Karnataka Congress Crisis : 10 MLA दिल्ली पहुंचे, क्या डीके शिवकुमार बनेंगे अगले सीएम ?

कर्नाटक की ‘कुर्सी’ का खेल: क्या 10 विधायकों की ‘दिल्ली दौड़’ डीके शिवकुमार को सीएम बना पाएगी ?

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर वही सवाल खड़ा हो गया है जिसका डर पिछले ढाई साल से सबको था। क्या सीएम की कुर्सी बदलने वाली है? अगर आप पिछले दो-तीन दिनों की खबरें देख रहे हैं, तो आपको पता होगा कि बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक एक अलग ही ड्रामा चल रहा है।

मामला एकदम फिल्मी है—वादे, कसमें, और अब “हक” की लड़ाई। खबर आई है कि डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के खेमे के करीब 10 विधायक और कुछ मंत्री अचानक दिल्ली पहुंच गए हैं। उनका बस एक ही कहना है—”वादा याद करो, अब बारी डीके की है!”

आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर चल क्या रहा है और क्या सिद्दारमैया की कुर्सी सच में खतरे में है ?

ढाई साल वाला ‘पैक्ट’ (समझौता) : सच या अफवा ?

आपको मई 2023 याद है? जब कांग्रेस ने कर्नाटक में बंपर जीत हासिल की थी। उस वक्त भी सीएम बनने के लिए सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के बीच रस्साकशी चली थी। तब खबरों के बाजार में एक बात बहुत उड़ी थी—”ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला”।

कहा गया था कि पहले ढाई साल सिद्दारमैया सीएम रहेंगे और बाकी के ढाई साल डीके शिवकुमार। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने कभी खुलकर इस पर मुहर नहीं लगाई, लेकिन अंदरखाने यह बात सबको पता थी।

अब नवंबर 2025 आ गया है। सिद्दारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं। बस, इसी बात को पकड़कर डीके शिवकुमार के समर्थक अब अपना ‘वचन’ पूरा करने की मांग कर रहे हैं।

10 विधायकों की ‘दिल्ली दौड़’ का मतलब क्या है ?

राजनीति में कुछ भी बेवजह नहीं होता। 10 से ज्यादा विधायकों का अचानक दिल्ली जाना और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने का समय मांगना, यह कोई ‘तीर्थयात्रा’ तो है नहीं।

इन विधायकों (जिनमें मंत्री चलूरायस्वामी और विधायक इकबाल हुसैन जैसे नाम शामिल हैं) का कहना है कि डीके शिवकुमार ने 2023 में पार्टी के लिए त्याग किया था। अब जब आधा समय बीत चुका है, तो उन्हें उनका इनाम (सीएम की कुर्सी) मिलना चाहिए।
मजे की बात यह है कि डीके शिवकुमार मीडिया के सामने बिल्कुल अनजान बन रहे हैं। जब उनसे पूछा गया, तो बोले— “मुझे कुछ नहीं पता, मेरी तबीयत ठीक नहीं है, मैं तो घर पर हूं।” इसे कहते हैं राजनीति! सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने रहना।

सिद्दारमैया क्या कह रहे हैं ?

दूसरी तरफ, हमारे “तगड़े” सीएम सिद्दारमैया हैं। वो साफ कह चुके हैं कि “मैं कहीं नहीं जा रहा।” उन्होंने इस पूरी चर्चा को “मीडिया का बनाया हुआ ड्रामा” बता दिया है। उनका कहना है कि उन्हें जनता ने 5 साल के लिए चुना है और वो अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
लेकिन, जिस तरह से उन्होंने अपना मैसूर का दौरा रद्द किया और बेंगलुरु वापस लौटे, उससे तो यही लगता है कि “दाल में कुछ काला” जरूर है।

Karnataka Congress Crisis : 10 MLA दिल्ली पहुंचे, क्या डीके शिवकुमार बनेंगे अगले सीएम ?
Karnataka Congress Crisis : 10 MLA दिल्ली पहुंचे, क्या डीके शिवकुमार बनेंगे अगले सीएम ? ( image – india today )

अब आगे क्या होगा ? हाईकमान के लिए धर्मसंकट

कांग्रेस आलाकमान (राहुल गांधी और खड़गे जी) के लिए यह स्थिति ‘इधर कुआं, उधर खाई’ वाली है।
अगर सिद्दारमैया को हटाते हैं: तो अहिंदा (AHINDA) वोट बैंक नाराज हो सकता है, क्योंकि सिद्दारमैया पिछड़ों के बड़े नेता हैं।
अगर डीके को नहीं बनाते हैं: तो वोकलिगा समुदाय और डीके शिवकुमार (जो पार्टी के संकटमोचन माने जाते हैं) नाराज हो सकते हैं। और डीके की नाराजगी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है।

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जनता सिर्फ तमाशा देख रही है

हम आम जनता का क्या ? हमें तो बस स्थिर सरकार चाहिए जो काम करे। लेकिन फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बहुत उथल-पुथल वाले होने वाले हैं।

क्या “ऑपरेशन डीके” सफल होगा या सिद्दारमैया अपनी जादूगरी से कुर्सी बचा ले जाएंगे ? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। तब तक, आप और हम बस न्यूज़ चैनल लगाकर बैठते हैं और इस ‘किस्सा कुर्सी का’ का मजा लेते हैं!

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