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Blinkit-Swiggy की असली कमाई का राज: विज्ञापन से 3,500 करोड़ रुपये सालाना!

Blinkit-Swiggy की असली कमाई का राज: विज्ञापन से 3,500 करोड़ रुपये सालाना!

Blinkit-Swiggy की असली कमाई का राज: विज्ञापन से 3,500 करोड़ रुपये सालाना!

डिस्काउंट का खेल खत्म! अब भारत में रिटेल मीडिया की कमाई का असली राज है तेज डिलीवरी

कुछ साल पहले तक ई-कॉमर्स की दुनिया में डिस्काउंट ही राजा हुआ करता था। 50% की छूट, फ्लैश सेल, बंपर ऑफर – बस यही सब चलता था। लेकिन अब खेल पूरी तरह बदल गया है! भारत में रिटेल मीडिया बिज़नेस तेज़ी से बढ़ रहा है, और इसकी असली ताकत डिस्काउंट में नहीं, बल्कि फुलफिलमेंट यानी तेज़ डिलीवरी में छुपी है। आखिर ये नया ट्रेंड क्या है और कैसे बदल रहा है पूरे खेल को? आइए इस रोचक कहानी को समझते हैं।

रिटेल मीडिया क्या है और क्यों है खास ?

सबसे पहले समझते हैं कि ये रिटेल मीडिया आखिर है क्या चीज़। आसान भाषा में कहें तो जब आप Blinkit, Swiggy Instamart या Zepto जैसे ऐप खोलते हैं और आपको कुछ ब्रांड्स के प्रोडक्ट सबसे ऊपर या बीच में दिखाई देते हैं, वो रिटेल मीडिया एडवर्टाइज़िंग है।

पहले ये सब सिर्फ फेसबुक, गूगल या यूट्यूब पर ही होता था। लेकिन अब जो कंपनियां आपको सामान बेचती हैं, वही अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन भी दिखाने लगी हैं। और मज़े की बात ये है कि ये विज्ञापन बहुत ज़्यादा असरदार होते हैं, क्योंकि जब आप पहले से शॉपिंग मूड में होते हैं तभी ये विज्ञापन दिखते हैं।

2024 में भारत का रिटेल मीडिया नेटवर्क बाज़ार 1,502 मिलियन डॉलर यानी करीब 12,600 करोड़ रुपये का था। अब इसे सुनिए – 2030 तक ये बाज़ार 3,549.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 29,800 करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है! हर साल 16.5% की दर से बढ़ रहा है ये बिज़नेस।

क्विक कॉमर्स ने बदला पूरा खेल : – 

अब असली कहानी शुरू होती है। भारत में क्विक कॉमर्स यानी तेज़ डिलीवरी का धंधा पिछले कुछ सालों में आसमान छू रहा है। Blinkit, Swiggy Instamart और Zepto जैसी कंपनियां 10-30 मिनट में सामान पहुंचा रही हैं। 2024 में इस बाज़ार का आकार 6-7 बिलियन डॉलर था, और 2030 तक ये 10 बिलियन डॉलर तक पहुंचने वाला है।

लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इन क्विक कॉमर्स कंपनियों की सबसे बड़ी कमाई अब सिर्फ सामान बेचने से नहीं, बल्कि विज्ञापन से हो रही है! 2025 में इन प्लेटफॉर्म्स ने विज्ञापन से 3,000-3,500 करोड़ रुपये की वार्षिक आय (ARR) कमाई। और सबसे मज़ेदार बात – पिछले साल के मुकाबले एड रेट्स में 40-50% की बढ़ोतरी हुई है!

डिस्काउंट से फुलफिलमेंट तक का सफर : – 

याद है वो दिन जब हर ई-कॉमर्स साइट पर 70-80% तक की छूट मिलती थी? कंपनियां पैसा जला रही थीं सिर्फ ग्राहक लाने के लिए। लेकिन वो मॉडल टिकाऊ नहीं था। धीरे-धीरे कंपनियों को समझ आया कि डिस्काउंट देकर सिर्फ नुकसान ही होता है।

