बाबूलाल मरांडी ने खोला कोयला घोटाले का राज – ‘हाउस’ के कोड नाम पर भड़के लोग
जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने मचाया तहलका : –
झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार को एक ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसने पूरे राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कोयला घोटाले के ऐसे खुलासे किए जो सुनकर लोग सन्न रह गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्होंने ‘हाउस’ नाम के एक कोड का जिक्र किया, जिसकी तरफ इशारा करते हुए कहा कि धनबाद में चल रहे अवैध कोयले के कारोबार में मुख्यमंत्री आवास की भूमिका हो सकती है।
मरांडी ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि राज्य में कोयले की चोरी का तरीका ही बदल गया है। पहले कोयला चोर सिर्फ पुलिस-प्रशासन तक कमीशन पहुंचाते थे, लेकिन अब यह नेटवर्क और ऊपर तक फैल चुका है।
धनबाद में क्या हो रहा है ?
धनबाद जिले में करीब 40 अवैध खनन स्थल चल रहे हैं जहां रोजाना बड़े पैमाने पर कोयले की निकासी हो रही है। मरांडी के मुताबिक, यह काम पुलिस और कोयला माफिया की साझेदारी में हो रहा है। हर दिन हजारों ट्रकों में कोयला चोरी होता है और इसका पैसा व्यवस्था में ऊपर से नीचे तक बंटता है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि यह सब कुछ सरकारी संरक्षण में हो रहा है। धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग और चतरा में बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी हो रही है। और जब कोई ईमानदार अधिकारी इसे रोकने की कोशिश करता है, तो उसकी जान को खतरा हो जाता है।
NTPC अधिकारी की हत्या और कोयला माफिया का कनेक्शन : –
मार्च 2025 में हजारीबाग में NTPC के डीजीएम गौरव कुमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है जहां कोयले का अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है। मरांडी ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा हमला बोला और कहा कि मुख्यमंत्री के उकसावे भरे बयानों के बाद अपराधी और ज्यादा बेखौफ हो गए हैं।
एक दिन पहले रांची में एक कोयला व्यापारी पर जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। और अगले ही दिन एक होनहार युवा अधिकारी की जान चली गई। यह दिखाता है कि झारखंड में कोयला माफिया कितना ताकतवर हो चुका है।

झारखंड हाई कोर्ट का आदेश और CBI जांच : –
अक्टूबर 2024 में झारखंड हाई कोर्ट ने धनबाद कोयला घोटाले की CBI जांच का आदेश दिया। एक पत्रकार ने याचिका दायर की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक पुलिस अधिकारी कोयला माफिया के साथ मिलकर काम कर रहा है। जस्टिस संजय द्विवेदी की बेंच ने माना कि यह मामला इतना गंभीर है कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा ही इसकी जांच होनी चाहिए।
मरांडी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपत्तियों के बावजूद धनबाद में एक भ्रष्ट एसपी की पोस्टिंग की, जिसने अरबों रुपये के घोटाले की जमीन तैयार की। राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
पूर्व DGP अनुराग गुप्ता और गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का नेक्सस : –
नवंबर 2024 में मरांडी ने एक और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व DGP अनुराग गुप्ता और जेल में बंद गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के बीच गठजोड़ था। गुप्ता सरकारी सुरक्षा के तहत एक संगठित नेटवर्क चलाते थे जो कोयला, रेत और खनिज के अवैध व्यापार में शामिल था।
मरांडी ने बताया कि गुप्ता को सरकार ने CID और ACB दोनों का एक साथ चार्ज दिया था, जो नियमों के खिलाफ था। और जब पैसे का प्रवाह ऊपर तक पहुंचना बंद हुआ, तो गुप्ता को हटा दिया गया। यह सब बताता है कि यह सिर्फ एक-दो अधिकारियों की बदमाशी नहीं, बल्कि एक पूरा सिस्टम है जो इस अवैध कारोबार को चला रहा है।
ED की छापेमारी में 14 करोड़ की बरामदगी : –
नवंबर 2024 के आखिरी हफ्ते में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में कोयला माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। 40 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे गए और 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी और सोना बरामद किया गया। यह ऑपरेशन रांची और कोलकाता दोनों जोन की ED टीमों ने संयुक्त रूप से चलाया।
इस कार्रवाई से साफ हो गया कि कोयला माफिया कितना अमीर और ताकतवर हो चुका है। छापेमारी में मिली नकदी और सोना दिखाता है कि यह कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये का है।

रेत माफिया का भी आतंक : –
कोयले के अलावा झारखंड में रेत माफिया का भी आतंक है। नवंबर 2024 में गढ़वा जिले में रेत तस्करों ने BDO श्रवण कुमार को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की जब वे अवैध रेत खनन की जांच कर रहे थे। BDO और उनकी टीम किसी तरह बच गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मरांडी ने इस घटना पर कहा, “जब सरकारी अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जाए? BDO श्रवण कुमार की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? जब पुलिस ही माफिया और गुंडों के साथ खड़ी हो, तो लोगों को न्याय कौन देगा?”
