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गूगल में अब 5 नोबेल प्राइज विजेता: सुंदर पिचाई का ऐलान

गूगल में अब 5 नोबेल प्राइज विजेता: सुंदर पिचाई का ऐलान

गूगल में अब 5 नोबेल प्राइज विजेता: सुंदर पिचाई का ऐलान(jagran josh)

भैया, गूगल का नाम तो हम सबने सुन ही रखा है। जिस सवाल का जवाब चाहिए, वह बस ‘गूगल बाबू’ से पूछ लो, तुरंत मिल जाता है। पर एक दिन खबर आई कि गूगल में अब पाँच ऐसे लोग हैं, जिन्हें नोबेल प्राइज मिल चुका है। सोचिए, दुनिया की सबसे छोटी से बड़ी खोज को सम्मानित करने वाला इनाम, और गूगल के पास ऐसे पाँच दिमाग काम कर चुके हैं या कर रहे हैं।

ये बातें सीधी-साधी नहीं हैं। ज्यादा टेढ़ी-मेढ़ी भी नहीं। पर कहीं न कहीं आम आदमी को भी लगती हैं—वाह, गूगल कुछ तो कमाल करता होगा!

सुंदर पिचाई का ऐलान—गर्व की बातकुछ दिन पहले, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गूगल फैमिली में पाँच नोबेल प्राइज लाने वाले लोग हो गए हैं। साल 2025 के भौतिकी (फिजिक्स) नोबेल प्राइज के तीन विजेताओं में से एक हैं मिशेल डेवोरेट, जो गूगल के क्वांटम एआई लैब के चीफ साइंटिस्ट हैं, और जॉन मार्टिनिस जिन्होंने पहले गूगल के हार्डवेयर डिविजन को लीड किया था । पुराने समय के नोबेल प्राइजर्स की गिनती करें तो इन दोनों के साथ-साथ पहले के विजेताओं को जोड़ कर कुल पाँच हो जाते हैं।

सुनकर थोड़ा अजीब सा भी लगता है कि कोई टेक कंपनी, जिसमें हम-आप ईमेल, गूगल ड्राइव, सर्च जैसे रोजमर्रा के काम करते हैं, वहाँ इतनी रिसर्च और बड़ा काम हो रहा है कि वहाँ काम करने वाले लोगों को नोबेल मिल रहा है।

गूगल में अब 5 नोबेल प्राइज विजेता: सुंदर पिचाई का ऐलान(image source -india today hindi)

कौन-कौन हैं ये नोबेल विजेता गूगली : –

अब आप सोचेंगे कि आखिर ये कौन लोग हैं, तो चलिए थोड़ा सा जान लेते हैं कि पिछले कुछ सालों में गूगल की टीम या फैमिली से कौन-कौन लोग नोबेल जीत गए।

इनमें से कुछ अभी भी गूगल में हैं, तो कुछ पहले काम करके निकल गए, लेकिन इनका गूगल से साफ रिश्ता है।

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रिसर्च और आम जिंदगी पर असर

अब सोचिए कि जब ऐसे रिसर्चर किसी कंपनी में काम करें, तो वहां कोई छोटी-मोटी चीज़ नहीं, बल्कि वर्ल्ड-चेंजिंग इनोवेशन होनी तय है। गूगल के ‘क्वांटम कम्प्यूटिंग’ प्रोजेक्ट्स, एआई, डीपमाइंड—ये सब आम आदमी के काम आते-आते कुछ साल लग सकते हैं, मगर जिन खोजों के आधार पर नोबेल मिला, उनका असर सबकी जिंदगी में धीरे-धीरे दिखेगा।

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हम जब गूगल को “सर्च इंजन” समझते हैं, तब शायद वह “दुनिया बदलने वाली लैब” भी है—ये गुनगुनाना जरूरी है।

अगर सीधा-साधा आम आदमी ये खबर पढ़े, तो उसके मन में एक आस बंधती है—अगर मेहनत और दिमाग हो, तो भारत के सुंदर पिचाई हो या दुनिया के मिशेल डेवोरेट, सभी को अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिल सकता है। और हाँ, गूगल जैसी कंपनियाँ अब सिर्फ एप्लिकेशन और वेबसाइट ही नहीं बनतीं, साइंस की दुनियावी बुलंदियों पर भी दावत देती हैं।

आज हम-आप जो गूगल पर भरोसा करते हैं, उसके पीछे पाँच नोबेल विजेताओं की सोच और मेहनत छुपी है—यह बात भी याद रखें!

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का ये ऐलान हमें बताता है कि दुनिया बदलने के लिए सिर्फ अविष्कार या ऐप नहीं, बल्कि रिसर्च और मेहनत की भी असली कीमत होती है। गूगल जैसी कंपनियाँ जब अपने प्लेटफॉर्म पर नोबेल विजेताओं को जगह देती हैं, तो ये सच्चाई और भी पक्की हो जाती है।

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