अब फोकस बदल गया है। अब सवाल ये नहीं है कि “सबसे सस्ता कौन?” बल्कि सवाल ये है कि “सबसे तेज़ कौन?” आज के शहरी ग्राहक, खासकर 18-34 साल की उम्र के लोग, 10-15 मिनट में सामान चाहते हैं। वो 50 रुपये की छूट के लिए 2 घंटे इंतज़ार नहीं करना चाहते।

Blinkit रोज़ाना लगभग 6 लाख ऑर्डर प्रोसेस करता है, Swiggy Instamart 5 लाख और Zepto 3 लाख। ये आंकड़े दिखाते हैं कि लोग तेज़ी को प्राथमिकता दे रहे हैं, न कि सिर्फ छूट को।

ब्रांड्स क्यों भाग रहे हैं क्विक कॉमर्स की तरफ ?

अब सोचिए आप एक FMCG कंपनी हैं। आपके पास दो विकल्प हैं – या तो फेसबुक पर विज्ञापन दो जहां लोग सिर्फ टाइमपास कर रहे हैं, या फिर Blinkit पर विज्ञापन दो जहां लोग पहले से खरीदारी के मूड में हैं।

जब कोई Blinkit खोलता है, तो उसका इरादा पहले से ही कुछ खरीदने का है। अब अगर ठीक उसी वक्त आपका प्रोडक्ट सबसे ऊपर दिखे, तो खरीदारी की संभावना बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। इसी को कहते हैं “high purchase intent” यानी खरीदारी की मजबूत मंशा।

इसीलिए ब्रांड्स भारी-भरकम पैसा लगा रहे हैं इन प्लेटफॉर्म्स पर। कोलगेट हो या नेस्ले, मैगी हो या लेज़, सब अपने प्रोडक्ट्स को टॉप पर दिखाने के लिए प्रीमियम चुका रहे हैं। क्योंकि यहां पैसा खर्च करने का मतलब है सीधा बिक्री में बढ़ोतरी।

Blinkit-Swiggy की असली कमाई का राज: विज्ञापन से 3,500 करोड़ रुपये सालाना!

डार्क स्टोर्स का कमाल : – 

अब सवाल उठता है कि ये 10-15 मिनट की डिलीवरी कैसे संभव है? इसका जवाब है “डार्क स्टोर्स”। ये छोटे-छोटे वेयरहाउस होते हैं जो शहर के अलग-अलग इलाकों में फैले होते हैं। इनमें कोई दुकान नहीं होती, सिर्फ स्टॉक रखा होता है जहां से तुरंत डिलीवरी निकाल दी जाती है।

2025 में भारत में करीब 1,290 डार्क स्टोर्स हैं। Swiggy Instamart के पास सबसे ज़्यादा – 500 डार्क स्टोर्स हैं, Blinkit के पास 450, और Zepto के पास 340। Blinkit ने 2026 तक 2,157 डार्क स्टोर्स का लक्ष्य रखा है।

इन डार्क स्टोर्स की वजह से कॉस्ट में 40% तक की बचत होती है पुराने तरीकों के मुकाबले। और सबसे बड़ी बात – ये जियोग्राफिकल मैपिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे 60% से ज़्यादा ऑर्डर 40 मिनट के अंदर डिलीवर हो जाते हैं।

आंकड़े जो चौंका देंगे

आइए कुछ दिलचस्प आंकड़ों पर नज़र डालें जो इस बदलाव को साफ़-साफ़ दिखाते हैं:

बाज़ार का आकार : Q4 FY25 में Blinkit का Gross Order Value (GOV) 9,421 करोड़ रुपये था, जो साल-दर-साल 134% की बढ़ोतरी है। कंपनी की तिमाही आय 1,709 करोड़ रुपये रही।

मार्केट शेयर : Blinkit के पास 45-46% मार्केट शेयर है, Swiggy Instamart के पास 25-27%, और Zepto के पास 21-29%। ये तीनों मिलकर पूरे बाज़ार का 95% हिस्सा कंट्रोल करते हैं।

यूज़र बेस : 2024 में भारत में 26.2 मिलियन क्विक कॉमर्स यूज़र्स थे। 2029 तक ये संख्या 60.6 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

विज्ञापन की कमाई : क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का विज्ञापन बिज़नेस एक साल में 5 गुना बढ़ा और 200 मिलियन डॉलर (करीब 1,700 करोड़ रुपये) के ARR तक पहुंच गया।

फुलफिलमेंट क्यों बना गेम चेंजर ?

