भारत की प्रमुख एजुकेशन टेक कंपनी UpGrad और Unacademy के बीच जो डील हो रही है, वह सिर्फ कक्षा या पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि अकसर इसका असर उनके बैलेंस शीट पर ज़्यादा होता है। इस ब्लॉग में एक आम आदमी की भाषा में समझाएंगे कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और इस डील का असली मतलब क्या है।
UpGrad और Unacademy की डील क्यों चर्चा में ? : –
हाल ही में खबर आई है कि UpGrad, जो की भारत की बड़ी एजुकेशन टेक कंपनी है, Unacademy के टेस्ट-प्रेप बिजनेस को लगभग 300-400 मिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। इस डील में Unacademy की लैंग्वेज लर्निंग ऐप AirLearn को अलग कंपनी बनाया जाएगा और UpGrad सिर्फ उस टेस्ट-प्रेप बिजनेस को खरीदेगा जिसमें ऑफलाइन सेंटर भी शामिल हैं।
डील सिर्फ क्लासरूम से ज्यादा बैलेंस शीट के लिए ? : –
Unacademy की वैल्यूएशन 2021 में करीब 3.44 बिलियन डॉलर थी, जो अब 300-400 मिलियन डॉलर तक गिर गई है। भारी घाटा घाटे और खर्चों को कम करने के लिए Unacademy ने अपने नकदी जलाने (कैश बर्न) को करीब 100 करोड़ रुपये तक घटाया है, जबकि अब उनके पास लगभग 1200 करोड़ रुपये कैश रिज़र्व में हैं। इसे देखकर कहा जा सकता है कि UpGrad का मुख्य मकसद Unacademy के टेस्ट-प्रेप बिजनेस को खरीद कर उसकी ताकतवर बैलेंस शीट और कैश रिज़र्व को अपने फंड्स और निवेश बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना है।

क्यों जरूरी है यह डील ? : –
पिछले कुछ सालों में भारत के एजुकेशन टेक सेक्टर में जबरदस्त उतार-चढ़ाव आया है। कोविड महामारी में ऑनलाइन लर्निंग का बढ़ता चलन और फिर बाजार में कम्पटीशन ने कई कंपनियों को घाटे में डाल दिया। अब ये फील्ड धीरे-धीरे स्थिर हो रही है और कंपनियां एक दूसरे का फायदा उठाकर अपने पोर्टफोलियो को मजबूत कर रही हैं।
Unacademy के पास ऑफलाइन सेंटर हैं और टेस्ट-प्रेप का खास हिस्सा है, जो UpGrad के ग्रेजुएशन, प्रोफेशनल स्कूलिंग सेगमेंट को पूरा करता है। इस डील से UpGrad अपने कस्टमर बेस को बढ़ाएगा और K-12 से लेकर higher education तक की मजबूत पकड़ बनाएगा।
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आम आदमी की भाषा में इसका मतलब ? : –
जैसे कोई परिवार आर्थिक मुश्किलों में हो और एक बड़ी कंपनी उससे उसका कुछ धंधा खरीदकर अपना व्यावसायिक विस्तार करे, ठीक ऐसा ही मंजर है UpGrad–Unacademy डील में। यह डील तकनीकी तौर पर शिक्षा की ज्यादा गुणवत्ता या नए क्लासरूम बनाने की बजाय एक बड़ी कंपनी के नकदी और संपत्तियों को जोड़ने की रणनीति है। यह कदम निवेशकों को भरोसा दिलाने और आने वाले समय में भविष्य के लिए स्थिरता बनाने के लिए उठाया जा रहा है।
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डील का बाजार पर असर : –
इस डील के दौरान यह साफ हो रहा है कि भारतीय एदटेक सेक्टर अभी भी कंज़ोलिडेशन (मर्जर) के दौर से गुजर रहा है। जहां कमजोर खिलाड़ी हट रहे हैं, वहीं मजबूत खिलाड़ी और वित्तीय आधार वाले संस्थान आगे बढ़ रहे हैं। इससे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा और नए निवेश आने की उम्मीद है।