हैं कि Zoho है क्या। Zoho एक भारतीय कंपनी है, जिसका हेडक्वार्टर तमिलनाडु में है। ये कंपनी पिछले 20 सालों से सॉफ्टवेयर बना रही है—जैसे डॉक्यूमेंट लिखने के लिए Zoho Writer, एक्सेल जैसा Zoho Sheet, और प्रेजेंटेशन के लिए Zoho Show। मतलब, जो काम हम Google Docs, Microsoft Office या अन्य विदेशी ऐप्स से करते हैं, वो सब Zoho भी कर सकता है—वो भी पूरी तरह भारतीय तकनीक से।

अश्विनी वैष्णव का ऐलान

अश्विनी वैष्णव, जो भारत सरकार में आईटी, रेलवे और सूचना प्रसारण मंत्रालय संभालते हैं, उन्होंने 23 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया:
“मैं अब Zoho पर काम करूंगा—हमारा अपना स्वदेशी प्लेटफॉर्म। मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के स्वदेशी अभियान में शामिल हों और भारतीय उत्पादों व सेवाओं को अपनाएं।”

ये सिर्फ एक पोस्ट नहीं था, बल्कि एक संदेश था—कि अब वक्त आ गया है जब हम विदेशी ऐप्स पर निर्भर रहना छोड़ें और अपने देश की तकनीक पर भरोसा करें।

“मैं अब Zoho पर काम करूंगा”: अश्विनी वैष्णव का स्वदेशी टेक्नोलॉजी की तरफ बड़ा कदम
“मैं अब Zoho पर काम करूंगा”: अश्विनी वैष्णव का स्वदेशी टेक्नोलॉजी की तरफ बड़ा कदम(image source -varindia)

Zoho के संस्थापक की प्रतिक्रिया : –

Zoho के संस्थापक श्रीधर वेंबू ने इस कदम का स्वागत किया और कहा –
“धन्यवाद सर, ये हमारे इंजीनियरों के लिए बहुत बड़ा हौसला है। हम आपको और देश को गर्व महसूस कराएंगे। जय हिंद।”

अब सोचिए, एक भारतीय कंपनी जो सालों से मेहनत कर रही थी, उसे देश के आईटी मंत्री से ऐसा समर्थन मिला—तो ये सिर्फ एक कंपनी की जीत नहीं, पूरे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की जीत है।

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अब बात करते हैं हमारी नजर से। हम रोज़ाना मोबाइल पर काम करते हैं—डॉक्यूमेंट बनाते हैं, प्रेजेंटेशन तैयार करते हैं, डेटा संभालते हैं। लेकिन ज़्यादातर लोग Google, Microsoft या Apple जैसे विदेशी ऐप्स पर निर्भर रहते हैं। अब अगर हमारे देश में ही ऐसा प्लेटफॉर्म मौजूद है, तो क्यों न उसे अपनाया जाए?

Zoho का इस्तेमाल करने से न सिर्फ डेटा भारत में सुरक्षित रहता है, बल्कि हम अपने देश की कंपनियों को भी मज़बूत बनाते हैं। और जब सरकार खुद ऐसा कदम उठाती है, तो आम जनता को भी प्रेरणा मिलती है।

“विकसित भारत” की दिशा में एक कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में “हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी” का नारा दिया है। GST में कटौती, लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, और डिजिटल इंडिया जैसे अभियान इसी सोच का हिस्सा हैं। अश्विनी वैष्णव का Zoho पर जाना इसी दिशा में एक ठोस कदम है।

ये सिर्फ ऐप बदलने की बात नहीं है, ये सोच बदलने की बात है। जब देश का मंत्री कहता है “मैं Zoho पर काम करूंगा”, तो वो हमें भी सोचने पर मजबूर करता है—क्या हम भी अपने डिजिटल जीवन में स्वदेशी को जगह दे सकते हैं?

शायद अगली बार जब आप कोई डॉक्यूमेंट बनाएँ, तो Zoho Writer खोलें। जब कोई डेटा संभालें, तो Zoho Sheet आज़माएँ। और जब कोई प्रेजेंटेशन बनाएं, तो Zoho Show पर भरोसा करें।

क्योंकि अब वक्त है — “स्वदेशी अपनाओ, डिजिटल भारत बनाओ।”

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