जब HIV रक्त संक्रमण से मौत हो जाए: झारखंड को मरीजों की सुरक्षा की ज़रूरत –
झारखंड का गंभीर स्वास्थ्य संकट : – दोस्तों, हमारे देश में जब भी अस्पताल में इलाज के बारे में बात होती है तो उम्मीद होती है कि वहाँ हमारा इलाज सुरक्षित और भरोसेमंद होगा। लेकिन झारखंड से अब एक बहुत ही चिंताजनक और दिल दहला देने वाली खबर आई है। कुछ सरकारी अस्पतालों में खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के दौरान गंभीर लापरवाही के कारण कई बच्चों और मरीजों को HIV जैसे खतरनाक संक्रमण हो गया है। इस घटना ने न केवल मरीजों के परिवारों के दिलों को तोड़ा है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की ताकत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या हुआ था झारखंड में ? : –
2025 में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को खतरे में डालने वाली ब्लड ट्रांसफ्यूजन दी गई। इन बच्चों को संक्रमित खून चढ़ा दिया गया, जिससे वे HIV पॉजिटिव पाए गए। यह खबर सुनकर पूरे राज्य में सनसनी फैल गई।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ कि अस्पताल के ब्लड बैंक बिना वैध लाइसेंस के काम कर रहा था और सभी जरूरी जांच-पड़ताल ठीक से नहीं की जा रही थी। कई लोगों ने बताया कि खून जांच में सख्ती नहीं थी, नतीजतन HIV संक्रमित खून मरीजों तक पहुंच गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस घटना को गंभीर माना और संबंधित कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया। साथ ही प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और संक्रमित बच्चों का मुफ्त इलाज करने का ऐलान किया गया।
खून की जांच और ब्लड बैंक की लापरवाही : –
ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुरक्षा के लिए हमारे देश में खास नियम हैं, जिसमें खून के हर यूनिट की जांच अनिवार्य होती है। लेकिन झारखंड के कई ब्लड बैंक में ये नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहे हैं। कुछ ब्लड बैंक पुराने उपकरणों और कम संसाधनों के कारण नई जांच तकनीक नहीं अपना पा रहे।
अक्सर, संक्रमण की पहचान ‘विंडो पीरियड’ के दौरान नहीं हो पाती, यानी जब रक्तदाता हाल ही में संक्रमित हुआ हो, तब मानक जांच में वह वायरस दिख नहीं पाता। इस कारण असुरक्षित खून पहुंचता है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।
मरीजों पर असर और सरकारी कदम : –
थैलेसीमिया जैसे मरीजों को नियमित समय पर खून चढ़ाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में संक्रमित खून से उनका स्वास्थ्य और भी खराब हो गया। सरकार ने प्रभावित बच्चों के परिवारों को दो लाख रुपये की सहायता देने और पूर्ण इलाज का पूरा खर्च उठाने का भरोसा दिया है।
साथ ही, राज्य सरकार ने सभी ब्लड बैंकों का ऑडिट करवाया है और राज्य के 24 जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और कड़े निर्देश जारी किए हैं।
ये भी पढ़े : – सुप्रीम कोर्ट ने SAIL की माइनिंग पर भी लगाई रोक: झारखंड के जंगलों के लिए राहत
आम आदमी की सोच और सुरक्षा की जरूरत : –
एक आम इंसान के तौर पर सोचिए, जब हम अस्पताल जाते हैं तो हमारी उम्मीद होती है कि डॉक्टर और अस्पताल हमें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। लेकिन झारखंड में हुई यह घटना दर्दनाक है क्योंकि मासूम बच्चों की जान गवां दी गई। इससे पता चलता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार कितनी ज़रूरी है।
मरीज और उनके परिवार डर और चिंता में रहते हैं कि कहीं उनके साथ भी ऐसा न हो। इसलिए अस्पतालों में खून की गुणवत्ता और सख्त जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ये भी पढ़े : – श्रेया की जीत, सिस्टम की हार: चीन में ब्रॉन्ज मेडल के बाद भी नौकरी क्यों नहीं?
क्या समाधान है ? : –
यह वक्त है कि झारखंड सरकार और केंद्र सरकार मिलकर स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को दूर करें। बेहतर जांच उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ, सही लाइसेंसिंग और नियमित निगरानी के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू करें।
साथ ही, जनता को भी जागरूक किया जाना चाहिए कि वे किस ब्लड बैंक से खून ले रहे हैं। कोविड के बाद से संक्रमण के खतरे और बढ़ गए हैं, इसलिए सुरक्षित और स्वच्छ स्वास्थ्य सेवाएं हम सबकी ज़रूरत हैं।
