सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को 90 दिनों में सारंडा जंगल को सेंचुरी घोषित करने का आदेश दिया है। आइए एक आम आदमी की भाषा में समझें कि ये फैसला क्या है और हमारे जंगल, आदिवासी और देश के लिए कितना अहम है।
सारंडा जंगल का फैसला : एक आम आदमी की नज़र से : –
कहानी की शुरुआत : –
हर कोई अपने इलाके के जंगल, पहाड़ और नदियों को लेकर इमोशनल होता है। झारखंड के लोगों के लिए सारंडा जंगल सिर्फ पेड़ों का झुरमुट नहीं है, ये उनकी जिंदगी, संस्कृति और रोज़मर्रा की ज़रूरत से जुड़ा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला किया, उसकी चर्चा गाँव-शहर सब जगह हो रही है। बात ऐसी है कि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को साफ कहा है — “तीन महीने मतलब 90 दिन के अंदर 31,468 हेक्टेयर का सारंडा जंगल ‘वन्य जीव अभ्यारण्य’ घोषित करो।” सरकार को अब कोर्ट का ये आदेश मानना ही पड़ेगा ।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है ? : –
सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ये आदेश 13 नवंबर, 2025 को दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार का वो आग्रह भी ठुकरा दिया जिसमें वो कम जंगल को सेंचुरी बनाना चाह रही थी — यानि सरकार चाहती थी कि सिर्फ 24,941 हेक्टेयर को अभ्यारण्य घोषित किया जाए, कोर्ट ने कहा, नहीं! पूरे 31,468.25 हेक्टेयर ही सेंचुरी बनेगा।
जंगल की खासियत : –
झारखंड का सारंडा जंगल एशिया के सबसे बड़े और पुराने साल (Sal) पेड़ों का घर है। यहाँ हाथी, चार सिंघ वाले हिरण, साल फॉरेस्ट टॉर्टॉयज (जो बेहद दुर्लभ है), और बहुत सारी जंगली प्रजातियाँ रहती हैं। जंगल की जैवविविधता देश ही नहीं, दुनिया के लिए खास है।

क्यों हुआ ये फैसला ? : –
दरअसल, पिछले कई सालों से यहाँ माइनिंग और बाहर वालों की घुसपैठ बढ़ गई थी। पुराने आदिवासी यहाँ जंगल की हिफाज़त करते आए हैं, लेकिन बाहरी लोग जिससे जंगल की कटाई, अतिक्रमण, और खनन बढ़ गया। कई बार सरकार ने कोर्ट में कहा कि वह सेंचुरी बनाएगी, लेकिन बाद में रुक गई, कभी प्लान बदलती रही। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ ली बात, “राज्य सरकार कोर्ट को झूठा बहाना बना रही है, अब डेडलाइन तय करो और जंगल घोषित करो।”
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आदिवासी और वनवासियों की चिंता : –
सबसे बड़ी बात, जिन आदिवासियों और वनवासियों की ज़िंदगी इस जंगल से जुड़ी है, उनके हक पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया कि ‘वन अधिकार अधिनियम’ के तहत उनकी जमीन, घर, रोजगार, स्कूल, रेललाइन, अस्पताल — सब चलते रहेंगे। सेंचुरी बनने का मतलब उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी में कोई कटौती नहीं होगी. सरकार को गांव में जागरूकता फैलानी होगी ताकि लोग डर न जाएं।
क्या बदलेगा ? : –
- पूरे जंगल की सुरक्षा बढ़ जाएगी।
- खनन और जंगल से छेड़छाड़ पर पूरी तरह रोक लगेगी।
- जंगली जानवरों, पेड़ों और पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी।
- आदिवासी सहुलियत बरकरार रहेगी।
सारंडा जंगल के भविष्य की उम्मीद : –
अब तीन महीनों के अंदर झारखंड सरकार को अधिसूचना जारी करनी होगी। मतलब, गाँव वालों को, जंगल से जुड़े आदिवासियों को, और उन सबको जो इस इलाके से जुड़े हैं, उम्मीद है कि जंगल की अच्छाई बची रहेगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद सबकी निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार क्या करती है।