अब समझते हैं कि आखिर फुलफिलमेंट यानी डिलीवरी क्षमता ने रिटेल मीडिया को इतना ताकतवर क्यों बना दिया।

पहली बात, *इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन*। जब आप किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन देखते हैं और 10 मिनट में वो आपके घर पहुंच जाता है, तो ये एक जादुई एक्सपीरियंस है। ये बात ब्रांड्स को पता है और इसी के लिए वो प्रीमियम देने को तैयार हैं।

दूसरी बात, *डेटा का खजाना*। ये प्लेटफॉर्म्स जानते हैं कि कौन क्या खरीदता है, किस समय खरीदता है, कितनी बार खरीदता है। ये फर्स्ट-पार्टी डेटा गोल्डमाइन है जो बहुत सटीक टार्गेटिंग की इजाज़त देता है।

तीसरी बात, *कंपटीशन का दबाव*। जब एक ब्रांड देखता है कि उसका कम्पटीटर टॉप पर दिख रहा है, तो उसे भी विज्ञापन देना ही पड़ता है। इससे एड रेट्स और ऊपर जाते हैं।

ग्राहकों के लिए क्या मायने रखता है ?

दिलचस्प बात ये है कि आज का शहरी ग्राहक, खासकर मिलेनियल्स और जेन-जेड, पूरी तरह बदल गया है। 2024 में ऑनलाइन शॉपर्स का 40% हिस्सा जेन-जेड का है। इनकी प्राथमिकताएं बिल्कुल अलग हैं।

ये लोग एक साथ 5 प्लेटफॉर्म्स पर शॉप करते हैं। इन्हें नए ब्रांड्स एक्सप्लोर करना पसंद है। और सबसे बड़ी बात – ये Instagram reels और YouTube shorts से प्रोडक्ट्स डिस्कवर करते हैं, गूगल सर्च से नहीं।

UPI का इस्तेमाल 90% से ज़्यादा है इस उम्र के लोगों में। तुरंत पेमेंट, तुरंत डिलीवरी – बस यही चाहिए इन्हें। डिस्काउंट? हां, अच्छा है, लेकिन ज़रूरी नहीं अगर डिलीवरी तेज़ हो।

बाज़ार में क्या-क्या बदल रहा है ?

भारत का ई-कॉमर्स बाज़ार 2024 में 123 बिलियन डॉलर का था, और 2030 तक ये 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचने वाला है। इस विशाल बाज़ार में क्विक कॉमर्स अब 15% हिस्सेदारी की ओर बढ़ रहा है।

डिजिटल एडवर्टाइज़िंग भी तेज़ी से बढ़ रहा है। 2024 में डिजिटल मीडिया ने टीवी को पीछे छोड़ दिया और सबसे बड़ा एडवर्टाइज़िंग सेगमेंट बन गया। डिजिटल एड स्पेंड 700 बिलियन रुपये (17% ग्रोथ) तक पहुंच गया।

लेकिन इस डिजिटल एड स्पेंड में भी रिटेल मीडिया की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ रही है। जहां पहले गूगल और मेटा का दबदबा था, वहां अब Amazon, Flipkart, Blinkit, Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स भी अपनी जगह बना रहे हैं।

चुनौतियां भी हैं कम नहीं : –

लेकिन ये सफर इतना आसान भी नहीं है। कई चुनौतियां हैं जिनसे इन कंपनियों को जूझना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती है लॉजिस्टिक्स की कॉस्ट। 10-15 मिनट में डिलीवरी करना बहुत महंगा पड़ता है। डार्क स्टोर्स का किराया, डिलीवरी पार्टनर्स की सैलरी, इन्वेंटरी मैनेजमेंट – सब कुछ पैसा मांगता है।

दूसरी चुनौती है प्रॉफिटेबिलिटी। Blinkit ने FY24 में EBITDA ब्रेकईवन हासिल किया, लेकिन अभी भी नेट प्रॉफिट की राह दूर है। Zepto और Instamart को 2025-26 तक प्रॉफिटेबल होने का लक्ष्य है।

तीसरी चुनौती है कम्पटीशन। अब Amazon और Flipkart भी क्विक कॉमर्स में घुस रहे हैं। Flipkart Minutes और Amazon Tez जल्द ही लॉन्च होने वाले हैं। जितनी कम्पटीशन बढ़ेगी, उतना ही मुश्किल होगा टिके रहना।

Blinkit-Swiggy की असली कमाई का राज: विज्ञापन से 3,500 करोड़ रुपये सालाना!

