भारत ने हाल ही में अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। बंग्लादेश की सीमा के पास, खासकर सिलिगुड़ी कॉरिडोर या जिसे हम “चिकन नेक” के नाम से जानते हैं, पर तीन नए सैन्य गढ़ स्थापित किए गए हैं। इस ब्लॉग में एक आम आदमी की जुबानी, सरल भाषा में यह समझेंगे कि आखिर चिकन नेक क्या है, भारत ने सुरक्षा क्यों बढ़ाई है, और इसका हमारे देश के लिए क्या महत्व है।
चिकन नेक क्या है ? : –
चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ने वाला एक बहुत संकरा रास्ता है। इसकी चौड़ाई लगभग 20 से 22 किलोमीटर है, जिसके दोनों ओर नेपाल, बांग्लादेश और भूटान की सीमाएं हैं। इस जगह से होकर 8 पूर्वोत्तर राज्य मुख्य भारत से जुड़े हैं। इसे चिकन नेक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बहुत ही नाजुक, संकरा और रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील गलियारा है।
तीन नए गढ़ कहाँ बनाए गए ? : –
भारत ने इस इलाके में तीन खास जगहों — असम के बमूनी, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा — पर तीन नए सैन्य गढ़ स्थापित किए हैं। ये गढ़ सीमा की निगरानी, सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए बनाए गए हैं। इन जगहों का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि ये इलाके बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब हैं और भारतीय सुरक्षा दल को ताकतवर बनाते हैं।
क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा ? : –
पिछले कुछ महीने में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सैन्य स्तर पर बढ़ते संबंधों और सहयोग को लेकर भारत में चिंता का माहौल है। हाल ही में पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बांग्लादेश का दौरा किया है, जो रणनीतिक रूप से भारत के लिए चिंता की बात है। इन बढ़ते रिश्तों ने भारत को सतर्क कर दिया है, खासकर जब बात सिलीगुड़ी कॉरिडोर की हो जो देश की पूर्वोत्तर कड़ी है।

चिकन नेक क्यों है इतना महत्वपूर्ण ? : –
चिकन नेक का महत्व इसलिए भी है क्योंकि अगर यह पटरी किसी वजह से बंद हो जाए, तो भारत के पूर्वोत्तर के 4 करोड़ से ज्यादा लोग देश के बाकी हिस्सों से कट सकते हैं। इससे न केवल सैन्य आपूर्ति प्रभावित होगी बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी होगा। इसलिए इसका संरक्षण भारत की सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा है।
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आम आदमी के लिए इसका मतलब : –
जब भारत अपनी सीमा पर इतना कड़ा सुरक्षा कवच बिछाता है, तो इसका मतलब यह होता है कि हमारे देश की अखंडता और नागरिकों की रक्षा को उच्चतम प्राथमिकता दी जा रही है। इस नए सुरक्षा इंतजाम से यदि कोई भी खतरा पैदा होने की कोशिश करेगा तो भारत उसे तुरंत बढ़त में रोक सकेगा। यह कदम हमारे पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को सुरक्षित रखने का सुनहरा मौका है।
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आगे की तैयारी : –
सिर्फ गढ़ बनाए गए ही नहीं, बल्कि इलाके में निगरानी प्रणालियों, सड़क नेटवर्क और अत्याधुनिक उपकरणों की भी तैनाती की जा रही है। सेना और सीमा सुरक्षा बल की ताकत को बढ़ाकर भारत ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि किसी भी तरह की स्थिति में साल भर 24×7 सतर्कता बनी रहे।