1.36 लाख करोड़ रुपये की कोयला रॉयल्टी का विवाद : –
दिसंबर 2024 में एक और राजनीतिक बवाल खड़ा हुआ जब झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार पर 1.36 लाख करोड़ रुपये की कोयला रॉयल्टी बकाया होने का आरोप लगाया। मरांडी ने इस दावे को ‘बेबुनियाद और भ्रामक’ करार देते हुए सोरेन सरकार से पूछा कि यह बकाया किन सालों और किन योजनाओं का है?
मरांडी ने सवाल उठाया कि UPA शासन में और जब शिबू सोरेन कोयला मंत्री थे तब कितनी राशि वसूल की गई थी? उन्होंने कहा कि झारखंड का इतिहास भ्रष्टाचार से भरा हुआ है, इसलिए जनता पूरी पारदर्शिता के साथ सही दस्तावेज और तथ्य देखना चाहती है।
मधु कोडा का काला अध्याय : –
झारखंड में कोयला घोटाले की बात हो और मधु कोडा का जिक्र न हो, यह संभव नहीं। 2006 से 2008 तक मुख्यमंत्री रहे मधु कोडा पर आरोप है कि उन्होंने झारखंड में कोयला और लौह अयस्क खनन अनुबंध अवैध रूप से आवंटित कर करोड़ों की रिश्वत ली। अनुमान है कि कोडा और उनके सहयोगियों ने व्यवसायिक घरानों को खदानें आवंटित कर 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए।
2017 में दिल्ली की एक विशेष CBI अदालत ने कोडा को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई। हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस सजा पर रोक लगा दी। दिलचस्प बात यह है कि 2024 में कोडा की पत्नी गीता कोडा भाजपा में शामिल हो गईं।
ये भी पढ़े : – L B Singh Case Update: BCCL अधिकारियों के खिलाफ CBI को अनुमति से इनकार
आम आदमी पर क्या असर ?
यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं है। जब राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की इस तरह लूट होती है, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। कोयले की चोरी से राज्य सरकार को मिलने वाला रॉयल्टी का पैसा नहीं मिलता। यही पैसा स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और विकास के कामों में लगना चाहिए।
जब माफिया और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर करोड़ों की लूट करते हैं, तो राज्य का विकास रुक जाता है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। और सबसे बुरा यह है कि जो ईमानदार अधिकारी इस लूट को रोकने की कोशिश करते हैं, उनकी जान को खतरा हो जाता है।
अब आगे क्या होगा ?
बाबूलाल मरांडी ने NIA जांच की मांग की है और कहा है कि सभी दोषी अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
CBI और ED की जांच चल रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच उन बड़ी मछलियों तक पहुंच पाएगी जो इस पूरे नेटवर्क को चला रहे हैं? झारखंड की जनता अब जवाब चाहती है। वे जानना चाहते हैं कि आखिर कौन हैं वे लोग जिनके इशारे पर यह सब हो रहा है।
जब तक इस भ्रष्टाचार की जड़ों तक नहीं पहुंचा जाएगा, तब तक झारखंड का विकास अधूरा रहेगा और आम लोग पीड़ित होते रहेंगे।