भविष्य में क्या होगा ?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में रिटेल मीडिया और भी बड़ा होने वाला है। ग्लोबल लेवल पर 2030 तक रिटेल मीडिया कुल एडवर्टाइज़िंग रेवेन्यू का 20% हिस्सा बन जाएगा।

भारत में भी यही ट्रेंड दिखेगा। लेकिन जो कंपनियां जीतेंगी, वो वही होंगी जो *फुलफिलमेंट में मास्टर* होंगी। सिर्फ विज्ञापन दिखाना काफी नहीं है – उस प्रोडक्ट को तुरंत ग्राहक तक पहुंचाना भी ज़रूरी है।

AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल और बढ़ेगा। प्लेटफॉर्म्स समझेंगे कि किस समय किस प्रोडक्ट की डिमांड होगी और उसी हिसाब से इन्वेंटरी रखेंगे। डिलीवरी टाइम और कम होगा – 10 मिनट से 5 मिनट तक।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी क्विक कॉमर्स पहुंचेगा। 2020 के बाद से 60% नए ई-रिटेल ग्राहक इन्हीं छोटे शहरों से आ रहे हैं। जैसे-जैसे इन शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा, क्विक कॉमर्स वहां भी फैलेगा।

क्या सीखें इस पूरी कहानी से ?

भारत का रिटेल मीडिया बूम हमें कई महत्वपूर्ण सबक देता है।

पहला, ग्राहक की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। आज का ग्राहक सिर्फ सस्ता नहीं, बल्कि तेज़ और सुविधाजनक चाहता है।

दूसरा, डेटा नया तेल है। जिसके पास ग्राहकों का सही डेटा है, वही सटीक एडवर्टाइज़िंग कर सकता है।

तीसरा, फुलफिलमेंट असली ताकत है। विज्ञापन तो कोई भी दिखा सकता है, लेकिन 10 मिनट में डिलीवर करना – यही गेम चेंजर है।

चौथा, प्रॉफिटेबिलिटी की राह विज्ञापन से होकर जाती है। क्विक कॉमर्स में मार्जिन बहुत पतला है, लेकिन विज्ञापन का बिज़नेस हाई मार्जिन वाला है।

ये भी पढ़े : – क्लाउड किचन की क्रांति : अब डिलीवरी ऐप पर निर्भरता खत्म, जानें कैसे ? 

अंतिम बात : –

भारत का रिटेल मीडिया बाज़ार एक रोमांचक दौर से गुज़र रहा है। डिस्काउंट के दिन लद गए, अब फुलफिलमेंट का ज़माना है। जो कंपनियां तेज़ डिलीवर कर सकती हैं, वही ब्रांड्स के विज्ञापन पैसे अपनी तरफ खींच सकती हैं।

Blinkit, Swiggy Instamart, और Zepto ने दिखा दिया है कि अगर आप ग्राहक को 10-15 मिनट में सामान दे सकते हैं, तो आप सिर्फ एक डिलीवरी कंपनी नहीं, बल्कि एक ताकतवर एडवर्टाइज़िंग प्लेटफॉर्म बन जाते हैं।

2024 में 12,600 करोड़ रुपये का ये बाज़ार 2030 तक करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो जाएगा। और इस बढ़ोतरी की असली वजह होगी फुलफिलमेंट – तेज़, सटीक, और भरोसेमंद डिलीवरी।

तो अगली बार जब आप Blinkit या Swiggy Instamart पर कोई प्रोडक्ट सबसे ऊपर देखें, तो समझ जाइए कि उस ब्रांड ने सिर्फ विज्ञापन के पैसे नहीं, बल्कि तेज़ डिलीवरी की ताकत में भरोसा किया है। क्योंकि आज की डिजिटल दुनिया में जीतता वही है जो सबसे तेज़ है, न कि सबसे सस्ता!

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