लद्दाख की वादियों में जब आग भड़की, सरकार ने उंगली सोनम वांगचुक की तरफ उठाई—अब कोर्ट की बारी है!

लद्दाख की वादियों में जब आग भड़की, सरकार ने उंगली सोनम वांगचुक की तरफ उठाई—अब कोर्ट की बारी है!

  लद्दाख को लेकर जो कुछ हुआ है, वो सिर्फ एक खबर नहीं है—वो एक बड़ी हलचल है। शांत पहाड़ों के बीच अचानक ऐसा तूफान उठा कि चार लोगों की जान चली गई, दर्जनों घायल हुए, और पूरे इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा। और अब सरकार कह रही है कि इसके पीछे सोनम वांगचुक हैं। … Read more

दरोगा बनने का सपना देख रहे हो तो सिलेबस को ऐसे समझो जैसे दोस्त समझा रहा हो—सीधा, साफ और पूरा!

दरोगा बनने का सपना देख रहे हो तो सिलेबस को ऐसे समझो जैसे दोस्त समझा रहा हो—सीधा, साफ और पूरा!

  अगर आप बिहार दरोगा बनने का सपना देख रहे हैं, तो सबसे पहले ये जान लीजिए कि सिर्फ मेहनत काफी नहीं है—सही दिशा में मेहनत करनी ज़रूरी है। और सही दिशा का मतलब है सिलेबस को अच्छे से समझना। क्योंकि जब तक आपको पता नहीं होगा कि पढ़ना क्या है, तब तक तैयारी अधूरी … Read more

शादी के बाद सिर्फ नाम नहीं बदलता—हिंदू महिला का गोत्र भी बदल जाता है, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया!

शादी के बाद सिर्फ नाम नहीं बदलता—हिंदू महिला का गोत्र भी बदल जाता है, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया!

    हमारे समाज में शादी को सिर्फ एक रस्म नहीं माना जाता—ये एक नई ज़िंदगी की शुरुआत होती है। खासकर हिंदू परंपरा में तो शादी के साथ बहुत कुछ बदलता है। लड़की का नाम बदलता है, घर बदलता है, और अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि गोत्र भी बदलता है। अब … Read more

जिस अमेरिका को लोग सपनों की धरती कहते थे, अब वहीं टैलेंट को रोकने की दीवार खड़ी हो गई है!

जिस अमेरिका को लोग सपनों की धरती कहते थे, अब वहीं टैलेंट को रोकने की दीवार खड़ी हो गई है!

  पहले जब कोई कहता था कि “बेटा अमेरिका जा रहा है पढ़ाई करने”, तो मोहल्ले में मिठाई बंटती थी। सबको लगता था कि अब उसका भविष्य बन गया। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अमेरिका, जो कभी दुनिया भर के होनहारों को गले लगाता था, अब उनके लिए दरवाज़े बंद कर रहा है। और … Read more

जब सरकार ने हाथ बढ़ाया और प्रकृति ने साथ दिया—विश्वामित्री फिर से बह चली!

जब सरकार ने हाथ बढ़ाया और प्रकृति ने साथ दिया—विश्वामित्री फिर से बह चली!

  कभी-कभी लगता है कि अगर इंसान और प्रकृति एक-दूसरे का साथ दें, तो चमत्कार हो सकता है। गुजरात की विश्वामित्री नदी इसका जीता-जागता उदाहरण है। एक समय था जब ये नदी सूख चुकी थी, मगरमच्छ सड़कों पर घूमते थे, और लोग डर के मारे किनारे भी नहीं जाते थे। लेकिन अब हालात बदल रहे … Read more

एक ज़मीन का मामला जो 1923 में शुरू हुआ, वो 2025 में जाकर खत्म हुआ

एक ज़मीन का मामला जो 1923 में शुरू हुआ, वो 2025 में जाकर खत्म हुआ

78 साल आज़ादी के बाद भी सुप्रीम कोर्ट को पुर्तगाल के ज़माने की उलझन सुलझानी पड़ी आप सोचिए ज़रा—हम आज 2025 में जी रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को एक ऐसा मामला सुलझाना पड़ा जो पुर्तगाल के ज़माने से चला आ रहा था। हां, वही पुर्तगाल जिसने कभी भारत के कुछ हिस्सों पर राज किया … Read more

लद्दाख की ठंडी वादियों में “Gen Z क्रांति” — अब सिर्फ पहाड़ नहीं, आवाज़ें भी गूंज रही हैं!

लद्दाख की ठंडी वादियों में "Gen Z क्रांति" — अब सिर्फ पहाड़ नहीं, आवाज़ें भी गूंज रही हैं!

  भाई साहब, लद्दाख को लेकर जो कुछ पिछले दिनों हुआ है, वो सिर्फ खबर नहीं है—वो एक चेतावनी है। ऐसा नहीं कि वहां पहली बार विरोध हुआ हो, लेकिन इस बार जो हुआ, वो अलग था। इस बार सड़कों पर उतरे थे Gen Z—वो युवा जो स्मार्टफोन से दुनिया देखते हैं, लेकिन जब बात … Read more

“सरकार बेच रही है हिस्सेदारी, लेकिन देश की तरक्की के लिए” : 47,000 करोड़ का डिसइनवेस्टमेंट टारगेट पार करने की तैयारी

“सरकार बेच रही है हिस्सेदारी, लेकिन देश की तरक्की के लिए” : 47,000 करोड़ का डिसइनवेस्टमेंट टारगेट पार करने की तैयारी

  अब आप सोचिए, आपके पास एक दुकान है। कुछ हिस्से अच्छे चल रहे हैं, कुछ में घाटा हो रहा है। आप सोचते हैं कि क्यों न उस हिस्से को बेच दिया जाए जिससे पैसा भी आए और बाकी दुकान को बेहतर चलाया जा सके। कुछ ऐसा ही सोच रही है भारत सरकार —  और … Read more

हैदराबाद की मुसी नदी फिर से जिंदा होगी: जब राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने मिलाया हाथ

हैदराबाद की मुसी नदी फिर से जिंदा होगी: जब राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने मिलाया हाथ

  अगर आप हैदराबाद के पुराने हिस्से में कभी गए हों, तो मुसी नदी का नाम जरूर सुना होगा। कभी ये नदी शहर की जान हुआ करती थी — साफ पानी, हरियाली और किनारे बसे मोहल्ले। लेकिन वक्त के साथ ये नदी नाले में बदल गई। कचरा, गंदगी और अतिक्रमण ने इसे ऐसा बना दिया … Read more

“जज का एक साल का काम, वकील के पांच साल के काम के बराबर होता है”- अनुच्छेद 233 की व्याख्या करते हुए SC की पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा

“जज का एक साल का काम, वकील के पांच साल के काम के बराबर होता है”- अनुच्छेद 233 की व्याख्या करते हुए SC की पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा

अब आप सोचिए, अगर कोई कहे कि “जज का एक साल का काम, वकील के पांच साल के काम के बराबर होता है”, तो पहली बार सुनकर थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यही बात कही है — और वो भी संविधान की व्याख्या करते हुए, पूरे देश की न्यायिक … Read more