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SEBI से मंजूरी मिलने के बाद Shiprocket का IPO क्यों बन रहा है चर्चा का विषय

SEBI से मंजूरी मिलने के बाद Shiprocket का IPO क्यों बन रहा है चर्चा का विषय

SEBI से मंजूरी मिलने के बाद Shiprocket का IPO क्यों बन रहा है चर्चा का विषय(image source - product monk)

Shiprocket को SEBI से मंजूरी मिल गई है, और अब वह अपने 2,500 करोड़ रूपए के आईपीओ (इन्शियल पब्लिक ऑफरिंग) के लिए पूरी तरह तैयार है। यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस खबर को समझना बहुत जरूरी है कि क्यों यह इतना खास है, और कैसे यह कंपनी भारत की डिजिटल लॉजिस्टिक्स को मजबूत करेगी।

Shiprocket का यह आईपीओ क्यों खास है ? : – Shiprocket, जो Zomato और Temasek जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा समर्थित है, ने अपने आईपीओ के लिए मई 2025 में ही आवेदन किया था। अब, SEBI (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने उसकी अनुमति दे दी है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने शेयर बाजार में लिस्ट कर सकती है। इस आईपीओ का कुल साइज लगभग 2400 से 2500 करोड़ रुपये माना जा रहा है, जिसमें से करीब आधा हिस्सा कंपनी अपने व्यापार को बढ़ाने, नई सेवाएं शुरू करने और टेक्नोलॉजी अपडेट करने में लगाएगी।

क्यों कर रहा है Shiprocket इतना बड़ा कदम ? : –

इस कंपनी का मकसद है अपने डिलीवरियों और ई-कॉमर्स कारोबार को पूरी तरह से डिजिटल तरीके से आगे बढ़ाना। कंपनी का फोकस है छोटे और बड़े ऑनलाइन विक्रेताओं की मदद करना। अब जब इनके पास इतना पैसा आएगा, तो वे अपने लॉजिस्टिक्स, अपने प्लेटफ़ॉर्म की तकनीक, और नई सेवाओं में निवेश करेंगे। इससे न सिर्फ इनकी स्पीड और क्वालिटी बेहतर होगी, बल्कि पूरे देश की ई-कॉमर्स इंडस्ट्री को भी फायदा पहुंचेगा।

Shiprocket क्या है : ? –

Shiprocket एक भारतीय कंपनी है, जो ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाएं प्रदान करती है। इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी और तब से यह कंपनी तेज़ी से अपने कदम बढ़ा रही है। Shiprocket का मकसद है ऑनलाइन व्यापार को आसान बनाना ताकि छोटे या बड़े सभी विक्रेता अपने सामान को देश के हर कोने तक आसानी से पहुंचा सकें। इसके लिए यह कंपनी अपने प्लेटफॉर्म के जरिये 25 से ज्यादा कूरियर कंपनियों के साथ जुड़ी है, जैसे FedEx, Delhivery, Blue Dart आदि, ताकि ग्राहकों को सबसे सस्ती और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें। Shiprocket की सेवाएं लगभग 24,000 से ज्यादा पिन कोड क्षेत्र तक फैली हुई हैं और यह कंपनी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग भी करती है।

Shiprocket का बिजनेस मॉडल और तकनीक : –

Shiprocket सिर्फ कूरियर कंपनी नहीं है, बल्कि एक टैक्नोलॉजी-ड्रिवन प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल करके डिलीवरी, स्टॉक मैनेजमेंट और रूट ऑप्टिमाइजेशन करता है। इस तकनीक की मदद से लागत कम होती है और डिलीवरी जल्दी होती है। कंपनी के पास देश भर में लगभग 45 गोदाम (warehouses) भी हैं, जिससे सामान की उपलब्धता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होती है।

Shiprocket के प्लेटफॉर्म पर विक्रेता अपने ऑर्डर मैनेज कर सकते हैं, शिपिंग लेबल प्रिंट कर सकते हैं, कूरियर कंपनी चुन सकते हैं और रियल टाइम में डिलीवरी ट्रैक कर सकते हैं। इसका मतलब है ऑनलाइन व्यापारियों को अपनी डिलीवरी की पूरी जानकारी मिलती रहती है।

SEBI से मंजूरी मिलने के बाद Shiprocket का IPO क्यों बन रहा है चर्चा का विषय

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अधिकारी कहते हैं क्या ? : –

SEBI की मंजूरी मिलते ही, Shiprocket का शेयर बाज़ार में उतरना तय हो गया है। इस फ़ैसले के बाद, कंपनी अपने नए निवेशकों को अपनी योजना के बारे में विस्तार से बताएगी। यह भी देखा गया है कि मुख्य निवेशक जैसे Temasek और Zomato अभी अपने हिस्से नहीं बेच रहे हैं, बल्कि कंपनी का पूरा फोकस अपने व्यापार को मजबूत करने पर है। इसके साथ ही, कंपनी ने ये भी बताया है कि अपने नए फंड से वे अपने नए कारोबार जैसे कि कस्टम्स शिपिंग, मार्केटिंग सर्विसेज, व फुलफिलमेंट बिजनेस को बढ़ावा देंगे।

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यह खबर आम आदमी के लिए क्यों जरूरी है ? : –

यह खबर हमारे देश के उस बड़े बदलाव को दिखाती है, जब छोटी-छोटी कंपनियां भी बहुत बड़ी और मजबूत बन रही हैं। इससे न केवल रोजगार और नए मौके बनेंगे बल्कि हमारी देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। आज का युवा जो डिजिटल वर्ल्ड में है, उसके लिए यह भी समझना जरूरी है कि ब्लॉकचेन, लॉजिस्टिक्स और ई-कामर्स जैसी फील्ड्स में भारत कब-कब बड़े कदम उठा रहा है।

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