51 करोड़ मतदाताओं के लिए बड़ी प्रक्रिया: 12 राज्यों/संघशासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) आज से

देश में एक बड़ी प्रक्रिया शुरू हो रही है: Special Intensive Revision (SIR) — यानी मतदाता सूची का एक बहुत विस्तृत, घर-घर वाला पुनरीक्षण। शुरू होने की तारीख है 4 नवंबर 2025। और यह सिर्फ किसी एक राज्य में नहीं बल्कि 12 राज्यों और संघशासित प्रदेशों (UTs) में एक साथ चलने वाला है।
मुझे लगा कि यह सिर्फ एक सरकारी काम नहीं है, यह हमारे-आपके रोज-मर्रा के वोटर कार्ड, नाम, पता — सब कुछ बदल सकता है। तो चलिए, हम इसे आसान भाषा में समझते हैं।

यह क्या है — SIR का मतलब

“SIR” यानी Special Intensive Revision, एक ऐसा कदम है जो Election Commission of India (ECI) ले रही है ताकि मतदाता सूची सही, अप-टू-डेट और पूरी तरह वैध हो।

इस प्रक्रिया में शामिल है : – 

  • उन लोगों को जो अब तक सूची में नहीं थे, उन्हें शामिल करना।
  • उन प्रविष्टियों को हटाना जो अब वैध नहीं हैं—जैसे मृत व्यक्ति, एक से अधिक स्थान पर पंजीकरण, बाहर चले गए लोग।
  • पुराने पते, नाम, चित्र आदि में सुधार करना ताकि वोटर सूची में गलती न हो।

कब कहाँ और कैसे — इस बार की प्रक्रिया

  • शुरुआत : 4 नवंबर 2025 से।
  • कितने राज्यों/यूटी में : 12 (यहाँ बताई गई सूची: Andaman and Nicobar Islands, Lakshadweep, Chhattisgarh, Goa, Gujarat, Kerala, Madhya Pradesh, Puducherry, Rajasthan, Tamil Nadu, Uttar Pradesh, West Bengal।
  • कितने मतदाता : करीब 51 करोड़ (51 किसी भी रूप में) मतदाताओं की सूची इस चरण में आएगी।
  • समय-रेखा : इस फेज की शुरूआत 4 नवंबर से, ड्राफ्ट रोल निकलेंगे 9 दिसंबर 2025 तक, फिर दावों-आपत्तियों का दौर, और अंतिम सूची करीब 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।

 

मेरे इलाके में क्या होगा ? – घर-घर जाना

मान लीजिए आप पटना में या शहर के किसी हिस्से में रहते हैं — तो क्या होगा ?

  • आपके मोहल्ले में एक या उससे अधिक Booth Level Officer (BLO) आएगा, जो आपके घर तक एंट्री करेगा।
  • वो एक पूर्व-भरी हुई “एन्‍युमरेशन फॉर्म” लेकर आएगा, जिसमें आपका नाम, वोटर आईडी नंबर (यदि पहले से है), पता-व्यवस्था जैसी बातें होंगी। आपको उसे चेक करना है, कुछ सही करना है तो करना है।
  • यदि आपने नया पता बनाया है, हाल ही में स्थान बदला है, या अगले साल आपका 18वाँ जन्मदिन हो रहा है (1 जनवरी 2026 तक) – तो आपको नए विवरण के लिए फॉर्म 6 या अन्य फॉर्म भरने होंगे।
  • अगर आप नहीं मिले, तो BLOs कम-से-कम तीन बार कोशिश करेंगे आपके घर पर आने की — ताकि कोई छूटे नहीं।

क्यों इतनी जोर-शोर से? — इसका महत्व

  • लोकतंत्र में हर वोटर का साथ चाहिए — अगर सूची पुरानी हो गई हो, उसमें ढेर सी गलतियाँ हों, तो वोट डालने का काम प्रभावित हो सकता है। SIR उस दिशा में कदम है।
  • भारत में बहुत लोग होते हैं जो निकाल दिए जाते हैं या जिनका नाम गलती से नहीं होता — इस प्रक्रिया से उन्हें शामिल करने का मौका मिलता है।
  • सूची में डुप्लिकेट नाम, मृत लोगों के नाम, या किसी एक स्थान पर दर्ज नाम दो बार होने जैसी समस्याएँ हैं जिनसे निपटने की जरूरत है।

 

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कुछ बातें जिनका ध्यान रखें

  • अगर ब्लो आएँ तो पहचान मांगें: BLO का पहचान-कार्ड दिखाएँगा। अगर आप नहीं मिले हैं तो फॉर्म भरने का काम ऑनलाइन भी हो सकता है।
  • किसी भी समय किसी से पैसे नहीं मांगे जाएंगे इस काम के लिए — यह सरकारी प्रक्रिया है।
  • अपने दस्तावेज (आधार, वोटर आईडी, पता-सिद्ध) तैयार रखें। खासकर यदि आपने अभी हाल ही में पते बदले हों या नाम में बदलाव हो।
  • यदि आपका नाम है लेकिन आपने कभी वोट नहीं किया, तो यह मौका है अपनी सूची सही कराने का।
  • यदि आपकी कोई चिन्ता है कि नाम छुट गया है, या गलत पंजीकृत है, तो आप दावों-आपत्तियों की अवधि में शिकायत कर सकते हैं।
51 करोड़ मतदाताओं के लिए बड़ी प्रक्रिया: 12 राज्यों/संघशासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) आज से
51 करोड़ मतदाताओं के लिए बड़ी प्रक्रिया: 12 राज्यों/संघशासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) आज से ( image source – sabrang india )

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मेरे हिसाब से इससे क्या-क्या बदल सकता है ?

  • यदि आपने पिछले कुछ साल में स्थान बदला हो, तो अब आपका वोटर कार्ड पुराने पते पर हो सकता है — इस प्रक्रिया में वह सही हो जाएगा।
  • नए 18 साल के होने वाले मतदाता अर्थात आज के 17-18 साल के लड़के-लड़कियाँ जिनका नाम अभी तक नहीं हुआ हो, उन्हें मौका मिलेगा अपने नाम कराने का।
  • चुनाव के समय आपको बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है क्योंकि पुलिस स्टेशन से लेकर मतदान केंद्र तक सुधार होंगे जब सूची साफ होगी।
  • लेकिन ध्यान दें — प्रक्रिया में अगर आप सक्रिय नहीं होंगे तो नाम बने-ना बने रहने का जोखिम है। इसलिए “देखा है या नहीं” यह जानना जरूरी है।

 

तो भाई-बहन, यह सिर्फ एक जानकारी नहीं बल्कि आपके वोट, आपकी हिस्सेदारी लोकतंत्र में की सीधी बात है। 4 नवंबर से शुरू हो रही यह SIR प्रक्रिया हमें याद दिलाती है कि “वोटर होने का मतलब सिर्फ नाम होने से नहीं, सही नाम होने से है”। यदि आप तैयार रहें — अपना नाम सही है, पता सही है, और जो बदलाव चाहिए वो कराएं — तो आने वाले चुनाव में आपका हिसा बेहतर तरीके से गिना जाएगा।

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